कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत तय की है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब ब्याज दर को अपरिवर्तित रखा गया है। सूत्रों के अनुसार ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया। अब इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद सात करोड़ से अधिक अंशधारकों के खातों में 2025-26 का ब्याज जमा किया जाएगा।
पिछले वर्ष भी 2024-25 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बरकरार रखी गई थी। इससे पहले 2023-24 में दर को 8.15 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत किया गया था। हालांकि 2021-22 में ईपीएफओ ने ब्याज दर घटाकर 8.10 प्रतिशत कर दी थी, जो चार दशक से अधिक का न्यूनतम स्तर था। वित्त वर्ष 2020-21 में भी ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से घटाकर 8.10 प्रतिशत कर दी गई थी, जिसे 1977-78 के बाद सबसे कम माना गया था।
ऐतिहासिक रुझान पर नजर डालें तो 2015-16 में ब्याज दर 8.8 प्रतिशत थी, जबकि 2016-17 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत दी गई। 2013-14 और 2014-15 में 8.75 प्रतिशत की दर लागू रही थी। समय-समय पर बाजार परिस्थितियों और निवेश से मिलने वाले रिटर्न के आधार पर दरों में बदलाव होता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच 8.25 प्रतिशत की दर को बनाए रखना अंशधारकों के लिए स्थिरता का संकेत है। हालांकि महंगाई और बाजार रिटर्न की तुलना में वास्तविक रिटर्न पर चर्चा जारी है। श्रम संगठनों का मानना है कि दर में वृद्धि की गुंजाइश थी, जबकि वित्तीय विश्लेषकों का तर्क है कि निवेश आय और बाजार स्थितियों को देखते हुए यह संतुलित फैसला है।
इस निर्णय का सीधा असर देश के करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत पर पड़ेगा। ब्याज दर स्थिर रहने से खाताधारकों को अनुमानित रिटर्न मिलेगा और वित्तीय योजना बनाना आसान रहेगा। अंतिम मंजूरी के बाद ईपीएफओ ब्याज की गणना कर राशि सीधे खातों में जमा करेगा।
Our Thoughts:
8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को बरकरार रखना स्थिरता का संकेत है, खासकर तब जब वैश्विक बाजार उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं। हालांकि भविष्य में महंगाई और निवेश रिटर्न की दिशा यह तय करेगी कि अंशधारकों को वास्तविक लाभ कितना मिलता है।
