NEET UG 2026: टेलीग्राम बैन पर सियासी घमासान, केजरीवाल बोले- "सरकार की मंशा ठीक नहीं, ये केवल दिखावटी कदम"
नई दिल्ली: 21 जून को होने वाले नीट-यूजी (NEET-UG 2026) री-एग्जाम से ठीक पहले मैसेजिंग ऐप 'टेलीग्राम' (Telegram) पर लगे अस्थायी प्रतिबंध ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के इस कदम पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे समस्या से भागने वाला 'बेतुका कदम' करार दिया है।
केजरीवाल का वार: "क्या एक ऐप से रुकेगा माफिया?"
'अमर उजाला' और अन्य प्रमुख समाचार पत्रों की राजनीतिक कवरेज के अनुसार, केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सेना के विमानों से पेपर भेजना या टेलीग्राम बंद करना पेपर लीक का असली इलाज नहीं है। उन्होंने तीखा सवाल दागा, "क्या टेलीग्राम बंद करने से पेपर लीक रुक जाएगा?" केजरीवाल का तर्क है कि यह एक संगठित अपराध है और सरकार की असल मंशा इसे रोकने की नहीं, बल्कि केवल दिखावा करने की है।
NTA का बचाव और बैन की पृष्ठभूमि
दूसरी ओर, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने इस डिजिटल स्ट्राइक का बचाव किया है। उनके अनुसार, 22 जून तक टेलीग्राम को बैन करना और गूगल-एप्पल स्टोर से इसे हटवाना, फर्जी पेपर लीक सामग्री और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया जरूरी कदम है। गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा भारी धांधली और पेपर लीक के पुख्ता आरोपों के बाद 12 मई को रद्द करनी पड़ी थी।
हमारी राय में
hindi.thetrendingpeople.com के राजनीतिक डेस्क की राय में, केजरीवाल द्वारा उठाया गया सवाल काफी हद तक वाजिब है। पेपर लीक किसी ऐप की वजह से नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर बैठे भ्रष्ट लोगों की मिलीभगत से होता है। माफियाओं को रोकने के लिए सिर्फ टेलीग्राम को बंद कर देना, बुखार उतारने के लिए थर्मामीटर तोड़ने जैसा है। अगर अपराधी दूसरे सुरक्षित ऐप्स (जैसे वॉट्सऐप या सिग्नल) पर शिफ्ट हो गए, तो सरकार क्या करेगी? आवश्यकता ऐप्स को बैन करने की नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को 'बुलेटप्रूफ' बनाने और भीतरघातियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की है।
