अमेरिका-ईरान समझौते की सुगबुगाहट से क्रूड ऑयल में भारी गिरावट, 94.29 पर पहुंचा रुपया, भारतीय बाजार को 'संजीवनी'
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित अंतरिम शांति समझौते और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के फिर से खुलने की उम्मीदों ने वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को नीचे ला दिया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 0.72% गिरकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 1% टूटकर 75.35 डॉलर पर आ गया।
युद्धविराम और कूटनीतिक हलचल
'अमर उजाला' और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक पत्रिकाओं की रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल में घोषित युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्टीकरण और ईरान द्वारा समुद्री यातायात से रोक हटाने की सहमति के बाद बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है। ज्ञात हो कि 28 फरवरी के हमलों के बाद से ईरान ने इस मार्ग को बाधित कर रखा था।
भारत को फायदा: रुपया मजबूत, शेयर बाजार को उम्मीद
इस वैश्विक हलचल का सीधा लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला है। बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे उछलकर 94.29 पर कारोबार कर रहा था।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी अब थमेगी। विशेषज्ञों ने कहा, "ब्रेंट क्रूड के 79 डॉलर के नीचे आने और एफसीएनआर डिपॉजिट योजना से विदेशी पूंजी के प्रवाह से रुपये को और मजबूती मिलेगी, जिससे शेयर बाजार में स्थिरता आएगी।"
हमारी राय में
hindi.thetrendingpeople.com के आर्थिक डेस्क के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना सप्लाई चेन को सामान्य करेगा। तेल सस्ता होने से घरेलू महंगाई घटेगी और मजबूत होता रुपया भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) का भरोसा फिर से कायम करेगा। यह भारत की आर्थिक विकास दर के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
