जोमैटो में एक युग का अंत और नई शुरुआत—दीपिंदर गोयल ने छोड़ी ग्रुप CEO की कुर्सी, अब 'ब्लिंकिट मैन' अलबिंदर ढींडसा के हाथ में कमान
नई दिल्ली/गुरुग्राम, दिनांक: 22 जनवरी 2026 — भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startup Ecosystem) की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक, फूड डिलीवरी दिग्गज जोमैटो (Zomato) के मुख्यालय से बुधवार को एक ऐसी खबर आई जिसने कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है। कंपनी की पैरेंट फर्म 'इटरनल' (Eternal) में एक बड़ा और रणनीतिक नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। जोमैटो को एक छोटे से स्टार्टअप से विशालकाय साम्राज्य बनाने वाले फाउंडर दीपिंदर गोयल (Deepinder Goyal) ने ग्रुप सीईओ (Group CEO) के पद से इस्तीफा दे दिया है।
उनकी जगह अब क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (Blinkit) के सीईओ अलबिंदर ढींडसा (Albinder Dhindsa) को नया ग्रुप सीईओ नियुक्त किया गया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में स्पष्ट किया है कि यह बदलाव 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। 18 साल तक कंपनी का चेहरा रहे गोयल का पद छोड़ना न केवल एक भावनात्मक क्षण है, बल्कि यह कंपनी की परिपक्वता और भविष्य की दिशा का भी संकेत है।
"अब जोखिम लेने का समय है": गोयल ने क्यों छोड़ा पद?
2008 में 'फूडीबे' (Foodiebay) के रूप में शुरू हुए सफर को जोमैटो तक लाने वाले दीपिंदर गोयल ने अपने इस्तीफे के पीछे एक दिलचस्प और दार्शनिक कारण बताया है। उनका मानना है कि एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी का सीईओ होने के नाते वे उतने 'प्रयोगधर्मी' (Experimental) नहीं हो पा रहे थे, जितना वे चाहते थे।
गोयल ने कहा:
"मैं अब ऐसे नए और अनूठे आइडियाज (New Ideas) पर काम करना चाहता हूं, जिनमें ज्यादा जोखिम और व्यापक प्रयोग की जरूरत है। एक पब्लिक कंपनी के दायरे में रहकर हर तिमाही नतीजों की चिंता के बीच ऐसे 'मूनशॉट' (Moonshot) प्रोजेक्ट्स पर काम करना मुश्किल होता है। इसलिए, मैं डे-टू-डे ऑपरेशंस से हटकर नवाचार की दुनिया में लौटना चाहता हूं।"
हालांकि, वे कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं हो रहे हैं। शेयरधारकों की मंजूरी के बाद वे इटरनल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में वाइस चेयरमैन (Vice Chairman) की भूमिका निभाएंगे। उनका फोकस अब लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी, कंपनी कल्चर और लीडरशिप डेवलपमेंट पर होगा।
अलबिंदर ढींडसा: भरोसेमंद सिपहसालार को मिली कमान
नए ग्रुप सीईओ अलबिंदर ढींडसा की नियुक्ति को बाजार विश्लेषक एक 'स्वाभाविक और सुरक्षित' कदम मान रहे हैं। ब्लिंकिट (जिसे पहले ग्रोफर्स कहा जाता था) को घाटे से उबारकर एक लाभदायक और मजबूत बिजनेस बनाने में अलबिंदर की भूमिका निर्णायक रही है।
- मंझा हुआ फाउंडर: दीपिंदर गोयल ने अलबिंदर की तारीफ करते हुए उन्हें एक "मंझा हुआ फाउंडर" बताया। उन्होंने कहा कि अलबिंदर की 'एग्जीक्यूशन क्षमता' (Execution Capability) असाधारण है। जोमैटो में इंटरनेशनल एक्सपेंशन हेड के तौर पर काम कर चुके अलबिंदर कंपनी की रग-रग से वाकिफ हैं।
- योग्यता: आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एमबीए करने वाले अलबिंदर अब जोमैटो, ब्लिंकिट और डिस्ट्रिक्ट (District) जैसे सभी वर्टिकल्स की रणनीतिक दिशा तय करेंगे।
ESOPs की वापसी: वेल्थ क्रिएशन का नया मौका
इस ट्रांजिशन का एक और महत्वपूर्ण पहलू दीपिंदर गोयल द्वारा अपने अनवेस्टेड ईशॉप्स (Unvested ESOPs) को वापस करना है। उन्होंने अपने सभी शेयर ऑप्शन्स कंपनी के पूल में लौटा दिए हैं।
- फायदा: इसका सीधा फायदा यह होगा कि इससे मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी (Equity Dilution) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, यह पूल भविष्य के लीडर्स और परफॉर्मर्स को रिवॉर्ड देने के लिए उपलब्ध रहेगा, जिससे वेल्थ क्रिएशन के नए अवसर बनेंगे।
'इटरनल' से परे: स्पेस-टेक और हेल्थ पर नजर
दीपिंदर गोयल अब केवल फूड डिलीवरी तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे इटरनल के बाहर भी कई सेक्टर्स में सक्रिय हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे स्पेस-टेक स्टार्टअप ‘पिक्सेल’ (Pixxel) में बड़े व्यक्तिगत निवेश की तैयारी में हैं। इसके अलावा, हेल्थ और एविएशन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में भी उनकी दिलचस्पी देखी जा रही है। यह एलन मस्क या जेफ बेजोस की राह पर चलने जैसा है, जो अपने मुख्य बिजनेस को सौंपकर भविष्य की तकनीकों पर दांव लगा रहे हैं।
क्या बदलेगा कामकाज?
कंपनी ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस बदलाव से इटरनल के कामकाज के ढांचे में कोई बड़ा 'यू-टर्न' नहीं आएगा। जोमैटो (फूड डिलीवरी) और ब्लिंकिट (क्विक कॉमर्स) अपने-अपने सीईओ के नेतृत्व में पहले की तरह स्वतंत्र रूप से काम करते रहेंगे। अलबिंदर का काम इन सभी के बीच तालमेल बिठाना और समूह को लाभप्रदता (Profitability) की ओर ले जाना होगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
दीपिंदर गोयल का यह कदम भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स के लिए एक नया उदाहरण पेश करता है— "कब छोड़ना है, यह जानना भी लीडरशिप है।" उन्होंने साबित किया है कि कंपनी फाउंडर से बड़ी होती है। अलबिंदर ढींडसा को कमान सौंपना यह दर्शाता है कि जोमैटो अब 'क्विक कॉमर्स' को अपने भविष्य का सबसे अहम स्तंभ मानती है।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह बदलाव जोमैटो के लिए सकारात्मक है। दीपिंदर की विजनरी सोच और अलबिंदर की एग्जीक्यूशन पावर का यह नया समीकरण कंपनी को और मजबूत करेगा। निवेशकों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि स्टीयरिंग व्हील अभी भी भरोसेमंद हाथों में है। अब देखना यह होगा कि 'वाइस चेयरमैन' के रूप में गोयल कौन सा नया 'धमाका' करते हैं।
