आखिरी मैच में ली हैट्रिक, झटके 5 विकेट, फिर भी टीम से हमेशा के लिए बाहर हो गया यह 'बदनसीब' गेंदबाज
सिडनी/नई दिल्ली, दिनांक: 29 जनवरी 2026 — क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल यूं ही नहीं कहा जाता। यहाँ किस्मत कब पलटी मार जाए, कोई नहीं जानता। इस खेल ने कई खिलाड़ियों को रातों-रात अर्श पर पहुंचाया है, तो कइयों को फर्श पर पटक दिया है। लेकिन क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा भी नाम दर्ज है जिसकी कहानी सुनकर हैरानी भी होती है और अफसोस भी। हम बात कर रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व मध्यम गति के तेज गेंदबाज एंथनी स्टुअर्ट (Anthony Stuart) की।
एक ऐसा खिलाड़ी जिसने अपने आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच में वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े दिग्गजों का सपना होता है— हैट्रिक (Hat-trick) लेना और 5 विकेट चटकाना। लेकिन विडंबना देखिए, इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद उन्हें इनाम के तौर पर टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और वे फिर कभी ऑस्ट्रेलिया की जर्सी नहीं पहन सके। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर महज 12 दिनों में शुरू होकर खत्म भी हो गया।
12 दिन का सफर: 5 जनवरी से 16 जनवरी 1997
न्यू साउथ वेल्स के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले लंबे कद के एंथनी स्टुअर्ट के लिए साल 1997 की शुरुआत किसी सपने जैसी थी।
- डेब्यू: 27वें जन्मदिन के ठीक तीन दिन बाद, 5 जनवरी 1997 को उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिस्बेन में अपना वनडे इंटरनेशनल (ODI) डेब्यू करने का मौका मिला।
- पहला धमाका: अपने पहले ही मैच में उन्होंने शानदार गेंदबाजी की और 10 ओवर में 48 रन देकर 2 विकेट चटकाए। उनके शिकार कोई और नहीं, बल्कि महान बल्लेबाज ब्रायन लारा थे, जिसे आउट करना किसी भी नए गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि थी।
इसके बाद 7 जनवरी को पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे मैच में भी उन्होंने नपी-तुली गेंदबाजी की और 1 विकेट लिया।
16 जनवरी का वो ऐतिहासिक दिन: हैट्रिक और अंत
एंथनी के करियर का सबसे सुनहरा और आखिरी अध्याय 16 जनवरी 1997 को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर पाकिस्तान के खिलाफ लिखा गया। यह ट्राई-सीरीज का एक अहम मुकाबला था।
हैट्रिक का रोमांच: पारी के 12वें ओवर में एंथनी ने कोहराम मचा दिया।
- तीसरी गेंद: खतरनाक बल्लेबाज एजाज अहमद को विकेटकीपर इयान हीली के हाथों कैच कराया।
- चौथी गेंद: अगली ही गेंद पर मोहम्मद वसीम को भी हीली के हाथों कैच आउट किया।
- पांचवीं गेंद (हैट्रिक बॉल): नए बल्लेबाज मोइन खान आए और एंथनी ने उन्हें स्लिप में कप्तान मार्क टेलर के हाथों लपकवाकर अपनी हैट्रिक पूरी कर ली।
एंथनी स्टुअर्ट वनडे इतिहास में हैट्रिक लेने वाले दूसरे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज बने (ब्रूस रीड के बाद)। इस मैच में उन्होंने कुल 5 विकेट लिए और 3 कैच भी लपके। उनके इस हरफनमौला प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
फिर कभी नहीं मिला मौका
किसे पता था कि 'मैन ऑफ द मैच' की ट्रॉफी के साथ ही उनका विदाई पत्र भी लिखा जा चुका है। इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद, उन्हें अगले मैच से ड्रॉप कर दिया गया और फिर कभी टीम में वापसी नहीं हुई।
- कारण: कहा जाता है कि उस समय ऑस्ट्रेलिया के पास ग्लेन मैक्ग्रा, डेमियन फ्लेमिंग और जेसन गिलेस्पी जैसे गेंदबाजों की भरमार थी। चोट और टीम संयोजन के कारण स्टुअर्ट को बलि का बकरा बनना पड़ा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
एंथनी स्टुअर्ट की कहानी खेल जगत की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक है। 3 मैचों में 13.62 की औसत और 3.63 की इकॉनमी के साथ 8 विकेट लेने वाला गेंदबाज अगर टीम से बाहर हो जाए, तो इसे किस्मत का खेल ही कहा जाएगा।
The Trending People का विश्लेषण है कि स्टुअर्ट एक 'वन वंडर' बनकर नहीं रह गए, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में न्यू साउथ वेल्स के लिए शानदार सेवा दी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं हुआ। आज भी जब क्रिकेट की अजीबोगरीब घटनाओं का जिक्र होता है, तो एंथनी स्टुअर्ट का नाम सबसे ऊपर आता है—वह हीरो जिसने अपनी आखिरी गेंद पर भी विकेट लिया था।
