शिनजियांग के 'नर्क' का वीडियो बनाने वाले गुआन हेंग को कोर्ट ने माना भरोसेमंद गवाह, ट्रंप के निर्वासन अभियान के बीच बड़ी राहत
वाशिंगटन/बीजिंग, दिनांक: 29 जनवरी 2026— चीन की कम्युनिस्ट सरकार की दमनकारी नीतियों और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को दुनिया के सामने लाने वाले एक चीनी व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) को आखिरकार अमेरिकी न्याय प्रणाली ने सुरक्षा का कवच प्रदान कर दिया है। बुधवार को एक अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चीनी नागरिक गुआन हेंग (Guan Heng) को अमेरिका में शरण (Asylum) देने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान (Deportation Drive) चलाया जा रहा है, जिससे इस जीत के मायने और बढ़ जाते हैं।
38 वर्षीय गुआन हेंग, जिन्होंने 2021 में अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश किया था, तब से अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने अदालत में दलील दी थी कि अगर उन्हें वापस चीन भेजा गया, तो उन्हें वहां यातनाएं दी जाएंगी और शायद मार दिया जाएगा। उनका 'जुर्म' सिर्फ इतना था कि उन्होंने चीन के शिनजियांग प्रांत में चल रहे उन डिटेंशन सेंटर्स (Detention Centers) का सच उजागर किया था, जिसे चीन 'री-एजुकेशन कैंप' बताकर दुनिया को गुमराह करता रहा है।
शिनजियांग के 'अंधेरे कमरों' का गवाह
गुआन हेंग की कहानी साहस और जोखिम की मिसाल है। 2020 में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर शिनजियांग के अति-सुरक्षित डिटेंशन सेंटर्स की चुपचाप वीडियो रिकॉर्डिंग की थी।
- क्या था वीडियो में: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, गुआन के ये वीडियो इस बात के पुख्ता सबूत थे कि चीन वहां बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।
- उइगरों का दर्द: आरोप है कि इन सेंटर्स में जातीय अल्पसंख्यकों, खासकर उइगर समुदाय (Uyghurs) के करीब 10 लाख लोगों को जानवरों की तरह कैद रखा गया है। गुआन ने अदालत को बताया, "मुझे उन उइगरों के लिए सहानुभूति थी जिन पर अत्याचार हो रहा था, इसलिए मैंने यह कदम उठाया।"
निर्वासन का डर और युगांडा भेजने की कोशिश
गुआन हेंग को अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन के निर्वासन अभियान के दौरान हिरासत में लिया गया था। उनकी स्थिति तब और नाजुक हो गई थी जब अमेरिकी गृह मंत्रालय (DHS) ने उन्हें चीन भेजने के बजाय युगांडा निर्वासित करने की योजना बनाई थी। लेकिन दिसंबर में जब मीडिया और मानवाधिकार संगठनों ने इस मुद्दे को उठाया, तो प्रशासन को यह योजना रद्द करनी पड़ी। तब से गुआन हिरासत में रहकर अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
कोर्ट में क्या हुआ? 'भरोसेमंद गवाह' पर मुहर
न्यूयॉर्क के नैपानोच में हुई सुनवाई के दौरान गुआन हेंग ने ऑनलाइन पेशी दी। जज चार्ल्स औसलैंडर (Charles Auslander) ने उनसे पूछा कि क्या वीडियो बनाने का मकसद अमेरिका में शरण पाना था?
- गुआन का जवाब: उन्होंने ईमानदारी से कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था। उनका एकमात्र उद्देश्य सच्चाई को बाहर लाना था।
- वकील की दलील: गुआन के वकील चेन चुआंगचुआंग ने तर्क दिया कि अमेरिका की 'नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी' है कि वह ऐसे व्यक्ति को शरण दे जिसने मानवाधिकारों के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।
- फैसला: सभी दलीलें सुनने के बाद जज ने गुआन को एक 'भरोसेमंद गवाह' (Credible Witness) माना और कहा कि उन्होंने शरण के लिए अपनी कानूनी पात्रता साबित कर दी है।
चीन से भागने की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां
गुआन हेंग का चीन से निकलकर अमेरिका पहुंचना किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि फुटेज सार्वजनिक करने के लिए उन्हें चीन छोड़ना ही था।
- रास्ता: वे पहले हांगकांग गए, वहां से इक्वाडोर (जहां चीनी नागरिकों को वीजा नहीं चाहिए) पहुंचे और फिर बहामास गए।
- समंदर का सफर: अक्टूबर 2021 में उन्होंने एक छोटी नाव के जरिए फ्लोरिडा के लिए खतरनाक यात्रा की। गुआन ने कहा, "मुझे नहीं पता था कि मैं समंदर में बच पाऊंगा या नहीं, लेकिन मैं चाहता था कि दुनिया वो वीडियो जरूर देखे।"
- पिता से पूछताछ: वीडियो जारी होने के बाद चीनी पुलिस ने उनके पिता को तीन बार पूछताछ के लिए उठाया, जो उनके डर को सही साबित करता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
गुआन हेंग को शरण मिलना केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि सत्य की जीत है। यह फैसला अमेरिका की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो मानवाधिकार रक्षकों को सुरक्षा देने की बात करती है, भले ही राजनीतिक माहौल (प्रवासी विरोधी नीतियां) कितना भी विपरीत क्यों न हो।
The Trending People का विश्लेषण है कि चीन लगातार शिनजियांग में अत्याचार के आरोपों को खारिज करता रहा है और इसे 'व्यावसायिक प्रशिक्षण' बताता रहा है। लेकिन गुआन जैसे प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही ड्रैगन के झूठ का पर्दाफाश करती है। यह फैसला उन हजारों उइगरों के लिए भी उम्मीद की किरण है जिनकी आवाज दुनिया तक नहीं पहुंच पा रही है। अमेरिका ने गुआन को पनाह देकर चीन को एक कड़ा संदेश दिया है कि मानवाधिकारों का हनन छिप नहीं सकता।
