तमिलनाडु की सियासत में 'थलापति' का मास्टरस्ट्रोक—क्या कांग्रेस को 'कंधा' देंगे विजय? पिता ने कहा "कांग्रेस ढलान पर है, मेरा बेटा उसे पुरानी शान लौटा सकता है
चेन्नई/नई दिल्ली, दिनांक: 29 जनवरी 2026 — दक्षिण भारत की राजनीति, विशेषकर तमिलनाडु का सियासी रणक्षेत्र एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। दशकों से द्रविड़ पार्टियों के वर्चस्व वाले इस राज्य में एक नया और विस्फोटक समीकरण बनता दिख रहा है। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और अब राजनेता बन चुके 'थलापति' विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस (Congress) के बीच खिचड़ी पकने के संकेत मिले हैं। यह संकेत किसी और ने नहीं, बल्कि विजय के पिता और मशहूर फिल्म निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर (SA Chandrasekhar) ने दिए हैं, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एस.ए. चंद्रशेखर ने एक बेहद नपा-तुला लेकिन दूरगामी प्रभाव वाला बयान दिया है। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए साफ कहा कि कांग्रेस का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, उसने आजादी की लड़ाई लड़ी थी, लेकिन आज वह ढलान पर है। चंद्रशेखर का कहना है कि कांग्रेस दूसरों (खासकर डीएमके) को समर्थन देकर अपनी खुद की ताकत खो रही है और एक बैसाखी के सहारे चल रही है। ऐसे नाजुक वक्त में विजय कांग्रेस को सपोर्ट देने और उसे उसकी 'खोई हुई ग्लोरी' (Lost Glory) वापस लौटाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि अब फैसला कांग्रेस के पाले में है कि वह विजय का हाथ थामना चाहती है या नहीं।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक विजय और उनकी पार्टी टीवीके की रणनीति 'एकला चलो' (Go it alone) की रही है। विजय ने अपनी रैलियों में बार-बार यह संकेत दिया था कि वे किसी भी स्थापित गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे और तमिलनाडु की जनता को एक नया विकल्प देंगे। उन्होंने द्रविड़ पार्टियों (डीएमके और एआईएडीएमके) के 60 साल के शासन पर कड़े सवाल उठाए हैं और सिस्टम को बदलने की वकालत की है। लेकिन पिता के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति में कोई भी दरवाजा हमेशा के लिए बंद नहीं होता। अगर कांग्रेस और टीवीके साथ आते हैं, तो यह तमिलनाडु में डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
चंद्रशेखर ने विजय की निडरता और इरादों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विजय का इरादा नेक है और वह असली आजादी चाहते हैं। जो भी समाज की भलाई के लिए आगे आएगा, उसे चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ेगा। विजय किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी माना कि जनता और शुभचिंतकों का एक बड़ा वर्ग विजय को अकेले चुनाव लड़ने की सलाह दे रहा है। लोगों का कहना है कि अगर विजय इंडिपेंडेंट होकर मैदान में उतरते हैं, तो उनकी जीत पक्की है क्योंकि जनता बदलाव चाहती है। लेकिन पिता का यह बयान कि "विजय कांग्रेस को फिर से खड़ा कर सकते हैं", एक रणनीतिक साझेदारी की ओर इशारा करता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि विजय राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का साथ चाहते हैं ताकि राज्य में अल्पसंख्यक और दलित वोट बैंक को साधा जा सके।
इस संभावित गठबंधन की चर्चा ने डीएमके और भाजपा दोनों के खेमों में हलचल तेज कर दी है। पिछले साल टीवीके ने अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि वे डीएमके या भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। पार्टी के सीनियर लीडर अरुण राज ने स्पष्ट किया था कि जो विजय को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार (CM Candidate) मानेगा, उसी से बात होगी। उन्होंने डीएमके को अपना 'पॉलिटिकल दुश्मन' और भाजपा को 'आइडियोलॉजिकल दुश्मन' करार दिया था। हाल ही में महाबलिपुरम में हुई एक रैली में विजय ने डीएमके को 'बुरी ताकत' बताते हुए आरोप लगाया था कि वह अपने संस्थापक सी.एन. अन्नादुराई और उनके सिद्धांतों को भूल चुकी है और केवल परिवारवाद को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में कांग्रेस, जो फिलहाल डीएमके की सहयोगी है, के लिए यह एक धर्मसंकट की स्थिति हो सकती है। अगर कांग्रेस विजय के साथ जाती है, तो उसे डीएमके का साथ छोड़ना होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि एस.ए. चंद्रशेखर का बयान एक 'टेस्ट बैलून' हो सकता है। वे देखना चाहते हैं कि कांग्रेस और जनता इस पर कैसी प्रतिक्रिया देती है। तमिलनाडु में कांग्रेस का अपना कोई बड़ा जनाधार नहीं बचा है और वह डीएमके की पिछलग्गू बनकर रह गई है। विजय के रूप में उसे एक करिश्माई चेहरा मिल सकता है, जो उसे राज्य में पुनर्जीवित कर दे। वहीं, विजय को कांग्रेस के रूप में एक राष्ट्रीय सहयोगी मिलेगा जो धर्मनिरपेक्ष वोटों के बंटवारे को रोक सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके को छोड़ने का जोखिम उठाएगी?
हमारी राय (The Trending People Analysis)
राजनीति संभावनाओं का खेल है और तमिलनाडु इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनने जा रहा है। एस.ए. चंद्रशेखर ने जो कहा है, वह केवल एक पिता की भावना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल लगती है। विजय जानते हैं कि 234 सीटों वाली विधानसभा में अकेले दम पर बहुमत लाना आसान नहीं है, खासकर तब जब सामने डीएमके जैसा मजबूत संगठन हो।
The Trending People का विश्लेषण है कि अगर कांग्रेस और टीवीके का गठबंधन होता है, तो यह 2026 के विधानसभा चुनावों का 'गेमचेंजर' साबित होगा। यह गठबंधन डीएमके के एंटी-इंकंबेंसी वोटों और एआईएडीएमके के बिखरे हुए वोटों को अपनी ओर खींच सकता है। कांग्रेस के लिए यह एक सुनहरा मौका है कि वह 'जूनियर पार्टनर' की भूमिका से बाहर निकलकर किंगमेकर या सत्ता में हिस्सेदार बने। हालांकि, विजय को यह सुनिश्चित करना होगा कि कांग्रेस के साथ जाने से उनकी 'सिस्टम विरोधी' और 'नई राजनीति' वाली छवि पर असर न पड़े। यह जुआ अगर सफल रहा, तो तमिलनाडु में 60 साल बाद द्रविड़ राजनीति का विकल्प तैयार हो सकता है।
