राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आईं प्रतिष्ठित महिलाओं ने भाग लिया। सम्मेलन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जोरदार स्वागत किया गया और इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया गया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अधिनियम को महिलाओं के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं राष्ट्र-निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं—चाहे सशस्त्र बल हों, विज्ञान, उद्योग या पेशेवर जीवन। अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यह पहल ‘बेटी बचाओ’ और ‘बेटी पढ़ाओ’ से आगे बढ़कर ‘बेटी बढ़ाओ’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा और महिलाओं को नीति-निर्धारण के केंद्र में लाएगा।
विशेषज्ञों और हस्तियों ने भी जताया समर्थन
प्रसिद्ध वैज्ञानिक टेसी थॉमस ने इसे महिलाओं की नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला कदम बताया। उनके अनुसार संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण महिलाओं को मजबूत बनाएगा।
फैशन डिजाइनर डॉली जैन ने कहा कि महिलाएं घर संभाल सकती हैं, तो देश भी संभाल सकती हैं। उन्होंने इसे महिला नेतृत्व का नया दौर बताया।
वहीं पैरालंपिक पदक विजेता दीपा मलिक ने कहा कि पंचायत से संसद तक आरक्षण महिलाओं को देश की आवाज बनाएगा और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
प्रसिद्ध नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने इसे “महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास” करार दिया और इसे भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर देशभर में सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। सम्मेलन में शामिल महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को नई पहचान और अवसर मिलेंगे।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल समानता का सवाल नहीं, बल्कि बेहतर शासन और संतुलित विकास की जरूरत भी है। इस पहल से महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे देश की नीतियों में विविधता और संवेदनशीलता बढ़ेगी। हालांकि, इस अधिनियम का असली असर इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारत को एक मजबूत और समावेशी लोकतंत्र की दिशा में आगे ले जा सकता है।
