केरल के रण में पीएम मोदी का 'ब्रह्मास्त्र'—सबरीमाला सोना चोरी पर बोले "यह मोदी की गारंटी है, भगवान का खजाना लूटने वालों को जेल में चक्की पिसवाएंगे
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — दक्षिण भारत के राजनीतिक दुर्ग और वामपंथ के आखिरी गढ़ माने जाने वाले केरल में चुनावी बिगुल बजते ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम की धरती से एक ऐसा भावनात्मक और राजनीतिक दांव चला है, जिसने सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) और विपक्षी यूडीएफ (UDF) दोनों की नींद उड़ा दी है। भगवान अयप्पा के करोड़ों भक्तों की आस्था के केंद्र सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना चोरी मामले को उठाते हुए प्रधानमंत्री ने एक कड़ा और सीधा वादा किया है। उन्होंने हजारों की भीड़ के सामने हुंकार भरते हुए कहा कि अगर केरल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनती है, तो सबरीमाला में हुई सोने की चोरी के हर आरोप की गहराई से जांच होगी और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
प्रधानमंत्री का यह बयान महज एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में 'भ्रष्टाचार' और 'आस्था' को एक धुरी पर लाने की सोची-समझी रणनीति है। पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि यह 'मोदी की गारंटी' है। उनका कहना था कि भगवान के खजाने पर हाथ साफ करने वाले चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। यह बयान सीधे तौर पर पिनाराई विजयन की नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के लिए एक चुनौती है, जिन पर सबरीमाला की परंपराओं और संपत्तियों की सुरक्षा में कथित लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। पीएम मोदी ने इस मुद्दे को केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर कुठाराघात बताया।
सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के दरवाजों और द्वारपालक प्रतिमाओं पर चढ़े सोने के गायब होने या उसमें मिलावट की खबरें पिछले काफी समय से केरल की राजनीति में तूफान खड़ा किए हुए हैं। फिलहाल केरल पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी जांच कर रही है, लेकिन भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के बीच जा रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि एलडीएफ सरकार ने सबरीमाला की पवित्रता और परंपराओं को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि पूरा देश भगवान अयप्पा पर अटूट विश्वास रखता है, लेकिन राज्य सरकार ने उस विश्वास को तोड़ने का काम किया है। मोदी ने जनता को विश्वास दिलाया कि भाजपा के सत्ता में आते ही इस मामले की फाइलें दोबारा खोली जाएंगी और पारदर्शी तरीके से सच सामने लाया जाएगा।
अपने आक्रामक भाषण में पीएम मोदी ने केरल की राजनीति में दशकों से जमे दो प्रमुख गठबंधनों—एलडीएफ (Left Democratic Front) और यूडीएफ (United Democratic Front)—पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इन दोनों को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए कहा कि दशकों से इन गठबंधनों ने केरल को भ्रष्टाचार, कुशासन और तुष्टिकरण की राजनीति की आग में झोंक दिया है। प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि केरल की जनता ने अब तक मजबूरी में सिर्फ दो ही विकल्प देखे हैं और बारी-बारी से दोनों ने उन्हें निराश किया है। लेकिन अब समय बदल गया है। भाजपा और एनडीए राज्य के सामने विकास, सुशासन और पारदर्शिता का एक 'तीसरा और सशक्त विकल्प' लेकर आए हैं। उन्होंने दावा किया कि केरल का भविष्य बदलने वाला है और राज्य की जनता अब बदलाव के मूड में है।
प्रधानमंत्री ने अपने विजन को रखते हुए कहा कि आने वाला विधानसभा चुनाव केरल की दिशा और दशा बदलने वाला साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा-एनडीए की सरकार बनने पर राज्य में कानून का राज स्थापित होगा और हिंसा की राजनीति का अंत होगा। सबरीमाला मुद्दे को उन्होंने इसी बड़े बदलाव की कड़ी के रूप में पेश किया। विश्लेषकों का मानना है कि सबरीमाला का मुद्दा केरल में भाजपा के लिए हमेशा से एक इमोशनल कनेक्ट रहा है। अब सोना चोरी के मामले पर पीएम का सीधा हस्तक्षेप और जेल भेजने का वादा पार्टी के कोर वोट बैंक को एकजुट करने के साथ-साथ उन तटस्थ मतदाताओं को भी आकर्षित कर सकता है जो भ्रष्टाचार और आस्था के मुद्दों पर संवेदनशील हैं।
केरल के सियासी समीकरणों पर इस बयान का गहरा असर पड़ने की संभावना है। सवाल यही है कि क्या यह मुद्दा एलडीएफ और यूडीएफ के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब होगा? सबरीमाला सोना चोरी मामला, जिसमें गर्भगृह के दरवाजों से सोना गायब होने के गंभीर आरोप हैं, अब महज एक कानूनी जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह चुनावी कुरुक्षेत्र का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। प्रधानमंत्री की रैली में उमड़ी भीड़ और उनके भाषण पर मिली प्रतिक्रिया यह संकेत दे रही है कि केरल की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है, जहां 'विकास' और 'विरासत' दोनों साथ-साथ चलेंगे।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का केरल में सबरीमाला कार्ड खेलना एक मास्टरस्ट्रोक हो सकता है। उत्तर भारत की तरह दक्षिण में भी भाजपा 'आस्था और भ्रष्टाचार मुक्त शासन' के मिश्रण से अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। सोना चोरी का मुद्दा भावनात्मक रूप से बेहद ज्वलनशील है।
The Trending People का विश्लेषण है कि एलडीएफ और यूडीएफ के लिए इस नैरेटिव का मुकाबला करना आसान नहीं होगा। अगर भाजपा यह स्थापित करने में सफल हो जाती है कि मौजूदा सरकार भगवान के खजाने की भी रक्षा नहीं कर सकी, तो यह वामपंथी किले में बड़ी दरार डाल सकता है। हालांकि, केरल का मतदाता राजनीतिक रूप से बहुत जागरूक है, इसलिए केवल भावनात्मक मुद्दों के सहारे चुनाव जीतना कठिन होगा, लेकिन यह निश्चित है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प होने वाला है।
