ट्रंप का 'गाढ़ा खून' और दिमाग पर असर? एस्पिरिन की हाई डोज बनी चर्चा का विषय, डॉक्टरों की चेतावनी के बावजूद ले रहे 4 गुना दवा
वाशिंगटन/नई दिल्ली, दिनांक: 10 जनवरी 2026 — दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने आक्रामक फैसलों, पलटते बयानों और कभी-कभी बेहद अजीब लगने वाले व्यवहार के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन क्या उनके इस अस्थिर व्यवहार के पीछे कोई मेडिकल कारण हो सकता है? हाल ही में एक अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में हुए खुलासे ने इस बहस को जन्म दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 79 वर्षीय राष्ट्रपति ट्रंप पिछले काफी समय से खून पतला करने के लिए एस्पिरिन (Aspirin) का अत्यधिक सेवन कर रहे हैं, जिसका सीधा और नकारात्मक असर उनके मानसिक संतुलन और व्यवहार पर पड़ रहा है।
व्हाइट हाउस के गलियारों से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि ट्रंप अपनी मेडिकल टीम की सलाह को दरकिनार कर अपनी 'मर्जी की दवा' ले रहे हैं, जो न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि उनकी निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) के लिए भी खतरा बन सकता है।
325 मिलीग्राम की जिद्द: डॉक्टरों से कहा 'NO'
डोनाल्ड ट्रंप अपनी सेहत को लेकर अक्सर अपने ही तर्क गढ़ते हैं। ताज़ा जानकारी के अनुसार, वे रोजाना 325 मिलीग्राम एस्पिरिन ले रहे हैं।
- खतरा: मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, सामान्य तौर पर खून पतला करने के लिए 75 से 81 मिलीग्राम की 'बेबी एस्पिरिन' पर्याप्त होती है। ट्रंप जो डोज ले रहे हैं, वह सुझाई गई मात्रा से लगभग चार गुना अधिक है।
- ट्रंप का तर्क: जब उनकी मेडिकल टीम ने उन्हें डोज कम करने की सलाह दी, तो उन्होंने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया। उनका अजीबोगरीब तर्क है कि वे "अपने दिल में गाढ़ा खून नहीं चाहते," इसलिए वे यह हाई डोज लेना जारी रखेंगे। यह हठधर्मिता उनके स्वास्थ्य के लिए एक टाइम बम साबित हो सकती है।
बर्ताव पर असर: गुस्सा, भ्रम और 'मूड स्विंग'
एस्पिरिन को आमतौर पर एक साधारण दर्द निवारक या हार्ट की दवा माना जाता है, लेकिन इसका 'ओवरडोज' दिमाग के रसायनों (Chemicals) के साथ खिलवाड़ कर सकता है। विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि एस्पिरिन का अत्यधिक सेवन केवल शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी गहरा असर डालता है।
साइड इफेक्ट्स:
- मन की अशांति: ओवरडोज से व्यक्ति का मन अशांत रहता है और वह छोटी-छोटी बातों पर जल्दी उत्तेजित (Agitated) हो जाता है।
- निर्णय क्षमता: निर्णय लेने में अस्पष्टता (Confusion) और घबराहट (Nervousness) महसूस होना इसके आम लक्षण हैं।
- डिप्रेशन: बुजुर्गों में लंबे समय तक हाई डोज लेने से अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।
राजनीतिक विश्लेषण: राजनीतिक विश्लेषकों ने ट्रंप के हालिया व्यवहार को इस मेडिकल कंडीशन से जोड़ना शुरू कर दिया है। उनका बार-बार अपनी ही बातों से पलटना (Flip-flopping), सार्वजनिक मंचों पर अन्य राष्ट्राध्यक्षों का अजीब तरीके से मजाक उड़ाना और चेहरे के विचित्र हाव-भाव—यह सब इसी 'मेडिकल असंतुलन' का नतीजा हो सकता है।
'ओवरडोज' के खतरे: नसों की बीमारी और ब्रेन हेमरेज
पिछले साल यह बात सामने आई थी कि ट्रंप 'क्रॉनिक वीनस इनसफिशिएंसी' (Chronic Venous Insufficiency) से जूझ रहे हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैरों की नसों को खून वापस दिल तक पहुंचाने में दिक्कत होती है।
- ब्लीडिंग का डर: हालांकि व्हाइट हाउस के मेमो में उनकी कार्डियोवैस्कुलर रिपोर्ट को 'नॉर्मल' बताया गया है, लेकिन एस्पिरिन का एंटी-क्लॉटिंग गुण (खून न जमने देने की क्षमता) खतरनाक हो सकता है। हाई डोज से 'इंटरनल ब्लीडिंग' (Internal Bleeding) या 'ब्रेन हेमरेज' जैसे जानलेवा खतरे बढ़ जाते हैं। एक छोटी सी चोट भी अनियंत्रित रक्तस्राव का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों की राय: 'बिना इतिहास के दवा जहर है'
मेडिकल गाइडलाइंस स्पष्ट कहती हैं कि 60 से 70 साल से अधिक उम्र के लोगों को नियमित रूप से एस्पिरिन लेने की सलाह तभी दी जाती है जब उन्हें पहले कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक आया हो (Secondary Prevention)।
- जोखिम: बिना किसी गंभीर हृदय रोग के इतिहास के, केवल एहतियात के तौर पर इतनी भारी मात्रा में एस्पिरिन लेना फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। यह पेट के अल्सर और किडनी फेलियर का भी कारण बन सकता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
किसी भी देश के राष्ट्रपति का स्वास्थ्य उसका निजी मामला नहीं होता, क्योंकि उसके फैसले करोड़ों लोगों की जिंदगियों को प्रभावित करते हैं। अगर दुनिया के सबसे ताकतवर नेता का मानसिक संतुलन किसी दवा के ओवरडोज के कारण प्रभावित हो रहा है, तो यह वैश्विक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
The Trending People का विश्लेषण है कि ट्रंप की मेडिकल टीम को अधिक सख्ती दिखानी चाहिए। एस्पिरिन जैसी साधारण दिखने वाली दवा का दुरुपयोग यह बताता है कि 'सेल्फ-मेडिकेशन' (Self-medication) की आदत कितनी खतरनाक हो सकती है, चाहे आप आम आदमी हों या राष्ट्रपति। 2026 के भू-राजनीतिक माहौल में एक स्वस्थ और संतुलित अमेरिकी राष्ट्रपति की जरूरत है, न कि ऐसे नेता की जो 'दवाओं के नशे' में फैसले ले रहा हो।
