अरुणाचल स्थापना दिवस: पीएम मोदी ने सीएम पेमा खांडू को लिखा पत्र; 'जय हिंद' की परंपरा और 'वाइब्रेंट विलेज' का किया जिक्र
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (20 फरवरी) को अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू को एक भावुक और प्रेरक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने राज्य की अनूठी संस्कृति, विकास यात्रा और सीमांत गांवों के प्रति सरकार के बदले हुए दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने अरुणाचल को "उगते सूरज की भूमि" बताते हुए कहा कि यह देश का वह राज्य है जो शेष भारत से पहले सूर्योदय का स्वागत करता है, और यहां के लोगों की देशभक्ति भी उसी सूर्य की तरह देदीप्यमान है।
जय हिंद' की परंपरा और जीवंत संस्कृति
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में अरुणाचल प्रदेश की उस खास परंपरा का विशेष जिक्र किया जिसने उन्हें हमेशा आश्चर्यचकित और प्रभावित किया है।
- देशभक्ति का प्रतीक: पीएम मोदी ने कहा कि यहां के लोगों का एक-दूसरे को 'जय हिंद' कहकर अभिवादन करना उनके लिए राष्ट्रीय गौरव और एकता की सबसे जीवंत पुष्टि है।
- जनजातीय विविधता: उन्होंने राज्य के विभिन्न जीवंत जनजातीय समुदायों, उनके अनूठे जीवन मूल्यों और सतत विकास (Sustainable Development) के प्रति उनके जुनून की जमकर सराहना की।
'आखिरी गांव' नहीं, बल्कि 'पहला गांव'
दशकों पुरानी उस पारंपरिक सोच पर प्रहार करते हुए जिसमें सीमावर्ती गांवों को 'अंतिम गांव' माना जाता था, पीएम मोदी ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया।
- उन्होंने लिखा, "मेरे लिए सीमावर्ती गांव ही हमारे देश के 'पहले गांव' हैं और इसी सोच के साथ हमने 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (Vibrant Villages Programme) की शुरुआत की है।"
- कनेक्टिविटी: पिछले एक दशक में हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण, 'डोनी पोलो हवाई अड्डे' और 'सेला सुरंग' (Sela Tunnel) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सर्वांगीण कनेक्टिविटी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ज्ञान भारतम मिशन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
पत्र में ईटानगर से शुरू हुए जीएसटी 'बचत उत्सव' का भी स्मरण किया गया। प्रधानमंत्री ने राज्य के लोगों की तकनीकी समझ और चावल, अचार, चाय, हस्तशिल्प व कालीन जैसे स्थानीय उत्पादों के प्रति उनके जुनून की प्रशंसा की। इसके अलावा, 'ज्ञान भारतम मिशन' के तहत तवांग, पश्चिम कामेंग, शि-योमी, ऊपरी सियांग और नामसाई जैसे जिलों में दुर्लभ पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण के कार्यों पर भी प्रकाश डाला गया, जो राज्य की बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करेगा।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्वर्गीय दोरजी खांडू को याद
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र में राजग (NDA) सरकार ने पूर्वोत्तर की प्रगति के लिए अभूतपूर्व संसाधन समर्पित किए हैं। किरेन रीजीजू के रूप में राज्य से पहले केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनने को उन्होंने अरुणाचल के लोगों के लिए रोमांचित करने वाला क्षण बताया। पत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू के दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू को याद करते हुए कहा, "निश्चित तौर पर लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के आपके प्रयासों पर उन्हें गर्व होता।"
संपादकीय विश्लेषण
प्रधानमंत्री का यह पत्र केवल एक बधाई संदेश नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर के प्रति केंद्र सरकार की नीतियों का एक मजबूत प्रकटीकरण है। 'अंतिम गांव' को 'प्रथम गांव' का दर्जा देना सीमावर्ती निवासियों के भीतर मनोवैज्ञानिक और सामरिक सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। अरुणाचल प्रदेश के बुनियादी ढांचे (जैसे Sela Tunnel और Donyi Polo Airport) पर जोर देना भारत की मजबूत विकासवादी और रणनीतिक स्थिति को दर्शाता है। राज्य के लोगों की 'जय हिंद' परंपरा का उल्लेख कर प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकीकरण का एक सुंदर संदेश दिया है।
