तेल की कमाई को अमेरिका ने कतर में छिपाया, 'लूट' की नई स्क्रिप्ट या डॉलर बचाने का मास्टरस्ट्रोक?
वाशिंगटन/दोहा, दिनांक: 30 जनवरी 2026 — वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके बेडरूम से उठाकर अमेरिकी जेल में डालने की नाटकीय घटना को अभी एक महीना भी नहीं बीता है कि वाशिंगटन ने कराकस के खिलाफ अपनी आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। इस बार निशाना वेनेजुएला की संप्रभुता का प्रतीक उसका 'काला सोना' यानी तेल और उससे होने वाली अरबों की कमाई है। अमेरिकी प्रशासन ने एक बेहद चौंकाने वाला और रणनीतिक कदम उठाते हुए वेनेजुएला के कच्चे तेल की बिक्री से प्राप्त लगभग 500 मिलियन डॉलर (करीब 4200 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि को अमेरिका के बजाय एक मुस्लिम देश, कतर (Qatar) के बैंक खातों में शिफ्ट कर दिया है।
यह कदम केवल पैसे को सुरक्षित रखने का नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय शतरंज पर डोनाल्ड ट्रंप की एक ऐसी चाल है, जिसके कई मायने हैं। यह पैसा वेनेजुएला के लोगों की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका की शर्तों को मनवाने और वैश्विक बाजार में डॉलर की गिरती साख को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रंप ने खजाना लूटने के बाद उसे छिपाने के लिए खाड़ी देश का रास्ता चुना है, जो अमेरिकी विदेश नीति में आए बड़े बदलाव का संकेत है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हाल ही में वेनेजुएला के कच्चे तेल की बिक्री से जो 500 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए थे, उन्हें न्यूयॉर्क या लंदन के बैंकों में रखने के बजाय दोहा (कतर) भेजा गया है। वेनेजुएला पर अंतरराष्ट्रीय बॉन्डधारकों, विदेशी तेल कंपनियों और अन्य कर्जदारों का लगभग 170 बिलियन डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज बकाया है। अगर यह पैसा अमेरिकी वित्तीय प्रणाली के भीतर किसी बैंक में जमा होता, तो ये कर्जदाता अमेरिकी अदालतों का दरवाजा खटखटाकर तुरंत इस पर अपना दावा ठोक देते और पूरी रकम जब्त कर लेते। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के हाथ कुछ नहीं लगता। कतर को एक 'न्यूट्रल' और सुरक्षित तिजोरी (Safe Haven) माना गया है। वहां अमेरिकी अदालतों के आदेश सीधे तौर पर लागू नहीं होते, जिससे यह फंड कर्जदारों की पहुंच से दूर रहता है। लेकिन असली चाबी अमेरिका के पास ही है। कतर के बैंकों में जमा इस पैसे को वेनेजुएला की कोई भी (अंतरिम) सरकार अमेरिका की लिखित इजाजत के बिना छू भी नहीं पाएगी। पैसा तभी जारी होगा जब वेनेजुएला अमेरिकी शर्तों को मानेगा। यानी सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी—पैसा वेनेजुएला का, लेकिन उस पर अधिकार अमेरिका का।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है। ट्रंप की यह रणनीति नई नहीं है, बल्कि यह इराक मॉडल का ही एक परिष्कृत रूप है। 2003 में सद्दाम हुसैन को हटाने के बाद अमेरिका ने इराक के साथ भी यही किया था। आज भी इराक का तेल बिकता है, लेकिन उसका सारा पैसा न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) में जमा होता है। इराक को अपनी ही कमाई का एक डॉलर भी खर्च करने के लिए वाशिंगटन से अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे उसकी आर्थिक संप्रभुता अमेरिका के रहमो-करम पर है। अब वेनेजुएला को भी उसी कतार में खड़ा कर दिया गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार फेडरल रिजर्व की जगह कतर के बैंकों ने ले ली है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की पेचीदगियों से बचा जा सके।
इस पूरे खेल के पीछे सबसे बड़ा और दूरगामी कारण 'डॉलर की बादशाहत' को बचाना है। 2024 में सऊदी अरब के साथ दशकों पुराने 'पेट्रो-डॉलर' (तेल के बदले डॉलर) समझौते के खत्म होने के बाद अमेरिकी मुद्रा की स्थिति कमजोर हुई है। चीन, रूस और ब्रिक्स (BRICS) देश अपनी अलग करेंसी या स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करके डॉलर को चुनौती दे रहे हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अगर वेनेजुएला ब्रिक्स के पाले में चला जाता और युआन या रूबल में तेल बेचना शुरू कर देता, तो यह डॉलर के लिए बड़ा झटका होता। कतर के जरिए लेनदेन को नियंत्रित करके अमेरिका यह सुनिश्चित कर रहा है कि वेनेजुएला का तेल केवल डॉलर इकोसिस्टम के भीतर ही बिके और उसकी कमाई डॉलर में ही जमा हो। यह वेनेजुएला को 'डॉलर जोन' में जबरदस्ती बांधे रखने का तरीका है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम 'आर्थिक कूटनीति' की आड़ में आधुनिक उपनिवेशवाद (Neo-colonialism) का एक रूप नजर आता है। किसी संप्रभु राष्ट्र के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करना और फिर उसके संसाधनों की कमाई को तीसरे देश में बंधक बना लेना, यह बताता है कि अंतरराष्ट्रीय नियम केवल कमजोर देशों के लिए होते हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि कतर को बीच में लाना ट्रंप की 'मास्टरस्ट्रोक' रणनीति है। इससे वे एक तीर से दो शिकार कर रहे हैं—एक तरफ वेनेजुएला की नई सरकार को आर्थिक रूप से अपने नियंत्रण में रखना, और दूसरी तरफ वैश्विक तेल व्यापार में डॉलर की प्रासंगिकता बनाए रखना। हालांकि, यह कदम ब्रिक्स देशों को और अधिक एकजुट करेगा क्योंकि वे देखेंगे कि अमेरिकी वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल हथियार (Weaponization of Finance) की तरह किया जा सकता है। वेनेजुएला की जनता के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनका तेल, जो उनका वरदान होना चाहिए था, वही उनकी गुलामी का कारण बन गया है।
