पर्दे पर 'नारी शक्ति' का नया अध्याय—अमेजन प्राइम की वो 5 सीरीज, जहां 'हीरो' नहीं, 'हीरोइन' ने लिखी है अपनी तकदीर; 2 में है देसी तड़का
नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 29 जनवरी 2026 — सिनेमा और कहानियों की दुनिया में एक लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि एक सफल कहानी के लिए एक पुरुष नायक (Hero) का होना अनिवार्य है। महिलाएं अक्सर सहायक भूमिकाओं या केवल ग्लैमर के लिए सीमित कर दी जाती थीं। लेकिन डिजिटल क्रांति और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के उदय ने इस पुरानी सोच को जड़ से उखाड़ फेंका है। आज के दौर में कहानियां केवल लिखी नहीं जा रही हैं, बल्कि जिये जा रहे उन किरदारों के माध्यम से समाज को आईना दिखाया जा रहा है, जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर ऐसी कई बेहतरीन वेब सीरीज मौजूद हैं, जो महिला सशक्तिकरण, उनके संघर्ष और उनकी जीत की अनकही दास्तां बयां करती हैं। आज हम आपको ऐसी ही 5 सीरीज के बारे में बताएंगे, जिनके धांसू फीमेल कैरेक्टर आपका नजरिया बदल देंगे। इनमें से दो में आपको बॉलीवुड का तड़का भी देखने को मिलेगा, जो भारतीय दर्शकों के लिए सोने पर सुहागा है।
सबसे पहले बात करते हैं भारत के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की कड़वी सच्चाई को उजागर करती सीरीज 'लाखों में एक' (सीजन 2) की। जहां सीजन 1 में एक छात्र के संघर्ष को दिखाया गया था, वहीं सीजन 2 पूरी तरह से डॉ. श्रेया (श्वेता त्रिपाठी शर्मा) के इर्द-गिर्द घूमता है। डॉ. श्रेया की पोस्टिंग महाराष्ट्र के एक पिछड़े गांव सिटलापुर में एक मोतियाबिंद कैंप लगाने के लिए होती है। वहां पहुंचकर उन्हें एहसास होता है कि उनकी लड़ाई केवल बीमारियों से नहीं, बल्कि एक जर्जर और भ्रष्ट मेडिकल सिस्टम से है। गांव की राजनीति, संसाधनों का अभाव और पितृसत्तात्मक सोच के बीच फंसी डॉ. श्रेया घुटने टेकने के बजाय सिस्टम से लड़ने का फैसला करती हैं। यह सीरीज दिखाती है कि एक अकेली महिला अगर ठान ले, तो वह बदलाव की आंधी ला सकती है। डॉ. श्रेया का किरदार उन लाखों कामकाजी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो रोज अपने कार्यक्षेत्र में विषम परिस्थितियों का सामना करती हैं।
अगर आप कुछ हल्का-फुल्का लेकिन प्रेरणादायक देखना चाहते हैं, तो 'द मार्वलस मिसेज मैसेल' (The Marvelous Mrs. Maisel) एक बेहतरीन विकल्प है। 1950 के दशक के न्यूयॉर्क की पृष्ठभूमि में सेट यह कहानी मि Miriam "Midge" Maisel की है। वह एक आदर्श पत्नी और मां होती हैं, जिनका जीवन तब बिखर जाता है जब उनका पति उन्हें छोड़ देता है। लेकिन मिसेज मैसेल टूटती नहीं हैं, बल्कि वे अपने दर्द को अपनी ताकत बनाती हैं और स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में कदम रखती हैं। उस दौर में जब महिलाओं का काम सिर्फ घर संभालना माना जाता था, एक महिला का स्टेज पर खड़े होकर दुनिया को हंसाना और अपनी शर्तों पर जीना एक बड़ी क्रांति थी। यह सीरीज सिखाती है कि सशक्तिकरण हमेशा गंभीर नहीं होता, कभी-कभी यह ठहाकों के बीच भी मिलता है।
भारतीय महिलाओं की आधुनिकता, उनकी महत्वाकांक्षाओं और उनकी गलतियों को बेबाकी से पेश करती है सीरीज 'फोर मोर शॉट्स प्लीज!' (Four More Shots Please!)। मुंबई की चकाचौंध में रहने वाली चार सहेलियां—दामिनी, अंजना, उमंग और सिद्धि—समाज द्वारा तय किए गए नियमों को तोड़ती हैं और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती हैं। चाहे वह बॉडी शेमिंग हो, वर्क-लाइफ बैलेंस हो या जटिल रिश्ते, यह शो हर मुद्दे पर खुलकर बात करता है। यह सीरीज बताती है कि महिलाएं परफेक्ट नहीं होतीं, वे भी गलतियां करती हैं, गिरती हैं और फिर संभलती हैं। इनकी दोस्ती और आजादी का जश्न मनाता यह शो हर उस आधुनिक भारतीय महिला की कहानी है जो अपनी पहचान खुद बनाना चाहती है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज वीरगाथाओं को एक नया आयाम देती है फिल्म/सीरीज 'ए कॉल टू स्पाई' (A Call to Spy)। यह दूसरे विश्व युद्ध की उन गुमनाम महिला जासूसों की असली कहानी है, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर युद्ध का रुख मोड़ दिया था। इसमें राधिका आप्टे ने भारतीय मूल की ब्रिटिश जासूस नूर इनायत खान का किरदार निभाया है। नाजियों के खिलाफ खुफिया जानकारी जुटाने वाली इन वीरांगनाओं का साहस देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह सीरीज साबित करती है कि युद्ध के मैदान में भी महिलाओं का योगदान किसी से कम नहीं रहा है। राधिका आप्टे का अभिनय इसमें जान डाल देता है।
अंत में, हंसी और संघर्ष का एक और बेहतरीन उदाहरण है '2 ब्रोक गर्ल्स' (2 Broke Girls)। जब किस्मत साथ न दे, तो मेहनत और जिजीविषा ही काम आती है। मैक्स और कैरोलिन, दो अलग-अलग दुनिया से आई वेट्रेस, अपना कपकेक बिजनेस शुरू करने का सपना देखती हैं। मैक्स एक गरीब परिवार से है, जबकि कैरोलिन एक अमीर बाप की बेटी है जो सब कुछ खो चुकी है। इन दोनों की जुगलबंदी और न्यूयॉर्क में सर्वाइव करने की जद्दोजहद यह साबित करती है कि अगर दो महिलाएं एक-दूसरे का साथ दें, तो वे शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सकती हैं।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
ये वेब सीरीज केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह समाज में आ रहे बदलाव का दस्तावेज हैं। चाहे वह डॉ. श्रेया का गांव में संघर्ष हो या मिसेज मैसेल का कॉमेडी स्टेज पर कब्जा, हर कहानी यह बताती है कि महिलाएं अब 'अबला' नहीं रहीं।
The Trending People का विश्लेषण है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने लेखकों को वह आजादी दी है कि वे महिलाओं को 'देवी' या 'डायन' के खांचे से बाहर निकालकर एक 'इंसान' के रूप में पेश कर सकें। इन किरदारों की सबसे बड़ी खूबसूरती उनकी खामियों (Flaws) में है। वे डरती हैं, रोती हैं, गलतियां करती हैं, लेकिन अंत में अपनी लड़ाई खुद लड़ती हैं। अगर आपने अब तक ये सीरीज नहीं देखी हैं, तो इस वीकेंड अपनी वॉचलिस्ट जरूर अपडेट करें, क्योंकि ये कहानियां आपको जिंदगी को एक नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर देंगी।
