अब 'चेहरा और आवाज' भी है आपकी निजी संपत्ति—सलमान खान ने चीनी AI कंपनी को भेजा कोर्ट का नोटिस, जानें क्या है 'पर्सनैलिटी राइट्स' की जंग
नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — भारत की अदालतों में इन दिनों एक नई किस्म की कानूनी लड़ाई जोर पकड़ रही है, जो जमीन-जायदाद या पैसों के लिए नहीं, बल्कि इंसान की 'पहचान' (Identity) को बचाने के लिए लड़ी जा रही है। इसे कानूनी भाषा में 'पर्सनैलिटी राइट्स' (Personality Rights) या व्यक्तित्व का अधिकार कहा जाता है। यह मामला अब सिर्फ कॉपीराइट की किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बॉलीवुड के बड़े सितारों की आवाज, तस्वीर और डिजिटल पहचान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सेंधमारी से बचाने का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
ताजा मामला बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान (Salman Khan) से जुड़ा है। सलमान खान ने अपनी पहचान की सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अभिनेता ने चीन की एक एआई कंपनी के खिलाफ याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कंपनी को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का नोटिस भेजा है। आइए समझते हैं कि आखिर यह कानून क्या है और क्यों सितारों को अपनी ही आवाज और चेहरे के लिए लड़ना पड़ रहा है।
क्या है 'पर्सनैलिटी राइट्स'? आसान शब्दों में समझें
'पर्सनैलिटी राइट्स' या 'पब्लिसिटी राइट्स' (Right to Publicity) का सीधा मतलब है किसी व्यक्ति, विशेषकर सार्वजनिक हस्तियों (Celebrities), को अपने नाम, फोटो, चेहरे, आवाज, हस्ताक्षर, शैली और अन्य पहचान योग्य लक्षणों पर नियंत्रण रखने का अधिकार।
- उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि कोई भी तीसरा व्यक्ति इन पहचान योग्य तत्वों का इस्तेमाल बिना अनुमति के अपने व्यावसायिक लाभ (विज्ञापन, मर्चेंडाइज, प्रमोशन) के लिए न कर सके।
- कानूनी स्थिति: भारत में अभी तक पर्सनैलिटी राइट्स के लिए कोई अलग और विशिष्ट लिखित कानून (Statute) नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स ने अपने ऐतिहासिक फैसलों (Precedents) के आधार पर इसे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और सम्मान का अधिकार), निजता के अधिकार, कॉपीराइट एक्ट और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत सुरक्षा प्रदान की है।
सरल शब्दों में, अगर कोई कंपनी अमिताभ बच्चन की भारी आवाज या अनिल कपूर के 'झकास' बोलने के अंदाज का इस्तेमाल अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए करती है, तो यह चोरी मानी जाएगी। यह अधिकार सिर्फ सितारों के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक की गरिमा से जुड़ा है।
सलमान खान बनाम चीनी एआई: क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में सलमान खान ने दिल्ली हाई कोर्ट में चीन की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉयस जनरेशन कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला है।
- आरोप: सलमान का कहना है कि उनके नाम, फोटो, आवाज और चेहरे की छवि का उपयोग बिना उनकी सहमति के किया जा रहा है। इससे न केवल उनके ब्रांड एंडोर्समेंट और अनुबंधों (Contracts) को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि डीपफेक (Deepfake) और गलत सूचनाओं के जरिए उनकी छवि खराब होने का भी खतरा है।
- कंपनी का तर्क: वहीं, चीनी कंपनी ने कोर्ट में अर्जी देकर अंतरिम आदेश को खत्म करने की मांग की है। उनका तर्क है कि सिंथेटिक आवाजें (Synthetic Voices) बनाना एक तकनीकी विकास है और उनकी सर्विसेज इसका अहम हिस्सा हैं। उनका कहना है कि वे सीधे तौर पर एक्टर की इमेज का दुरुपयोग नहीं कर रहे हैं और पाबंदियों से इनोवेशन (नवाचार) रुक जाएगा।
कोर्ट ने फिलहाल कंपनी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। यह मामला भारत में एआई और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के टकराव का एक क्लासिक उदाहरण बनने जा रहा है।
क्यों बढ़ रहा है यह विवाद? AI और डीपफेक का साया
डिजिटल युग में तकनीक वरदान के साथ-साथ अभिशाप भी बन रही है। जेनरेटिव एआई (Generative AI) और डीपफेक टेक्नोलॉजी की वजह से अब किसी भी व्यक्ति की हुबहू आवाज या चेहरा मिनटों में नकल (Clone) किया जा सकता है।
- दुरुपयोग: इसका इस्तेमाल ऑनलाइन प्रमोशन, नकली विज्ञापन, ठगी और यहां तक कि अश्लील सामग्री (Deepfake Pornography) बनाने में हो रहा है। यह अब केवल फैंस द्वारा बनाए गए 'मीम्स' तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक आर्थिक और सामाजिक नुकसान पहुंचा रहा है। इसीलिए कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कला या व्यंग्य (Parody) के लिए छूट हो सकती है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह अवैध है।
अमिताभ से लेकर अनिल कपूर तक: जिन्होंने मांगी सुरक्षा
सलमान खान इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। साल 2025 में कई बड़े सितारों ने अपनी पहचान बचाने के लिए कोर्ट की शरण ली है।
अमिताभ बच्चन: बॉलीवुड के शहंशाह ने सबसे पहले बिगुल बजाया था। कोर्ट ने उनके नाम, आवाज और चेहरे के बिना अनुमति उपयोग पर रोक लगाई थी, जिसे एक ऐतिहासिक फैसला माना गया।
अनिल कपूर: उन्होंने अपनी मशहूर संवाद शैली 'झकास' और अपने नाम के एआई दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा हासिल की।
जैकी श्रॉफ और एश्वर्या राय: इन सितारों ने भी अपनी डिजिटल पहचान (Digital Persona) को सुरक्षित करने के लिए अदालती आदेश प्राप्त किए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि भारत में स्पष्ट 'पर्सनैलिटी राइट्स एक्ट' न होने के बावजूद, अदालतें अब बहुत सक्रिय हो गई हैं। वे मौजूदा कानूनों की व्याख्या इस तरह कर रही हैं कि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और आर्थिक हितों को डिजिटल लुटेरों से बचाया जा सके। विशेषज्ञ कहते हैं, "आज की डिजिटल दुनिया में सेलेब्रिटी का चेहरा और आवाज सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि एक 'कानूनी संपत्ति' (Legal Asset) है। बिना लाइसेंस के इसका इस्तेमाल करना चोरी है।"
हमारी राय (The Trending People Analysis)
सलमान खान का यह कदम एआई कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए जरूरी है। तकनीक का विकास स्वागत योग्य है, लेकिन यह किसी व्यक्ति की निजता और मेहनत की कमाई की कीमत पर नहीं हो सकता।
The Trending People का विश्लेषण है कि आने वाले समय में यह लड़ाई और तेज होगी। जब एआई किसी मरे हुए गायक की आवाज में नया गाना गा सकता है या किसी एक्टर का चेहरा किसी भी वीडियो पर लगा सकता है, तो कानूनों को भी उतना ही स्मार्ट होना पड़ेगा। यह मामला सिर्फ बॉलीवुड का नहीं है, यह हमारी और आपकी डिजिटल पहचान की सुरक्षा का भी सवाल है। कोर्ट का सख्त रुख यह संदेश देता है कि भारत में 'बौद्धिक संपदा' की चोरी अब आसान नहीं होगी।
