Trump on NATO: ‘अमेरिका बेवकूफी से बोझ उठा रहा था’, ट्रंप का बड़ा दावा – 5% GDP तक बढ़वाया रक्षा खर्च
NATO और वैश्विक सुरक्षा को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप (DJT) ने एक बार फिर बड़ा और विवादित बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि उनके सत्ता में आने से पहले NATO के अधिकांश देश अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा रहे थे और केवल 2 प्रतिशत GDP ही रक्षा पर खर्च कर रहे थे। उस दौर में अमेरिका “बेवकूफी से” बाकी देशों की सुरक्षा का बोझ उठा रहा था।
ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने NATO देशों पर सम्मानजनक तरीके से दबाव बनाया और उन्हें 5 प्रतिशत GDP तक रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए राजी किया। उन्होंने कहा कि यह काम पहले असंभव बताया जा रहा था, लेकिन यह इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि NATO के कई नेता उनके दोस्त थे और उन्होंने तुरंत भुगतान करना शुरू कर दिया।
यूक्रेन युद्ध और रूस को लेकर दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर वे बीच में नहीं आते, तो आज रूस पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने अपने दम पर आठ युद्ध खत्म कराए और लाखों लोगों की जान बचाई।
इसी संदर्भ में उन्होंने नॉर्वे पर भी तंज कसा। ट्रंप ने कहा कि NATO का सदस्य होने के बावजूद नॉर्वे ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, हालांकि उनके अनुसार इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
NATO की विश्वसनीयता पर सवाल
ट्रंप ने NATO की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका के बिना रूस और चीन को NATO से कोई डर नहीं है। उन्होंने संदेह जताया कि अगर भविष्य में अमेरिका को वास्तव में NATO की जरूरत पड़ी, तो क्या NATO अमेरिका के लिए खड़ा होगा।
हालांकि, इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हमेशा NATO के लिए मौजूद रहेगा, चाहे NATO अमेरिका के लिए हो या न हो।
अमेरिकी सेना और MAGA संदेश
अपने बयान में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण किया और उसे पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाया। उनके अनुसार, चीन और रूस केवल एक ही देश से डरते और उसका सम्मान करते हैं, और वह है डोनाल्ड जे. ट्रंप द्वारा फिर से बनाया गया अमेरिका।
अपने बयान के अंत में ट्रंप ने एक बार फिर अपना नारा दोहराया— “Make America Great Again!”
Our Thoughts
डोनाल्ड ट्रंप का NATO को लेकर बयान उनकी पुरानी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की ही निरंतरता दिखाता है। रक्षा खर्च को लेकर NATO देशों पर दबाव डालने का उनका दावा सही हो या नहीं, लेकिन यह साफ है कि ट्रंप गठबंधनों को भी लेन-देन के नजरिए से देखते हैं। यूक्रेन युद्ध और रूस को लेकर उनके दावे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बने हुए हैं।
हमारी राय में, NATO जैसे सैन्य गठबंधन की मजबूती सिर्फ खर्च से नहीं, बल्कि आपसी भरोसे और साझा रणनीति से तय होती है। अमेरिका की भूमिका अहम है, लेकिन सहयोगियों की प्रतिबद्धता भी उतनी ही जरूरी है। ट्रंप के बयान उनके समर्थकों को जरूर मजबूत संदेश देते हैं, लेकिन वैश्विक कूटनीति में ऐसे दावों का असर जटिल और दूरगामी हो सकता है।
