क्या भारत को मिल गया 'दूसरा सहवाग'? अभिषेक शर्मा का 'डक या शतक' वाला फार्मूला—आलोचक बोले 'लापरवाह', तो दिग्गज बोले 'यही है मॉडर्न क्रिकेट का असली बारूद
नई दिल्ली/विशाखापत्तनम, दिनांक: 28 जनवरी 2026 — क्रिकेट के मैदान पर एक दौर ऐसा था जब ऑस्ट्रेलियाई ओपनर्स एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन पहली गेंद से ही गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाना शुरू कर देते थे। उनका खौफ ऐसा था कि गेंदबाज पहली गेंद फेंकने से पहले ही रक्षात्मक मुद्रा में आ जाते थे। बाद में भारत के लिए 'नजफगढ़ के नवाब' वीरेंद्र सहवाग ने इसी शैली को अपनाया और टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी। लेकिन आज के दौर में, भारतीय टीम का एक युवा सितारा उन दिग्गजों से भी एक कदम आगे निकलता दिखाई दे रहा है। हम बात कर रहे हैं युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) की, जो इन दिनों अपनी बेखौफ और विस्फोटक बल्लेबाजी के कारण चर्चा के केंद्र में हैं।
जब अभिषेक शर्मा क्रीज पर उतरते हैं, तो ऐसा लगता है मानो वे सिर पर कफन बांधकर आए हों। उनका फंडा बिल्कुल शीशे की तरह साफ है—या तो 'बत्तख' (शून्य) या फिर 'शतक'। बीच का कोई रास्ता उनके लिए नहीं है। यानी जिस दिन गेंद उनके बल्ले पर चढ़ी, उस दिन एक विशाल स्कोर तय है, वरना वे पहली ही गेंद पर पवेलियन लौटने से भी नहीं हिचकिचाते। उनकी इस शैली ने क्रिकेट जगत को दो धड़ों में बांट दिया है। कुछ लोग इसे 'बेपरवाह' से ज्यादा 'लापरवाह' बता रहे हैं, तो कुछ उनकी इस निडरता के कायल हो गए हैं और उनमें भविष्य का सुपरस्टार देख रहे हैं।
विशाखापत्तनम में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए चौथे टी-20 मुकाबले में एक बार फिर यही बहस छिड़ गई। इस मैच में अभिषेक शर्मा क्रीज से बाहर निकलकर छक्का उड़ाने के प्रयास में कैच आउट हो गए। इस बार भले ही वे अपनी योजना में सफल नहीं हो पाए, लेकिन क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यही वह शैली है जिसने उन्हें एक बड़ा खिलाड़ी बनाया है और इसी शैली ने उन्हें आईपीएल से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहचान दिलाई है। अभिषेक का यह एग्रेसन गेंदबाजों के मन में खौफ पैदा करता है। एक असफलता या एक खराब शॉट उन्हें रोक नहीं सकता, क्योंकि वे जानते हैं कि टी20 फॉर्मेट में पावरप्ले का मतलब ही जोखिम उठाना है।
इतिहास गवाह है कि दुनिया के सभी महान आक्रामक सलामी बल्लेबाजों का यही हाल रहा है। उदाहरण के लिए, वीरेंद्र सहवाग को ही देख लीजिए। वे अपने करियर में अक्सर ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों को छेड़ते हुए या थर्ड मैन के ऊपर से छक्का मारने के प्रयास में आउट होते थे। आंकड़े बताते हैं कि वे 10 में से सात बार इसी आक्रामकता के कारण अपना विकेट गंवाते थे, लेकिन अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने एक चौथाई से ज्यादा रन इसी तरह के एग्रेसिव शॉट्स से जुटाए। उनकी इसी जोखिम लेने की क्षमता ने भारत को कई हारे हुए मैच जिताए। श्रीलंका के सनथ जयसूर्या को भला कौन भूल सकता है? उनका शॉर्ट आर्म पुल शॉट भी कुछ ऐसा ही था—अत्यधिक जोखिम भरा, लेकिन जब लगता था तो गेंद सीमा रेखा के पार ही मिलती थी। उनसे बेहतर ये शॉट कोई और नहीं खेल सकता था, लेकिन विकेट गंवाने का रिस्क भी उतना ही होता था।
अभिषेक शर्मा के लिए अटैकिंग क्रिकेट खेलना और पहली ही गेंद पर प्रहार करना उतना ही स्वाभाविक है, जितना राहुल द्रविड़ के लिए फुल प्रेस डिफेंस करना था। यह उनकी फितरत में है। पुराने दौर में कैरेबियन (वेस्टइंडीज) के तेज गेंदबाज पहली ही गेंद पर बाउंसर मारकर बल्लेबाजों को डराना चाहते थे, भले ही उन्हें हुक शॉट पर चौका पड़ जाए, लेकिन वे अपनी आक्रामकता नहीं छोड़ते थे। ठीक उसी तरह, अभिषेक के लिए 'गोल्डन डक' (पहली ही गेंद पर आउट होना) किसी शर्मिंदगी का विषय नहीं, बल्कि उनकी बैटिंग का एक हिस्सा है, जो उनके बड़े स्कोर्स की कीमत है। इतना तो तय है कि अभिषेक शर्मा के रूप में भारत को वीरेंद्र सहवाग के बाद दूसरा सबसे खतरनाक और बेखौफ सलामी बल्लेबाज मिल चुका है, जो अपनी शर्तों पर खेलता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी शैली आज के टी20 क्रिकेट की मांग है। 120 गेंदों के खेल में आपके पास सेट होने का समय नहीं होता। हालांकि, 'लापरवाही' और 'बेखौफ' होने में एक महीन रेखा होती है।
The Trending People का विश्लेषण है कि अभिषेक को अपनी आक्रामकता को थोड़ी 'स्मार्टनेस' के साथ जोड़ना होगा। हर गेंद छक्के के लिए नहीं होती। लेकिन टीम मैनेजमेंट को चाहिए कि वे इस युवा खिलाड़ी को अपना स्वाभाविक खेल खेलने की आजादी दें। अगर हम उनसे रोहित या कोहली जैसी स्थिरता की उम्मीद करेंगे, तो हम शायद एक और सहवाग को खो देंगे। उनका 'हिटमैन' अवतार ही उनकी यूएसपी है, और भारत को इसी की जरूरत है।
