कांग्रेस में 'संघ' पर संग्राम—दिग्विजय की तारीफ पर भड़के अपने ही सांसद, कहा 'आतंकी संगठन', BJP ने इतिहास खोलकर पूछा- "तो क्या नेहरू गलत थे?
नई दिल्ली, दिनांक: 29 दिसंबर 2025 — देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के भीतर एक बार फिर वैचारिक विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गई है, जिसने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हमलावर होने का एक और मौका दे दिया है। मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 'संगठनात्मक ताकत' की तारीफ करने से शुरू हुआ।
दिग्विजय सिंह के इस बयान ने कांग्रेस के भीतर सियासी भूचाल ला दिया। डैमेज कंट्रोल तो दूर, आग में घी डालने का काम कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर (Manickam Tagore) ने कर दिया, जिन्होंने पलटवार करते हुए आरएसएस को सीधे तौर पर 'आतंकी संगठन' (Terrorist Organization) करार दे दिया। इस बयानबाजी पर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इतिहास के पन्ने पलट दिए और कांग्रेस को महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की याद दिलाते हुए घेरा।
दिग्विजय का 'यू-टर्न' और टैगोर का विवादित बोल
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जो आमतौर पर संघ के सबसे मुखर आलोचक माने जाते हैं, ने हाल ही में संघ की कार्यशैली और संगठनात्मक ढांचे की प्रशंसा की थी। हालांकि उनका संदर्भ शायद अनुशासन को लेकर था, लेकिन पार्टी के कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया।
इसी क्रम में विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संघ की तुलना आतंकी संगठनों से कर दी। उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा देश को बांटने वाली है।
BJP का पलटवार: पूनावाला ने याद दिलाया 'इतिहास'
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला (Shehzad Poonawalla) ने मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस पार्टी का 'मानसिक संतुलन' (Mental Balance) बिगड़ गया है और मणिकम टैगोर की टिप्पणी उनके 'वैचारिक खोखलेपन' को दर्शाती है।
पूनावाला ने इतिहास के हवाले से कांग्रेस से तीन तीखे सवाल पूछे:
- नेहरू और गणतंत्र दिवस: "जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस को आमंत्रित किया था, तो क्या उन्होंने किसी आतंकवादी संगठन को बुलाया था?"
- गांधी और जेपी की तारीफ: "महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने संघ के कार्यों, विशेषकर विभाजन के समय राहत कार्यों की तारीफ की थी। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर इन महापुरुषों से ज्यादा ज्ञानी हैं?"
- प्रणब मुखर्जी की नागपुर यात्रा: "पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी, क्या वह नागपुर में किसी राष्ट्रवादी संगठन के हेडक्वार्टर गए थे या किसी आतंकवादी संगठन के?"
पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को अफजल गुरु, याकूब मेमन, बुरहान वानी और बाटला हाउस एनकाउंटर के आरोपी 'शहीद' और 'मासूम' नजर आते हैं, लेकिन राष्ट्रवादी संगठनों में वे आतंकवादियों को देखते हैं।
बांग्लादेश और 'दोहरा मापदंड': गाजा पर आंसू, ढाका पर चुप्पी?
बीजेपी नेता ने बहस का दायरा बढ़ाते हुए बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा भी उठाया।
- चुप्पी पर सवाल: पूनावाला ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में एक ऐसा 'इकोसिस्टम' है जो गाजा (Gaza) के लिए तो फंड इकट्ठा करता है और मोमबत्तियां जलाता है, लेकिन ढाका में हिंदुओं, ईसाइयों और दलितों के कत्लेआम पर अपनी आंखें मूंद लेता है।"
- दिग्विजय और पित्रोदा पर निशाना: उन्होंने दिग्विजय सिंह, राशिद अल्वी और सैम पित्रोदा जैसे नेताओं को घेरते हुए कहा कि ये लोग भारत की तुलना बांग्लादेश से करके वहां हो रहे अत्याचारों को 'सही ठहराने' (Justify) की कोशिश करते हैं। इनका तर्क होता है कि "वहां ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत में अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं," जो कि एक खतरनाक और झूठा नैरेटिव है।
CAA विरोधियों का असली चेहरा
पूनावाला ने आरोप लगाया कि यह वही समूह है जिसने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध किया था, जो वास्तव में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शरण देने के लिए लाया गया था। बीजेपी का कहना है कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति ने सीएए विरोधियों के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
कांग्रेस के लिए यह स्थिति 'आगे कुआं, पीछे खाई' वाली है। दिग्विजय सिंह का संघ की तारीफ करना और मणिकम टैगोर का उसे आतंकी बताना—यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर वैचारिक स्पष्टता का अभाव है। बीजेपी ने इतिहास का सहारा लेकर जो तर्क दिए हैं (नेहरू और गांधी के उदाहरण), उनका जवाब देना कांग्रेस के लिए मुश्किल होगा।
The Trending People का विश्लेषण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संगठनों के मुद्दों पर राजनीतिक दलों को संयम बरतना चाहिए। आरएसएस जैसे संगठन, जिसकी स्वीकार्यता समाज के बड़े वर्ग में है और जिसे पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों का सम्मान मिला है, उसे 'आतंकी' कहना राजनीतिक अपरिपक्वता है। वहीं, बांग्लादेश के मुद्दे पर विपक्ष की चुनिंदा चुप्पी (Selective Silence) उनकी धर्मनिरपेक्षता की साख पर सवाल खड़े करती है। मानवाधिकारों का मुद्दा 'धर्म' देखकर नहीं, बल्कि 'मानवता' देखकर उठाया जाना चाहिए।

