Share Market Today: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार फिसला, सेंसेक्स 769 अंक टूटा, निफ्टी 200-DMA के नीचे बंद
विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली, कमजोर तिमाही नतीजों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती तेजी गंवा दी। कारोबार की शुरुआत में मजबूत संकेतों के बावजूद दिन चढ़ने के साथ ही बाजार पर दबाव बढ़ता गया और अंततः सेंसेक्स व निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।
बीएसई सेंसेक्स ने सकारात्मक शुरुआत की थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के चलते यह 769 अंक यानी 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,537 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 241 अंक टूटकर 25,048 के स्तर पर आ गया और अहम तकनीकी स्तर 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे फिसल गया। दिनभर के कारोबार में निफ्टी 25,347.95 के उच्च स्तर और 25,056.20 के निचले स्तर के बीच रहा।
शेयर बाजार पर दबाव क्यों बढ़ा?
शुक्रवार को बाजार की कमजोरी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण एक साथ सक्रिय रहे। निवेशकों की धारणा पर विदेशी फंड फ्लो, कच्चे तेल की कीमतें, कॉर्पोरेट नतीजे और भू-राजनीतिक संकेतों का संयुक्त असर देखने को मिला।
FII आउटफ्लो बना सबसे बड़ा कारण
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की रीढ़ तोड़ दी। गुरुवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹2,549.80 करोड़ की निकासी की। इसके साथ ही जनवरी में लगातार 13वें सत्र में विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता बने रहे।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय कॉर्पोरेट अर्निंग्स को लेकर सतर्क हैं। जब तक कंपनियों के नतीजों में स्पष्ट मजबूती नहीं दिखती, तब तक हर छोटी तेजी को बिकवाली के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ा।
कमजोर तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा डगमगाया
बाजार पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह इंडेक्स की दिग्गज कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे भी रहे। खासतौर पर बैंकिंग और आईटी सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों की धारणा को नुकसान पहुंचाया। नतीजों के बाद इन शेयरों में बिकवाली बढ़ी, जिससे व्यापक बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 0.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह $64.57 प्रति बैरल तक पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं। इससे व्यापार घाटा बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की आशंका रहती है, जिसका असर अंततः शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।
भूराजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है
हालांकि गुरुवार को वैश्विक स्तर पर कुछ राहत भरे संकेत मिले। खबरों के मुताबिक अमेरिका की ओर से यूरोप पर संभावित टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर पहले दिए गए कड़े बयानों में नरमी के संकेत दिखे। इससे तात्कालिक तनाव कुछ हद तक कम हुआ, लेकिन पूरे सप्ताह के लिहाज से बाजार लगभग 1.5 प्रतिशत कमजोर रहा।
विश्लेषकों का मानना है कि बीते समय की आक्रामक बयानबाजी ने अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में अविश्वास बढ़ाया है। निवेशक और नीति निर्माता अब इन घटनाओं के दीर्घकालिक भू-राजनीतिक प्रभावों का आकलन कर रहे हैं, जिसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह पर भी पड़ सकता है।
अडानी ग्रुप के शेयरों में तेज बिकवाली
शुक्रवार को अडानी समूह के शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने एक अदालत से अनुमति मांगी है, ताकि कथित धोखाधड़ी और $265 मिलियन की रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में गौतम अडानी और ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी सागर अडानी को व्यक्तिगत रूप से समन्स भेजे जा सकें।
इस खबर के सामने आते ही अडानी समूह के कई शेयरों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बिकवाली तेज हो गई, जिससे बाजार की कमजोरी और बढ़ गई।
बैंकिंग शेयरों पर भी दिखा दबाव
बैंक निफ्टी ने पिछली तेजी गंवा दी और लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। घरेलू बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते बैंकिंग सेक्टर में दबाव बना रहा। सरकारी बैंकों के साथ-साथ कुछ निजी बैंक शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे समग्र बाजार धारणा और नकारात्मक हो गई।
निफ्टी50: गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी50 इंडेक्स में चुनिंदा शेयरों ने ही मजबूती दिखाई। Dr. Reddy’s Laboratories और Hindalco Industries करीब 3 प्रतिशत तक चढ़कर टॉप गेनर्स में शामिल रहे। दूसरी ओर ETERNAL, InterGlobe Aviation और SBI Life Insurance Company जैसे शेयरों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई और ये टॉप लूजर्स रहे।
मार्केट ब्रेड्थ भी कमजोर रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लगभग 1,630 शेयरों में तेजी आई, जबकि 1,729 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और 165 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला
शुक्रवार को विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.99 के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इंट्राडे कारोबार में रुपया करीब 41 पैसे टूटा।
फॉरेक्स बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से उतार-चढ़ाव पर कुछ हद तक लगाम लगी है, लेकिन रुपये की समग्र कमजोरी का रुझान अब भी बना हुआ है। अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौते को रुपये की स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।
आगे बाजार का रुख क्या रहेगा?
तकनीकी संकेत फिलहाल बाजार के पक्ष में नहीं दिख रहे। विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी ने हाल के सत्रों में “लोअर टॉप, लोअर बॉटम” का पैटर्न बनाया है, जो कमजोरी की ओर इशारा करता है। निफ्टी के लिए 25,400 का स्तर तत्काल प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। जब तक इंडेक्स इस स्तर के नीचे बना रहता है, तब तक शॉर्ट टर्म में दबाव जारी रहने की आशंका है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
मौजूदा हालात में भारतीय शेयर बाजार पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की आक्रामक बिकवाली, कमजोर कॉर्पोरेट नतीजे और वैश्विक अनिश्चितताओं ने बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। तकनीकी रूप से भी संकेत फिलहाल नकारात्मक हैं, खासकर निफ्टी का 200-DMA के नीचे बंद होना चिंता बढ़ाता है।
हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह दौर घबराने का नहीं बल्कि सतर्क रहने का है। बाजार की दिशा काफी हद तक आगामी तिमाहियों के नतीजों, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को फिलहाल जोखिम सीमित रखने और स्पष्ट ट्रेंड बनने तक इंतजार करने की जरूरत है।
