ट्रंप के 'नीले हाथ' ने बढ़ाई अमेरिका की धड़कनें—एस्पिरिन का नशा या बुढ़ापे का असर? राष्ट्रपति बोले "डॉक्टर मना करते हैं, पर मैं रिस्क नहीं लेता"
वाशिंगटन/दावोस, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की कमान जिसके हाथ में हो, अगर उन हाथों पर रहस्यमयी नीले निशान (Blue Bruises) दिख जाएं, तो वैश्विक मीडिया में हलचल मचना स्वाभाविक है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की सेहत एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बन गई है। दावोस से लौटते वक्त उनकी कुछ तस्वीरें सामने आईं जिनमें उनके बाएं हाथ पर गहरे नीले रंग के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। 79 वर्षीय राष्ट्रपति की इन तस्वीरों ने अमेरिका से लेकर यूरोप तक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत है? क्या उनकी उम्र उन पर हावी हो रही है? इन सवालों के बीच, व्हाइट हाउस और खुद डोनाल्ड ट्रंप ने सामने आकर इस 'नीले निशान' का सच बयां किया है, जो एक अजीबोगरीब मेडिकल हठधर्मिता की ओर इशारा करता है।
एयर फोर्स वन (Air Force One) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस रहस्य से पर्दा उठाया। उन्होंने स्वीकार किया कि यह निशान कोई बीमारी नहीं, बल्कि उनकी अपनी जीवनशैली और दवा के सेवन का नतीजा है। ट्रंप ने बताया कि वह रोज ज्यादा मात्रा में एस्पिरिन (Aspirin) लेते हैं। उनके अनुसार, एस्पिरिन खून को पतला करती है, इसलिए अगर उन्हें थोड़ी सी भी चोट लगती है, तो वहां जल्दी नील पड़ जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान जब उनका हाथ एक टेबल से टकरा गया, तो यह निशान उभर आया। हंसते हुए ट्रंप ने अपनी सफाई में कहा कि लोग कहते हैं दिल के लिए एस्पिरिन लो, लेकिन अगर शरीर पर नीले निशान नहीं चाहते तो मत लो। मैं तो बड़ी वाली एस्पिरिन लेता हूं।
ट्रंप का यह खुलासा उनके डॉक्टरों की सलाह के ठीक विपरीत है। उन्होंने खुद माना कि उनकी मेडिकल टीम उन्हें एस्पिरिन की इतनी हाई डोज लेने से मना करती है। उनके शब्दों में, डॉक्टर कहते हैं कि आप बहुत स्वस्थ हैं, आपको इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन मैं कोई खतरा नहीं लेना चाहता। ट्रंप का मानना है कि 'गाढ़ा खून' दिल के लिए खतरनाक होता है, इसलिए वे एहतियातन खून को पतला रखने के लिए यह दवा लेते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी बयान जारी कर स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने पुष्टि की कि 'बोर्ड ऑफ पीस' की घोषणा के दौरान ट्रंप का हाथ साइनिंग टेबल के कोने से टकरा गया था, जिससे यह निशान पड़ा।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चार वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस स्थिति का विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि यह चिकित्सकीय रूप से संभव है। एस्पिरिन एक एंटी-प्लेटलेट दवा है जो खून को जमने से रोकती है। इसके ज्यादा सेवन से छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं और मामूली चोट लगने पर भी त्वचा के नीचे खून रिसाव हो जाता है, जो नीले निशान के रूप में दिखता है। हालांकि, बिना किसी कार्डियक हिस्ट्री (हृदय रोग का इतिहास) के इतनी ज्यादा एस्पिरिन लेना 'गैस्ट्रिक ब्लीडिंग' या 'ब्रेन हेमरेज' का खतरा भी बढ़ा सकता है, लेकिन ट्रंप अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने इसे 'अच्छा पतला खून' कहा था।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के हाथ पर ऐसे निशान देखे गए हैं। बीते साल भी उनकी हथेलियों पर रहस्यमयी लाल और नीले धब्बे देखे गए थे, तब व्हाइट हाउस ने इसे समर्थकों से लगातार हाथ मिलाने का नतीजा बताया था। लेकिन इस बार एस्पिरिन का एंगल सामने आने से उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर बहस छिड़ गई है। 79 साल के ट्रंप अमेरिका के इतिहास में दूसरे सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले जो बाइडेन इस पद पर रहे, जो 82 साल की उम्र में पद छोड़कर गए थे। बाइडेन को उम्र और सेहत पर उठते सवालों के चलते ही 2024 का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेना पड़ा था। अब वही सवाल ट्रंप का पीछा कर रहे हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति का स्वास्थ्य राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा माना जाता है। एक छोटी सी छींक या लड़खड़ाहट भी शेयर बाजार को गिरा सकती है। ऐसे में, ट्रंप का अपनी मर्जी से हाई डोज दवा लेना और डॉक्टरों की सलाह को अनसुना करना केवल एक व्यक्तिगत चॉइस नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक चिंता का विषय है। दावोस में दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले ट्रंप अपने शरीर के साथ जो प्रयोग कर रहे हैं, वह उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों के लिए कौतूहल और चिंता का विषय बना हुआ है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
डोनाल्ड ट्रंप के हाथ का नीला निशान महज एक चोट हो सकती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी उनकी कार्यशैली को दर्शाती है। वे नियमों और सलाहों को मानने के बजाय अपनी 'इंस्टिंक्ट' (अंतर्ज्ञान) पर भरोसा करते हैं, चाहे वह राजनीति हो या सेहत। एस्पिरिन की हाई डोज लेना एक जोखिम भरा जुआ है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 79 वर्ष की आयु में शरीर दवाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। अमेरिका जैसा देश, जो वैश्विक नेतृत्व का दावा करता है, उसका राष्ट्रपति अगर मेडिकल प्रोटोकॉल को दरकिनार करता है, तो यह अस्थिरता का संकेत दे सकता है। हालांकि, ट्रंप की ऊर्जा और सक्रियता उनके आलोचकों को गलत साबित करती रही है, लेकिन शरीर के अपने नियम होते हैं जिन्हें राष्ट्रपति का पद भी नहीं बदल सकता। यह नीला निशान एक चेतावनी है कि सेहत को हल्के में लेना दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान को भी भारी पड़ सकता है।
