मोदी कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: 'केरल' अब आधिकारिक तौर पर होगा 'केरलम'; जानें क्या है आगे की कानूनी प्रक्रिया
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | दक्षिण भारतीय राज्य केरल की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को सम्मान देते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 'केरल' (Kerala) का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि मोदी कैबिनेट ने 'सेवा तीर्थ' से कार्यभार संभालने के बाद यह पहला ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से ही यह पुरानी मांग उठ रही थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव भी करीब हैं, जो इसे राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बनाता है।
'केरलम' नाम का सांस्कृतिक और भाषाई महत्व
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 'केरलम' शब्द मलयालम भाषा और वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। मलयालम में राज्य को हमेशा से 'केरलम' ही कहा जाता रहा है, लेकिन अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के प्रभाव में आधिकारिक दस्तावेजों में यह 'केरल' दर्ज हो गया था। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का मुख्य उद्देश्य यही है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी मान्यता प्राप्त भाषाओं में राज्य का नाम अब केवल 'केरलम' के रूप में ही पहचाना जाए।
विधानसभा को भेजा जाएगा ड्राफ्ट (कानूनी प्रक्रिया)
कैबिनेट की इस प्रारंभिक मंजूरी के बाद नाम परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया अब अगले चरण में प्रवेश करेगी:
- विधानसभा की अंतिम सहमति: नाम परिवर्तन से संबंधित बिल (Draft Bill) को अब केरल विधानसभा में अंतिम सहमति के लिए भेजा जाएगा।
- प्रस्तावों का इतिहास: गौरतलब है कि केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था।
- तकनीकी संशोधन: इससे पहले अगस्त 2023 में भी राज्य सरकार द्वारा ऐसा ही एक प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन तब केंद्रीय गृह मंत्रालय के कुछ तकनीकी सुझावों के बाद इसे वापस कर दिया गया था, जिसे राज्य ने दोबारा संशोधित कर 2024 में भेजा था।
सत्तापक्ष और विपक्ष की सर्वसम्मति
यह उन विरले मुद्दों में से एक है जिस पर केरल में वामपंथी सरकार (LDF), विपक्षी गठबंधन (UDF) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से एकमत हैं। इस बदलाव की मांग को केवल सत्तापक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष का भी भरपूर समर्थन प्राप्त था। हाल ही में केरल बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 'केरलम' नाम अपनाने का आधिकारिक आग्रह किया था।
कैबिनेट की इस बैठक में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 'सेवा तीर्थ' से लिए गए सभी निर्णय देश के 140 करोड़ नागरिकों के हितों और उनकी सांस्कृतिक भावनाओं को सर्वोपरि रखकर लिए गए हैं।
संपादकीय विश्लेषण
राज्यों और शहरों के मूल नामों की वापसी का सिलसिला भारतीय राजनीति में नया नहीं है (जैसे बॉम्बे से मुंबई, मद्रास से चेन्नई), लेकिन 'केरलम' का मामला भाषाई अस्मिता से जुड़ा है। चुनाव से ठीक पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर केंद्र की भाजपा सरकार ने केरल के मतदाताओं, विशेषकर सांस्कृतिक रूप से जागरूक वर्ग, को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। यह संघवाद (Federalism) का एक अच्छा उदाहरण है जहां राज्य विधानसभा की सर्वसम्मत मांग का केंद्र ने सम्मान किया है।
