Indian Parliament proceedings में हंगामा: Kiren Rijiju का कांग्रेस पर गंभीर आरोप, स्पीकर की गरिमा पर विवाद
भारतीय संसदीय इतिहास में बुधवार का दिन काफी तनावपूर्ण रहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कुछ कांग्रेस सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चेंबर में गए और उनके साथ धमकी भरा व्यवहार किया। रिजिजू के अनुसार, सांसदों ने अध्यक्ष के निर्देशों की अवहेलना की और अपशब्दों का प्रयोग भी किया।
उन्होंने इस घटना को “अभूतपूर्व” बताते हुए कहा कि उनके संसदीय करियर में उन्होंने ऐसा आचरण पहले कभी नहीं देखा। रिजिजू ने इसे संसदीय परंपराओं पर “काला धब्बा” बताया और कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं जारी रहीं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
राहुल गांधी के आचरण पर टिप्पणी
रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सदन में प्रधानमंत्री सहित हर सदस्य को बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है। रिजिजू के अनुसार, यदि कोई यह मानता है कि उसे बिना अनुमति के बोलने का अधिकार है, तो यह संसदीय नियमों का उल्लंघन है।
उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार को “थियेट्रिक्स” करार देते हुए कहा कि विपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए।
इस घटनाक्रम के बीच विपक्ष की ओर से लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा भी तेज है। रिजिजू ने कहा कि हर संवैधानिक प्रक्रिया का एक तय ढांचा होता है और स्पीकर के पद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। विपक्ष पहले ही सरकार पर सदन में बोलने का अवसर न देने का आरोप लगा चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।
Our Final Thoughts
संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां बहस और असहमति स्वाभाविक है, लेकिन मर्यादा और नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। जिस तरह से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ रहे हैं, उससे राजनीतिक तापमान और तेज हो सकता है। ऐसे समय में सभी दलों की जिम्मेदारी है कि वे व्यक्तिगत आरोपों से ऊपर उठकर संस्थाओं की गरिमा को प्राथमिकता दें। स्पीकर का पद निष्पक्षता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उससे जुड़ा कोई भी विवाद व्यापक राजनीतिक असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह टकराव संवाद के जरिए सुलझता है या संसद की कार्यवाही पर इसका और असर पड़ता है।
