शनिवार का दिन विशेष रूप से शनिदेव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता और कर्मों के अनुसार फल देने वाला ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सरसों के तेल से जुड़े कुछ विशेष उपाय करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही, नजर दोष से बचाव और कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए सरसों के तेल का प्रयोग अत्यधिक प्रभावी माना जाता है।
इस लेख में हम शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए सरसों के तेल के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ये उपाय न केवल शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक हैं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुधारते हैं।
1. शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं
शनिवार को शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाने का विशेष महत्व है। यह उपाय शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और उनकी अशुभ दशा को शांत करने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
विधि:
- शनिवार प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शनि मंदिर जाएं और वहां शनिदेव के समक्ष दीपक जलाएं।
- दीपक में सरसों का तेल डालें और उसमें काले तिल और लौंग डालें।
- दीपक जलाते समय शनि मंत्र –
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
का 108 बार जाप करें। - इसके बाद शनिदेव को नीले फूल अर्पित करें और उनकी आरती करें।
लाभ:
✔️ शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
✔️ कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
✔️ जीवन में स्थिरता और सफलता प्राप्त होती है।
2. शनिदेव पर सरसों के तेल का अभिषेक करें
शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा से पीड़ित व्यक्ति के लिए सरसों के तेल का अभिषेक करना अत्यंत लाभकारी होता है। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में आ रहे संकट दूर होते हैं।
विधि:
- शनिवार के दिन प्रातः उठकर स्नान करें।
- किसी शनि मंदिर में जाएं और शनिदेव की मूर्ति पर सरसों का तेल चढ़ाएं।
- अभिषेक करते समय शनि बीज मंत्र –
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”
का जाप करें। - इसके बाद शनिदेव को काले तिल और उड़द दाल अर्पित करें।
- अंत में शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें।
लाभ:
✔️ शनि की महादशा और साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
✔️ जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आती है।
✔️ मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
3. नजर दोष से बचने के लिए सरसों के तेल का प्रयोग
यदि किसी व्यक्ति को बार-बार नजर लगती है या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव महसूस होता है, तो सरसों के तेल से यह दोष समाप्त किया जा सकता है।
विधि:
- शनिवार को एक कटोरी में सरसों का तेल लें।
- उसमें एक लौंग और कुछ काले तिल डालें।
- इस तेल से दीपक जलाएं और उसे शनिदेव के समक्ष रखें।
- फिर, इस दीपक को नजर लगे व्यक्ति के सिर से सात बार घुमाएं।
- इसके बाद इस दीपक को घर के बाहर किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।
लाभ:
✔️ नजर दोष समाप्त होता है।
✔️ नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
✔️ स्वास्थ्य और मानसिक शांति बनी रहती है।
4. शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करें
शनिवार के दिन स्नान से पहले सरसों के तेल की मालिश करने से न केवल शारीरिक थकान दूर होती है बल्कि यह उपाय शनि दोष को भी कम करता है।
विधि:
- शनिवार की सुबह स्नान से पहले सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करें।
- इस तेल को शरीर पर विशेष रूप से पैरों, घुटनों और कंधों पर लगाएं।
- 10-15 मिनट तक तेल को त्वचा में समाने दें।
- इसके बाद तिल के साबुन या बेसन से स्नान करें।
लाभ:
✔️ शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है।
✔️ शनि ग्रह की नकारात्मकता कम होती है।
✔️ हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं में राहत मिलती है।
5. पीपल के पेड़ पर सरसों का तेल चढ़ाएं
शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करना और उस पर सरसों का तेल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
विधि:
- शनिवार को प्रातः स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पीपल के पेड़ के पास जाएं और उस पर जल अर्पित करें।
- इसके बाद सरसों का तेल चढ़ाएं और काले तिल और उड़द दाल अर्पित करें।
- पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें।
- शनि देव के मंत्र –
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
का जाप करें।
लाभ:
✔️ शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
✔️ घर में सुख-शांति बनी रहती है।
✔️ नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
निष्कर्ष
शनिवार को सरसों के तेल से जुड़े ये उपाय शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा से प्रभावित हैं, वे इन उपायों को अपनाकर शनि दोष के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
सरसों के तेल से दीपक जलाना, शनिदेव का अभिषेक करना, शरीर पर तेल मालिश करना और पीपल के पेड़ की पूजा करना – ये सभी उपाय शनि ग्रह की शांति के लिए कारगर हैं।
यदि आप भी शनिदेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं, तो इन उपायों को अवश्य अपनाएं। शनिदेव की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त हो!