Indore Contaminated Water Deaths: राहुल गांधी का भाजपा पर बड़ा हमला, बोले– ‘डबल इंजन ने जीवन के अधिकार की हत्या की’
नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत को लेकर भाजपा और मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का केंद्र बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों की मौत पर हमेशा की तरह खामोश हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि इंदौर में लोगों को पानी नहीं बल्कि ज़हर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा। उन्होंने कहा कि जिन घरों में चूल्हे बुझ गए, उन्हें सांत्वना की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने अहंकार परोसा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग बार-बार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, तो समय रहते आपूर्ति बंद क्यों नहीं की गई। सीवर का पानी पीने की आपूर्ति में कैसे मिला और जिम्मेदार अफसरों व नेताओं पर कार्रवाई कब होगी—यह जवाबदेही तय करने का मामला है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि साफ पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की “हत्या” के लिए भाजपा का डबल इंजन, लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व जिम्मेदार है।
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। वहीं स्थानीय नागरिकों का दावा है कि छह महीने के बच्चे समेत 14 लोगों की जान गई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
हमारी राय
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि बुनियादी नागरिक अधिकारों पर सीधा सवाल हैं। साफ और सुरक्षित पेयजल किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां निगरानी और संसाधनों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। यदि नागरिक बार-बार शिकायत कर रहे थे और इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इतर, इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होना जरूरी है—चाहे वह प्रशासनिक अधिकारी हों या नीति निर्धारक। मौतों के आंकड़ों को लेकर विरोधाभास भी चिंता का विषय है, क्योंकि इससे पीड़ित परिवारों के दर्द पर अनिश्चितता की परत चढ़ जाती है। हमारी राय में, सरकार को पहले तथ्य सामने लाने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जल आपूर्ति प्रणाली की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। नागरिकों का जीवन राजनीति से ऊपर होना चाहिए।
