नेशनल डेस्क। अमित शाह ने मंगलवार को बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, तो दशकों पुराने गोरखा मुद्दे का समाधान छह महीने के भीतर कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो गोरखाओं की समस्याओं का स्वीकार्य समाधान निकाल सकती है।
दार्जिलिंग रैली से दिया संदेश
अमित शाह ने कुर्सियांग में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा गोरखाओं की चिंताओं और आकांक्षाओं को समझती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी शर्तों के अनुसार समाधान निकाला जाएगा।
शाह ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के छह महीने के भीतर हर गोरखा के चेहरे पर मुस्कान होगी और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी।
उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों ने वर्षों तक दार्जिलिंग और गोरखा समुदाय की उपेक्षा की है। शाह के मुताबिक, पिछली सरकारें पहाड़ी क्षेत्रों की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रही हैं।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तीन बार बैठक बुलाई थी, लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इनमें कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा। उन्होंने इसे समाधान में देरी का मुख्य कारण बताया और कहा कि अंततः एक मध्यस्थ नियुक्त करना पड़ा।
गृह मंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गोरखा समुदाय के कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर सभी वैध नाम फिर से जोड़े जाएंगे।
गोरखा मुद्दा उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से चली आ रही पृथक राज्य की मांग से जुड़ा है। यह एक संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक विषय रहा है, जिसने कई बार क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित किया है।
हमारी राय में
गोरखा मुद्दा केवल एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि दशकों से लंबित एक जटिल सामाजिक-राजनीतिक प्रश्न है। अमित शाह का यह बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसका असर उत्तर बंगाल की सीटों पर निर्णायक हो सकता है। असली चुनौती वादे को लागू करने की होगी, क्योंकि यह मुद्दा कई स्तरों पर बातचीत और सहमति की मांग करता है।
