UP Budget 2026: योगी सरकार के बजट पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सियासी बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे विकासोन्मुखी और जनहितकारी बताया, जबकि विपक्ष ने इसे “दिखावे का बजट” करार दिया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मेट्रो परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, कानून-व्यवस्था और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। वहीं सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने इसे “घाटे का बजट” बताया।
विधानसभा में प्रस्तुत बजट दस्तावेजों के अनुसार, सरकार ने शहरी परिवहन, स्वास्थ्य अवसंरचना और कृषि क्षेत्र के लिए विशेष आवंटन का दावा किया है। वित्त विभाग द्वारा जारी आधिकारिक बजट पुस्तिका में मेट्रो विस्तार, कैंसर दवाओं पर राहत और स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का उल्लेख है।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि पूर्व में घोषित परियोजनाओं की प्रगति और जमीनी स्थिति का स्वतंत्र ऑडिट सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुछ मामलों में स्वास्थ्य सेवाओं और दवा गुणवत्ता को लेकर उच्च न्यायालयों में याचिकाएं लंबित रही हैं, जिन पर सरकार ने नियमानुसार जवाब दाखिल किया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार मेट्रो विस्तार की बात कर रही है, जबकि उनके अनुसार पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं के अतिरिक्त नई परियोजनाओं की गति अपेक्षित नहीं है। उन्होंने कैंसर दवाओं को सस्ता करने के दावे पर सवाल उठाते हुए राज्य के कैंसर रिसर्च संस्थानों की स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा।
नकली और मिलावटी दवाओं के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में दवा गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं और सरकार को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए सपा प्रमुख ने पुलिसिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए।
वहीं शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि बजट में किसानों, युवाओं और पूर्वांचल-बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं दिखते।
सरकार की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया कि बजट “संतुलित और विकास-उन्मुख” है और सभी क्षेत्रों में चरणबद्ध निवेश सुनिश्चित किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट आगामी चुनावी रणनीतियों की दिशा तय कर सकता है। विपक्ष द्वारा उठाए गए स्वास्थ्य, रोजगार और किसान मुद्दे ग्रामीण और शहरी मतदाताओं पर असर डाल सकते हैं।
वहीं सरकार का दावा है कि बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर निरंतर निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
बजट पर विस्तृत चर्चा के बाद विधानसभा में पारित होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जहां संशोधन प्रस्तावों और बहस का अगला चरण महत्वपूर्ण रहेगा।
Our Final Thoughts
उत्तर प्रदेश का बजट 2026 केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। एक ओर सरकार विकास, अवसंरचना और सामाजिक कल्याण की बात कर रही है, वहीं विपक्ष जमीनी अमल और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं, कानून-व्यवस्था और कृषि जैसे विषय राज्य की राजनीति के केंद्र में हैं। बजट आवंटन और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच संतुलन बनाना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
विपक्ष के आरोपों का जवाब आंकड़ों और प्रगति रिपोर्ट के जरिए देना सरकार के लिए जरूरी होगा, ताकि नीति और क्रियान्वयन के बीच भरोसा कायम रहे।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि बजट घोषणाएं किस हद तक धरातल पर उतरती हैं और जनता तक उसका लाभ पहुंचता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अंतिम निर्णय जनता के अनुभव और वास्तविक बदलाव पर निर्भर करेगा।
