भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत के अगले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को लेकर कोई संदेह नहीं है। नई जीडीपी श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष के लिए यह लगभग 7.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है।
प्रेस वार्ता के दौरान नागेश्वरन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत की विकास दर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे तेज रही है और जी20 देशों में भी भारत वृद्धि के मामले में अग्रणी बना हुआ है। उन्होंने बताया कि तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में विनिमय दर जैसे कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और 2025 में यह पहलू पूरी तरह भारत के पक्ष में नहीं रहा, जिसका असर समग्र आकलन पर पड़ सकता है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने जोर दिया कि भारत को उन पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए जो उसके नियंत्रण में हैं। उनके अनुसार नीतिगत सुधार, निवेश और संरचनात्मक बदलाव वास्तविक रूप से कम से कम 7 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि तथा नाममात्र रूप से 10 से 11 प्रतिशत की गैर-मुद्रास्फीति वृद्धि का मार्ग तैयार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार समझौते और भारत का विकसित हो रहा एआई इकोसिस्टम दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था की ताकत बन सकता है।
नागेश्वरन ने संकेत दिया कि इन पहलों से पूंजी प्रवाह बेहतर होगा और विनिमय दर को स्थिरता मिलेगी, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय जीडीपी का डॉलर मूल्य अर्थव्यवस्था के वास्तविक प्रदर्शन को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शा सकेगा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने भी संशोधित जीडीपी श्रृंखला को अधिक सटीक बताते हुए कहा कि नए आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत तस्वीर पेश करते हैं और समय के साथ इसका प्रभाव स्पष्ट होगा।
लगातार उच्च वृद्धि, निवेश और सुधारों के चलते विश्लेषकों का मानना है कि भारत वैश्विक आर्थिक क्रम में तेजी से ऊपर बढ़ रहा है और मौजूदा रफ्तार बरकरार रहने पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निकट भविष्य में हासिल किया जा सकता है।
Our Thoughts
भारत की आर्थिक दिशा में स्थिर वृद्धि और नीतिगत सुधार प्रमुख कारक बनकर उभर रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल विस्तार और निवेश प्रवाह अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं। यदि विनिमय दर स्थिर रहती है और सुधारों की रफ्तार जारी रहती है, तो भारत का वैश्विक आर्थिक स्थान और मजबूत हो सकता है।
