बजट के बाद रुपये ने दिखाई 'दमदार' वापसी—डॉलर के मुकाबले 42 पैसे सुधरा, कच्चे तेल की नरमी और RBI के 'सुरक्षा चक्र' ने 92 के पार जाने से रोका
मुंबई/नई दिल्ली, दिनांक: 2 फरवरी 2026 — केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा संसद में आम बजट 2026-27 पेश किए जाने के ठीक एक दिन बाद भारतीय मुद्रा बाजार में एक सकारात्मक और राहत भरी तस्वीर देखने को मिली है। पिछले कुछ दिनों से डॉलर के मुकाबले लगातार गिरते और रिकॉर्ड निचले स्तरों को छूते भारतीय रुपये ने सोमवार को जोरदार वापसी की है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे की मजबूती के साथ 91.51 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। रुपये में आई इस जान की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सक्रियता मानी जा रही है। बजट के बाद निवेशकों की धारणा में आए सुधार ने भी गिरते रुपये को थामने में अहम भूमिका निभाई है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में सोमवार सुबह रुपये की शुरुआत 91.95 के स्तर पर हुई। दिन के कारोबार के दौरान मुद्रा में उतार-चढ़ाव देखा गया, जहां इसने 91.45 का उच्चस्तर छुआ, वहीं 91.95 के निचले स्तर तक भी गया। अंततः बाजार बंद होने तक रुपया पिछले बंद स्तर के मुकाबले 42 पैसे मजबूत होकर 91.51 पर स्थिर हुआ। यह सुधार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले शुक्रवार को रुपया 92.02 के अपने अब तक के सबसे निचले रिकॉर्ड स्तर (All-time Low) पर पहुंच गया था, हालांकि बाद में मामूली सुधार के साथ 91.93 पर बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बजट ने रुपये को एक भरोसा दिया है, जिससे घबराहट में होने वाली बिकवाली (Panic Selling) रुकी है।
इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार से मिले संकेत हैं। वैश्विक मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के वायदा कारोबार में 4.46 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भाव लुढ़ककर 66.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में यह नरमी अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने की चर्चाओं और कूटनीतिक प्रयासों के चलते आई है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के सस्ता होने का सीधा और सकारात्मक असर रुपये की सेहत पर पड़ता है। इससे चालू खाता घाटे (CAD) और आयात बिल का दबाव कम होने की उम्मीद जगी है।
इसके अलावा, विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने एक और महत्वपूर्ण कारक की ओर इशारा किया है—भारतीय रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप। बाजार सूत्रों के अनुसार, आरबीआई रुपये को 92 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाने से रोकने के लिए पूरी मजबूती से सक्रिय नजर आया। केंद्रीय बैंक ने संभवतः सरकारी बैंकों के माध्यम से डॉलर की बिक्री कर रुपये को सहारा दिया, जिससे सट्टेबाजों को अपने पैर पीछे खींचने पड़े। आरबीआई का यह कदम बाजार में स्थिरता लाने और अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हालांकि, सब कुछ हरा-भरा नहीं है। बजट में सरकार द्वारा घोषित 17.2 लाख करोड़ रुपये की भारी उधारी योजना (Borrowing Plan) ने बांड बाजार और विदेशी निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं। इतनी बड़ी उधारी से राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर दबाव पड़ सकता है, जो आने वाले समय में निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक (Dollar Index) 0.09 प्रतिशत बढ़कर 97.07 पर कारोबार कर रहा था, जो बताता है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर अभी भी मजबूत बना हुआ है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने बाजार के भविष्य का खाका खींचते हुए कहा कि निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 91.10 से 91.85 के दायरे में कारोबार कर सकता है। उनका मानना है कि बजट के बाद अब बाजार का ध्यान वैश्विक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर रहेगा। दूसरी ओर, शेयर बाजार के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह नहीं लौटा है। रविवार को विशेष सत्र या रिपोर्टिंग के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 588.34 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो पूंजी निकासी (Outflow) के दबाव को दर्शाता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
बजट के बाद रुपये में आई यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक 'बूस्टर डोज' की तरह है। 92 के स्तर को टूटने से बचाना आरबीआई की एक बड़ी रणनीतिक जीत है। कच्चे तेल के दामों में गिरावट भारत के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है, क्योंकि यह महंगाई और व्यापार घाटे दोनों को काबू में रखने में मदद करेगा।
The Trending People का विश्लेषण है कि सरकार की उधारी योजना एक चुनौती जरूर है, लेकिन अगर बजट में किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के वादे जमीन पर उतरते हैं, तो यह निवेश आकर्षित करेगा। रुपये की असली परीक्षा तब होगी जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों पर फैसला लेगा। फिलहाल, 91.51 का स्तर निर्यातकों और आयातकों दोनों के लिए सांस लेने का मौका है। बाजार को अब स्थिरता की जरूरत है, न कि भारी उतार-चढ़ाव की।
