थोक महंगाई में लगी आग: जनवरी में लगातार तीसरे महीने बढ़ी दर; सब्जियों और खाद्य वस्तुओं ने बिगाड़ा गणित, जानें आम आदमी पर असर
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर महंगाई को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। देश में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2026 में लगातार तीसरे महीने बढ़ते हुए 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य उत्पादों और विनिर्मित सामानों की कीमतों में आई मासिक बढ़त इस उछाल की मुख्य वजह मानी जा रही है।
सोमवार को उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह दर पिछले साल जनवरी (
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण
मंत्रालय के बयान के अनुसार, जनवरी 2026 में थोक महंगाई में वृद्धि के पीछे कई कारक जिम्मेदार रहे हैं:
- विनिर्माण क्षेत्र: मूल धातुओं और अन्य विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में इजाफा।
- खाद्य वस्तुएं: सब्जियों और अनाज की कीमतों में मासिक आधार पर उछाल।
- गैर-खाद्य श्रेणी: इस सेक्टर में सबसे तेज बढ़त दर्ज की गई है।
सेक्टर-वार आंकड़ों का विश्लेषण
जनवरी माह में विभिन्न क्षेत्रों में महंगाई की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
श्रेणी | जनवरी 2026 (WPI) | दिसंबर 2025 (WPI) |
|---|---|---|
खाद्य वस्तुएं | ||
सब्जियां | ||
विनिर्मित उत्पाद | ||
गैर-खाद्य उत्पाद | ||
ईंधन और बिजली |
विशेष रूप से, सब्जियों की कीमतों में आई
खुदरा महंगाई और RBI का रुख
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई (CPI) के आंकड़ों में भी बढ़त देखी गई है। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की खुदरा महंगाई दर जनवरी में बढ़कर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति तय करने के लिए खुदरा महंगाई को ही मुख्य आधार बनाता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक आरबीआई ने रेपो रेट में
संपादकीय विश्लेषण
थोक महंगाई का लगातार तीसरे महीने बढ़ना इस बात का संकेत है कि सप्लाई चेन और विनिर्माण लागत में दबाव बढ़ रहा है। गैर-खाद्य उत्पादों में