भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है, जिसे संकटों को दूर करने और सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखकर गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
🔹 तिथि प्रारंभ: 17 मार्च 2025, रात्रि 07:33 बजे
🔹 तिथि समाप्त: 18 मार्च 2025, रात्रि 10:09 बजे
🔹 चंद्रोदय का समय: 17 मार्च 2025, रात्रि 09:18 बजे
📅 व्रत की तिथि: चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के अनुसार 17 मार्च 2025 को व्रत रखा जाएगा।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से सभी बाधाओं और संकटों का नाश होता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से धन, बुद्धि, सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
व्रत के लाभ:
जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि
करियर और व्यवसाय में सफलता
बुद्धि, ज्ञान और आत्मबल की वृद्धि
व्रत और पूजा विधि
1. व्रत की शुरुआत
- प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
2. पूजन विधि
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को पीले वस्त्र अर्पित करें।
- धूप, दीप, पुष्प और दूर्वा (21 दुर्वा दल) अर्पित करें।
- मोदक, लड्डू और गुड़-चने का भोग लगाएं।
- गणेश जी के 108 नामों का पाठ करें।
3. संकष्टी चतुर्थी कथा
- व्रत करने वाले को संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए।
- कथा सुनने के बाद गणपति आरती करें।
4. चंद्र दर्शन और व्रत पारण
- रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें।
- गणपति बप्पा से प्रार्थना करें और व्रत का पारण करें।
निष्कर्ष
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर है। इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखने और पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में समृद्धि का आगमन होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित जानकारी प्रदान करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपने गुरु, पुरोहित या धार्मिक विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।