UGC NET 2026: पांचवें प्रयास में AIR 1 लाकर दीक्षा मक्कड़ बनीं मिसाल, हार के बाद कैसे बदली रणनीति
अक्सर कहा जाता है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि कई असफलताओं की सीढ़ियां चढ़कर हासिल होती है। अंबाला की रहने वाली दीक्षा मक्कड़ की कहानी इसी कहावत को सच साबित करती है। लगातार चार बार असफल होने के बाद उन्होंने पांचवें प्रयास में UGC NET परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनका सफर केवल परीक्षा पास करने का नहीं, बल्कि खुद को बार-बार खड़ा करने और मानसिक रूप से मजबूत बनने का उदाहरण है।
दीक्षा मक्कड़ वर्तमान में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के लोक प्रशासन विभाग में पीएचडी रिसर्च स्कॉलर हैं। पिछले तीन वर्षों से वह UGC NET की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने बताया कि यह उनकी पांचवीं कोशिश थी और इस बार उन्होंने देशभर में पहला स्थान हासिल किया। उनके मुताबिक यह उपलब्धि आसान नहीं थी, लेकिन लगातार मेहनत, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
असफलता से सीखने का दौर
दीक्षा ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार UGC NET का पेपर दिया, तब उन्हें परीक्षा के पैटर्न और उसकी गहराई का अंदाजा हुआ। दूसरी कोशिश में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन सफलता अभी भी दूर थी। तीसरी बार असफल होने के बाद निराशा ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया। चौथे प्रयास में भी जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिला, तो उन्होंने लगभग हार मान ली थी।
उनका कहना है कि चौथे प्रयास के बाद वह मानसिक रूप से काफी टूट गई थीं। उन्हें लगने लगा था कि शायद यह परीक्षा उनके लिए नहीं बनी है। लेकिन इसी दौरान उनके सुपरवाइजर और शिक्षकों ने उन्हें दोबारा प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि असफलता अंतिम नहीं होती, बल्कि यह रणनीति बदलने का संकेत होती है।
बदली रणनीति, बदला परिणाम
पांचवें प्रयास से पहले दीक्षा ने अपनी तैयारी की रणनीति पूरी तरह बदल दी। उन्होंने अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया और यह समझा कि कहां सुधार की जरूरत है। उन्होंने विषय को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ाई की। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गोल्स तय किए। हर सप्ताह और हर महीने का टारगेट बनाया।
दीक्षा के अनुसार, लगातार मॉक टेस्ट देना उनकी सफलता की बड़ी वजह बना। उन्होंने हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और दोबारा वही गलती न दोहराने की कोशिश की। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपडेटेड कंटेंट से खुद को जोड़े रखा।
उनका मानना है कि UGC NET जैसी परीक्षा में केवल रटने से काम नहीं चलता। कॉन्सेप्ट की गहरी समझ, समय प्रबंधन और नियमित रिवीजन बेहद जरूरी है। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान रोजाना रिवीजन के लिए अलग समय निर्धारित किया था।
परिवार और मेंटर्स का साथ
दीक्षा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मेंटर्स को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार का सहयोग सबसे बड़ी ताकत था। जब वह निराश होती थीं, तब परिवार ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने की हिम्मत दी।
उन्होंने बताया कि अगर परिवार और शिक्षकों का विश्वास नहीं होता, तो शायद वह पांचवां प्रयास करने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं। उनके सुपरवाइजर ने उन्हें यह एहसास कराया कि असफलता केवल एक चरण है, मंजिल नहीं।
मानसिक मजबूती बनी असली हथियार
दीक्षा के मुताबिक तैयारी के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना सबसे कठिन काम होता है। लगातार असफलता आत्मविश्वास को तोड़ देती है। उन्होंने खुद को सकारात्मक रखने के लिए रोजाना कुछ समय मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज के लिए भी निकाला।
उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी केवल किताबों तक सीमित नहीं होती। यह मानसिक धैर्य और आत्म-नियंत्रण की भी परीक्षा होती है। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई और अपने लक्ष्य पर फोकस रखा।
भविष्य की योजना
UGC NET में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने के बाद दीक्षा का अगला लक्ष्य असिस्टेंट प्रोफेसर बनना है। उन्हें रिसर्च और शिक्षण कार्य में गहरी रुचि है। वह अकादमिक क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सिविल सेवा में भी रुचि है और वह भविष्य में इसकी तैयारी करने पर विचार कर रही हैं। फिलहाल उनका फोकस अपने रिसर्च कार्य को आगे बढ़ाने और शिक्षण क्षेत्र में योगदान देने पर है।
उम्मीदवारों के लिए संदेश
दीक्षा मक्कड़ की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बार-बार असफल होने के बाद खुद को कमजोर महसूस करने लगते हैं। उनका मानना है कि असफलता से घबराने की बजाय उससे सीखना चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि तैयारी को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटें, नियमित रिवीजन करें और मॉक टेस्ट को गंभीरता से लें। सबसे जरूरी है खुद पर विश्वास बनाए रखना।
दीक्षा कहती हैं कि अगर आप मेहनत और ईमानदारी से प्रयास करते हैं, तो देर-सवेर सफलता जरूर मिलती है। पांचवीं कोशिश में AIR 1 हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि लगातार प्रयास कभी बेकार नहीं जाते।
उनकी सफलता यह साबित करती है कि सपनों को पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। असफलता अंत नहीं है, बल्कि नई शुरुआत का अवसर है।