एनएसडी के आंगन में लौटीं यादें—'वध 2' के बहाने अपने 'घर' पहुंचे संजय मिश्रा, इरफान खान को याद कर भर आई आंखें, कहा "वो एक्टिंग नहीं, जादू करते थे
नई दिल्ली, दिनांक: 2 फरवरी 2026 — भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में और कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनका होना ही अभिनय का उत्सव माना जाता है। साल 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक, 'वध 2' (Vadh 2) अपनी रिलीज के करीब पहुंच रही है और इसके साथ ही दर्शकों का उत्साह भी चरम पर है। नीना गुप्ता और संजय मिश्रा जैसे मंझे हुए कलाकारों के नेतृत्व वाली यह 'एक्टर-ड्रिवन' फ्रेंचाइजी अपने ट्रेलर रिलीज के बाद से ही चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी सिलसिले में फिल्म की स्टारकास्ट जब अपनी जड़ों को तलाशने और प्रमोशन के लिए राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित 'नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा' (NSD) पहुंची, तो वहां एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। यह केवल एक फिल्म का प्रमोशन नहीं था, बल्कि कला के साधकों की अपने 'तीर्थस्थल' पर वापसी थी।
फिल्म के मुख्य कलाकार संजय मिश्रा, नीना गुप्ता और कुमुद मिश्रा, जो तीनों ही इस प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व छात्र (Alumni) रहे हैं, का एनएसडी में पहुंचना किसी जश्न से कम नहीं था। छात्रों, फैकल्टी और थिएटर प्रेमियों ने उनका स्वागत जिस गर्मजोशी और प्यार से किया, उसने माहौल को पुरानी यादों और नई ऊर्जा से भर दिया। इस दौरान कलाकारों ने अपने संघर्ष के दिनों, सीखने की प्रक्रिया और थिएटर की बारीकियों पर खुलकर बात की। लेकिन इस पूरी बातचीत का सबसे भावुक और यादगार पल वह था जब संजय मिश्रा ने अपने अजीज दोस्त और दिवंगत अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) को याद किया।
संजय मिश्रा ने एनएसडी में बिताए अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए एक ऐसा किस्सा साझा किया जो अभिनय सीखने वाले हर छात्र के लिए किसी गुरुमंत्र से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्लासरूम से ज्यादा अपने सीनियर्स को देखकर सीखा है। अपने अनुभव को शब्दों में पिरोते हुए मिश्रा ने कहा कि मुझे खुद नहीं पता कि एनएसडी में मैंने क्या सीखा या क्या नहीं सीखा, लेकिन मेरे पास इरफान भाई जैसे लोग थे। आप बस उन्हें देखते रह सकते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में वीरेंद्र सक्सेना, अंकुर जी और रॉबिन दास जैसे दिग्गज वहां मौजूद थे। रॉबिन दास, जो उस वक्त भी वहां मौजूद थे, की ओर इशारा करते हुए संजय ने कहा कि आज की पीढ़ी मोबाइल में लगी है, लेकिन हमारे लिए उन्हें देखना ही अपने आप में एक सीख थी।
इरफान खान की अभिनय क्षमता का जिक्र करते हुए संजय मिश्रा का गला रुंध गया। उन्होंने कहा कि अनुप दा और इरफान भाई ऐसे लोग थे जिन्हें आप लगातार ऑब्ज़र्व (Observe) करते रहते थे। मिश्रा ने एक बेहद मार्मिक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि मुझे याद है, एक बार इरफान भाई को परफॉर्म करते हुए देखकर मेरे मन में आया था कि 'ये आदमी एक्टिंग कब शुरू करेगा?' क्योंकि वे इतना सहज और स्वाभाविक थे कि लगता ही नहीं था कि कोई अभिनय कर रहा है। वह उस लेवल पर खेल रहे थे जहां अभिनय और वास्तविकता का भेद मिट जाता है। संजय मिश्रा का यह बयान इरफान खान की उस 'नेचुरल एक्टिंग' की विरासत को सलाम था, जिसने भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
'वध 2' को लेकर दर्शकों में जो उत्सुकता है, वह इसकी कास्टिंग और कहानी के कारण है। यह फिल्म 2022 में आई स्लीपर हिट 'वध' का स्पिरिचुअल सीक्वल (Spiritual Sequel) बताई जा रही है। पहली फिल्म ने जहां एक बुजुर्ग दंपती के संघर्ष और अपराधबोध की कहानी को बयां किया था, वहीं दूसरा भाग इस थ्रिलर को एक नए स्तर पर ले जाने का वादा करता है। नीना गुप्ता और संजय मिश्रा की जोड़ी ने साबित कर दिया है कि अगर कहानी में दम हो, तो उम्र केवल एक आंकड़ा है। एनएसडी का यह दौरा इस बात का प्रमाण है कि ये कलाकार आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी वे उस संस्थान को नहीं भूले जिसने उन्हें तराशा है।
छात्रों के साथ संवाद के दौरान नीना गुप्ता और कुमुद मिश्रा ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एनएसडी ने उन्हें न केवल एक अभिनेता बनाया, बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया भी दिया। कुमुद मिश्रा ने कहा कि थिएटर अनुशासन सिखाता है और यही अनुशासन कैमरे के सामने काम आता है। फिल्म के प्रमोशन के बहाने ही सही, लेकिन एनएसडी के प्रांगण में इन दिग्गजों का जुटना कला के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करता है। वहां मौजूद युवा छात्रों के लिए यह एक 'मास्टरक्लास' जैसा अनुभव था, जहां उन्होंने किताबों से नहीं, बल्कि अनुभवों से सीखा।
हमारी राय
संजय मिश्रा का इरफान खान को याद करना यह बताता है कि महान कलाकार कभी मरते नहीं, वे अपने समकालीनों और प्रशंसकों की यादों में जीवित रहते हैं। 'वध 2' जैसी फिल्मों का आना हिंदी सिनेमा के लिए शुभ संकेत है। यह दर्शाता है कि दर्शक अब स्टार पावर से ज्यादा 'कंटेंट पावर' और 'परफॉर्मेंस' को महत्व दे रहे हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि एनएसडी जैसे संस्थानों का महत्व भारतीय सिनेमा में रीढ़ की हड्डी जैसा है। जब संजय मिश्रा कहते हैं कि "इरफान भाई को देखना ही सीख थी", तो वे अनजाने में आज की पीढ़ी को यह संदेश दे रहे हैं कि अभिनय इंस्टाग्राम रील बनाने से नहीं, बल्कि जीवन और लोगों को गहराई से देखने (Observation) से आता है। 'वध 2' से उम्मीदें इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि इसके पीछे ऐसे कलाकार हैं जो अभिनय को 'खेल' नहीं, 'साधना' मानते हैं।
