बारूद के ढेर पर 'शांति वार्ता'—पुतिन के घर पर 91 ड्रोन हमले के दावे से हड़कंप, ट्रंप नाराज, जेलेंस्की बोले "यह रूस का नया ड्रामा
मॉस्को/कीव/वाशिंगटन, दिनांक: 30 दिसंबर 2025 — रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे महायुद्ध को खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें एक बार फिर पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। शांति की उम्मीदों के बीच एक ऐसी खबर ने दुनिया को चौंका दिया है, जिसने वाशिंगटन से लेकर मॉस्को तक की 'रेड लाइन्स' (Red Lines) को हिलाकर रख दिया है। रूस ने एक बेहद गंभीर और विस्फोटक आरोप लगाया है कि यूक्रेन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की हत्या के इरादे से उनके निजी आवास पर एक बड़ा हवाई हमला करने की कोशिश की।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दावा किया है कि यूक्रेन ने उत्तरी रूस के नोवगोरोड (Novgorod) क्षेत्र में स्थित राष्ट्रपति पुतिन के आवास को निशाना बनाते हुए 91 लॉन्ग-रेंज ड्रोन्स (Long-Range Drones) दागे। हालांकि, रूस का कहना है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी ड्रोन्स को मार गिराया और राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन इस घटना ने 'युद्ध के नियमों' को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप की एंट्री: "पुतिन ने खुद फोन किया, मैं बहुत नाराज हूं"
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस पर प्रतिक्रिया दी। फ्लोरिडा में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से ठीक पहले ट्रंप ने मीडिया के सामने एक बड़ा खुलासा किया।
ट्रंप ने कहा:
"राष्ट्रपति पुतिन ने खुद मुझे फोन करके इस हमले की जानकारी दी है। मैं इससे बहुत नाराज हूं। किसी भी देश के नेता के घर को निशाना बनाना कतई स्वीकार्य नहीं है। यह युद्ध के दायरे से बाहर की बात है।"
हालांकि, ट्रंप ने कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए एक महत्वपूर्ण बात भी जोड़ी। उन्होंने कहा, "यह संभव है कि यह हमला हुआ ही न हो, या तथ्यों में अंतर हो, लेकिन हम अपनी एजेंसियों के जरिए इसकी सच्चाई का पता लगाएंगे।" ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वे रूस के दावे पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे, लेकिन वे इस मुद्दे को शांति वार्ता के लिए एक बड़ा अवरोध मानते हैं।
जेलेंस्की का पलटवार: "हमला नहीं, यह बहाना है"
दूसरी तरफ, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कीव से जारी एक वीडियो संदेश में जेलेंस्की ने इसे "रूसी झूठ" और "मनगढ़ंत कहानी" करार दिया।
जेलेंस्की का तर्क:
- फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन: जेलेंस्की का कहना है कि रूस यह "ड्रामा" इसलिए कर रहा है ताकि उसे यूक्रेन के सरकारी भवनों (राष्ट्रपति कार्यालय और संसद) पर बड़े मिसाइल हमले करने का "बहाना" (Pretext) मिल सके।
- शांति वार्ता को झटका: उन्होंने आरोप लगाया कि रूस वास्तव में शांति नहीं चाहता। वह झूठे आरोप लगाकर कूटनीतिक प्रयासों को पटरी से उतारना चाहता है ताकि वह युद्ध जारी रख सके।
क्रेमलिन की चेतावनी: बदल जाएंगी शांति की शर्तें
इस कथित हमले के बाद क्रेमलिन (Kremlin) का रुख बेहद आक्रामक हो गया है। रूसी प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति के आवास पर हमला 'टेरर अटैक' की श्रेणी में आता है।
- समीक्षा: रूस ने साफ कर दिया है कि वह अब शांति समझौते के लिए अपनी शर्तों की समीक्षा (Revision) करेगा। इसका मतलब है कि रूस अब यूक्रेन से और अधिक क्षेत्रीय रियायतों या सैन्य प्रतिबंधों की मांग कर सकता है।
- सैन्य आदेश: दूसरी ओर, गुस्से में तमतमाए पुतिन ने अपने सैन्य कमांडरों को आदेश दिया है कि वे यूक्रेन के जापोरिज़िया (Zaporizhzhia) और डोनबास (Donbas) क्षेत्रों पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए हमले तेज कर दें। फ्रंटलाइन पर बमबारी तेज होने की खबरें आ रही हैं।
क्यों खतरनाक है यह दावा?
91 ड्रोन्स का एक साथ हमला कोई छोटी घटना नहीं है। अगर यह दावा सच है, तो यह दर्शाता है कि यूक्रेन के पास अब रूस के भीतरी इलाकों तक मार करने की क्षमता है। और अगर यह झूठ है, तो यह संकेत देता है कि रूस एक बड़े और विनाशकारी हमले की तैयारी कर रहा है जिसके लिए उसे दुनिया के सामने एक 'जस्टिफिकेशन' चाहिए।
नोवगोरोड क्षेत्र, जहां पुतिन का आवास (Valdai Residence) बताया जाता है, वह यूक्रेन की सीमा से काफी दूर है। वहां तक ड्रोन्स का पहुंचना रूसी सुरक्षा में बड़ी सेंध मानी जाएगी।
हमारी राय
रूस-यूक्रेन युद्ध अब उस मोड़ पर आ गया है जहां 'सच्चाई' धुंध में खो गई है। पुतिन के आवास पर हमले का दावा, चाहे सच हो या प्रोपेगेंडा, यह बताता है कि शांति की राह अभी कांटो भरी है।
The Trending People का विश्लेषण है कि ट्रंप का इसमें शामिल होना और नाराजगी जताना यह संकेत देता है कि अमेरिका अब इस युद्ध को खत्म करने के लिए अधीर हो रहा है। अगर नेताओं के निजी आवास युद्ध का मैदान बनते हैं, तो यह संघर्ष एक खतरनाक 'व्यक्तिगत प्रतिशोध' में बदल जाएगा। जेलेंस्की का डर भी वाजिब है कि कहीं इस बहाने कीव को मलबे में न बदल दिया जाए। दुनिया को अब केवल बयानों की नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत की निष्पक्ष जांच की जरूरत है, वरना तीसरा विश्व युद्ध सिर्फ एक 'गलतफहमी' की दूरी पर खड़ा है।
