नई दिल्ली: हृदय रोगों से होने वाली मौतों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो अब यह समस्या केवल उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवा आबादी भी इसकी चपेट में आ रही है। आमतौर पर हार्ट अटैक के जोखिम को हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन एक ताजा अध्ययन ने वायु प्रदूषण—विशेष रूप से ओजोन के बढ़ते स्तर—को हृदय रोगों के बढ़ते मामलों से जोड़ते हुए चिंता व्यक्त की है।
हृदय रोग: बढ़ती वैश्विक समस्या
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2023 में हृदय रोग वैश्विक स्तर पर मौतों का सबसे बड़ा कारण बना रहा।
- कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD) से 1.79 करोड़ (17.9 मिलियन) लोगों की मृत्यु हुई।
- कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदूषण और अन्य जोखिम कारकों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में यह आंकड़ा और भयावह हो सकता है।
क्या कहता है हालिया शोध?
ओजोन और हृदय रोगों के बीच गहरा संबंध
जियोहेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वातावरण में बढ़ता ओजोन स्तर और मौसम परिवर्तन हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी की एक रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि जो लोग अधिक समय तक प्रदूषित वातावरण में रहते हैं, उनमें न केवल हृदय रोगों की संभावना अधिक होती है, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने और आईसीयू में भर्ती होने के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है।
चीन के शीआन जियाओटोंग विश्वविद्यालय में हुआ अध्ययन
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर शाओवेई वू ने बताया कि तीन वर्षों के अध्ययन में पाया गया कि हृदय रोगों के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई, और इसका एक प्रमुख कारण ओजोन प्रदूषण रहा।
ओजोन प्रदूषण कैसे बढ़ा रहा है हार्ट अटैक का खतरा?
ओजोन, जोकि एक फोटोकैमिकल स्मॉग का प्रमुख घटक है, तब बनता है जब सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में औद्योगिक और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक आपस में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं।
हृदय पर ओजोन के दुष्प्रभाव:
- रक्त वाहिकाओं में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है।
- हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
- रक्त संचार प्रणाली पर नकारात्मक असर डालता है।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव मिश्रा के मुताबिक,
"हमने देखा है कि जिन क्षेत्रों में ओजोन प्रदूषण अधिक है, वहां दिल की बीमारियों के मामले भी ज्यादा हैं। खासकर युवा मरीजों में हार्ट अटैक के मामलों में इजाफा हुआ है।"
WHO पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वायु प्रदूषण, जिसमें ओजोन शामिल है, हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है।
क्या करें? कैसे बचें?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग और भी गंभीर रूप ले सकता है।
सरकार और समाज के लिए आवश्यक कदम:
- वाहनों और औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।
- शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाई जाए और चेतावनी प्रणाली लागू की जाए।
- हरित क्षेत्र (ग्रीन स्पेस) और वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए।
व्यक्तिगत स्तर पर बचाव के उपाय:
- प्रदूषण के दिनों में घर से बाहर निकलने से बचें।
- हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करें।
- धूम्रपान और अल्कोहल से परहेज करें।
- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
ओजोन प्रदूषण और हृदय रोगों के बीच गहरा संबंध है, और इस खतरे को नजरअंदाज करना आत्मघाती साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण, स्वस्थ जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच से इस गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है।
अगर अब भी सतर्कता नहीं बरती गई, तो आने वाले वर्षों में हार्ट अटैक और हृदय रोगों से होने वाली मौतों का आंकड़ा और भी भयावह हो सकता है।
📢 डिस्क्लेमर:
यह रिपोर्ट विभिन्न शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। दी गई जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।