पीसीबी से 'धोखा' खाने के बाद फिर पाकिस्तान लौटे जेसन गिलेस्पी—हैदराबाद के 'किंग्समेन' ने सौंपी कमान, 1.75 लाख करोड़ की टीम के बने हेड कोच
कराची/सिडनी, दिनांक: 29 जनवरी 2026 — क्रिकेट की दुनिया में रिश्ते जितनी तेजी से बिगड़ते हैं, उतनी ही तेजी से बनते भी हैं। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान क्रिकेट में देखने को मिला है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी (Jason Gillespie), जिन्होंने महज एक साल पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पर गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय टीम के हेड कोच का पद छोड़ दिया था, अब एक बार फिर पाकिस्तान की सरजमीं पर लौटने को तैयार हैं। इस बार उनकी वापसी राष्ट्रीय टीम के कोच के तौर पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) की नवगठित और सबसे महंगी फ्रेंचाइजी 'किंग्समेन हैदराबाद' (Kingsmen Hyderabad) के मुख्य कोच के रूप में हुई है।
गिलेस्पी की यह वापसी इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि 2024 में उनका पीसीबी के साथ अलगाव बेहद कड़वे नोट पर हुआ था। टीम सिलेक्शन और अधिकारों को लेकर बोर्ड के साथ हुए मतभेदों के चलते उन्होंने अपना दो साल का कॉन्ट्रैक्ट महज आठ महीने में ही खत्म कर दिया था। उस समय लगा था कि गिलेस्पी और पाकिस्तान क्रिकेट के रास्ते हमेशा के लिए अलग हो गए हैं। लेकिन पीएसएल के ग्लैमर और एक नई चुनौती ने इस कंगारू दिग्गज को फिर से पाकिस्तान खींच लिया है। फ्रेंचाइजी के मालिक फवाद सरवर ने पुष्टि की है कि गिलेस्पी अगले सीजन में टीम की रणनीतिक कमान संभालेंगे।
किंग्समेन हैदराबाद की एंट्री पीएसएल में किसी धमाके से कम नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फवाद सरवर ने इस नई फ्रेंचाइजी को 1,75,000 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीदा है। यह आंकड़ा पीएसएल के इतिहास में अभूतपूर्व है और लीग की बढ़ती ब्रांड वैल्यू को दर्शाता है। इतनी बड़ी निवेश राशि के साथ टीम प्रबंधन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था, इसलिए उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति को सौंपी है जो पाकिस्तान की परिस्थितियों और खिलाड़ियों की मानसिकता से भली-भांति परिचित है। सरवर ने कहा कि हम अपनी टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ कोचिंग स्टाफ लेकर आए हैं जो 11 फरवरी को होने वाली नीलामी में दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए अभी से रणनीति बना रहे हैं।
कोचिंग स्टाफ में गिलेस्पी अकेले नहीं हैं, बल्कि उनके साथ पाकिस्तान क्रिकेट के पुराने परिचित भी जुड़ रहे हैं। ग्रांट ब्रैडबर्न (Grant Bradburn) और क्रेग व्हाइट को सहायक कोच की भूमिका दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि ब्रैडबर्न भी पाकिस्तान राष्ट्रीय टीम के साथ सहायक कोच और फिर मुख्य कोच के रूप में जुड़े रहे थे। उन्हें भी पीसीबी के साथ हुए एक समझौते के बाद वनडे विश्व कप 2023 के बाद अपने पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यानी किंग्समेन हैदराबाद का डगआउट उन दिग्गजों से भरा होगा जिन्हें पीसीबी सिस्टम ने बाहर का रास्ता दिखाया था, लेकिन अब वे लीग क्रिकेट के जरिए अपनी काबिलियत साबित करने को बेताब हैं।
जेसन गिलेस्पी का क्रिकेट करियर और कोचिंग अनुभव उन्हें इस पद के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाता है। ऑस्ट्रेलिया के लिए 1996 में डेब्यू करने वाले इस दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने अपने करियर में कई कीर्तिमान रचे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 71 टेस्ट मैचों में 259 विकेट चटकाए, जो उनकी गेंदबाजी की धार को बयां करता है। इसके अलावा, 97 वनडे मैचों में उन्होंने 142 शिकार किए। भले ही उन्हें अपने करियर में सिर्फ एक टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला (जिसमें उन्होंने एक विकेट लिया), लेकिन दुनिया भर की टी20 लीग्स में बतौर कोच उनका अनुभव शानदार रहा है। इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में यॉर्कशायर और ससेक्स के साथ उनकी सफलता ने उन्हें एक बेहतरीन रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया है।
गिलेस्पी की वापसी से पीएसएल में रोमांच का तड़का लगना तय है। एक तरफ जहां पीसीबी के साथ उनके पुराने गिले-शिकवे चर्चा का विषय रहेंगे, वहीं दूसरी तरफ मैदान पर उनकी टीम का प्रदर्शन यह तय करेगा कि क्या बोर्ड ने उन्हें जाने देकर गलती की थी। 11 फरवरी को होने वाली नीलामी में किंग्समेन हैदराबाद की रणनीति पर सबकी निगाहें होंगी। क्या गिलेस्पी उन खिलाड़ियों पर दांव लगाएंगे जिन्हें पीसीबी ने नजरअंदाज किया? यह देखना दिलचस्प होगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
जेसन गिलेस्पी का पाकिस्तान लौटना 'प्रोफेशनलिज्म' का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने पीसीबी के साथ अपने कड़वे अतीत को अपने वर्तमान असाइनमेंट के आड़े नहीं आने दिया। किंग्समेन हैदराबाद के लिए यह एक मास्टरस्ट्रोक है। गिलेस्पी जैसा कोच, जो अनुशासन और स्पष्टवादिता के लिए जाना जाता है, नई टीम की नींव मजबूत कर सकता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह पीसीबी के लिए एक असहज स्थिति हो सकती है। जिन कोचों (गिलेस्पी और ब्रैडबर्न) को बोर्ड ने बाहर किया, अगर वे पीएसएल में अपनी टीम को चैंपियन बना देते हैं, तो यह बोर्ड की निर्णय क्षमता पर सवालिया निशान खड़ा करेगा। वहीं, इतनी बड़ी बोली लगाकर टीम खरीदने वाले मालिकों के लिए भी दबाव होगा कि वे प्रदर्शन के जरिए अपने निवेश को सही साबित करें। पीएसएल का आगामी सीजन 'बदले' और 'साबित करने' की जंग का गवाह बनेगा।
