नेपाल की सियासत में 'बालेन' का बवंडर—काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा, अब केपी ओली के किले में सेंध लगाने की तैयारी, PM पद के लिए ठोंकी ताल
काठमांडू/नई दिल्ली, दिनांक: 19 जनवरी 2026 — हिमालय की गोद में बसे पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में रविवार को एक ऐसा भूचाल आया है, जिसकी कंपन दिल्ली से लेकर बीजिंग तक महसूस की जा रही है। अपनी बेबाक कार्यशैली और 'भारत विरोधी' बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के लोकप्रिय मेयर बालेन्द्र शाह (Balendra Shah), जिन्हें जनता प्यार से 'बालेन' कहती है, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नेपाल के आगामी आम चुनावों की दिशा बदलने वाला एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। बालेन शाह ने न केवल मेयर की कुर्सी छोड़ी है, बल्कि उन्होंने देश के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सीधी चुनौती देने का ऐलान कर दिया है।
रविवार को डिप्टी मेयर को सौंपे गए अपने हस्तलिखित इस्तीफे में बालेन शाह ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि वह नेपाल के संविधान-2015, स्थानीय सरकार संचालन अधिनियम-2017 और महानगर से जुड़े मौजूदा कानूनों के तहत स्वेच्छा से अपना पद छोड़ रहे हैं। 2022 के स्थानीय चुनावों में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू का मेयर बनकर उन्होंने जो इतिहास रचा था, अब वे उसे राष्ट्रीय राजनीति के पटल पर दोहराना चाहते हैं। अपने इस्तीफे में उन्होंने महानगर के निवासियों के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में शहर का विकास और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी होगा।
इस इस्तीफे की असली वजह बालेन शाह की नई राजनीतिक पारी है। हाल ही में उन्होंने 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (RSP) का दामन थाम लिया है, जो नेपाल की राजनीति में एक उभरती हुई तीसरी ताकत मानी जा रही है। पार्टी ने बिना समय गंवाए उन्हें 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों के लिए अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। यह घोषणा नेपाल के पारंपरिक राजनीतिक दलों—नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल—के लिए खतरे की घंटी है। बालेन शाह ने जिस निर्वाचन क्षेत्र को चुना है, वह उनके आत्मविश्वास और जोखिम लेने की क्षमता को दर्शाता है। वे झापा-5 (Jhapa-5) सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। यह सीट कोई साधारण सीट नहीं है, बल्कि यह चार बार के प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली का पारंपरिक और अभेद्य गढ़ मानी जाती है। बालेन ने दावा किया है कि वह ओली को उन्हीं के घर में हराएंगे, जो नेपाल की राजनीति में 'डेविड बनाम गोलियत' की लड़ाई जैसा होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बालेन शाह की लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार नेपाल का जेन-जी (Gen-Z) और युवा वर्ग है। अपनी रैपर (Rapper) वाली छवि और सिस्टम विरोधी तेवरों के कारण वे युवाओं के बीच एक आइकन बन चुके हैं। उन्होंने हालिया जेन-जी आंदोलनों का खुलकर समर्थन किया था, जिससे उनकी पकड़ और मजबूत हुई है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में पेश कर रही है जो नेपाल को पुराने नेताओं के चंगुल से मुक्त करा सकता है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में बालेन शाह को चीन का समर्थक और भारत के प्रति कड़ा रुख रखने वाला नेता माना जाता है। उनके मेयर रहते हुए काठमांडू में भारतीय सिनेमा पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसलों ने काफी विवाद खड़ा किया था। अब उनका प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना भारत-नेपाल संबंधों के लिए भी एक चिंता का विषय हो सकता है, खासकर तब जब वे केपी ओली जैसे नेता को चुनौती दे रहे हैं, जिनका अपना झुकाव भी समय-समय पर चीन की ओर रहा है।
नेपाल में चुनाव से पहले मची यह उथल-पुथल केवल बालेन शाह तक सीमित नहीं है। इससे पहले खेल मंत्री बबलू गुप्ता के इस्तीफे ने भी सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े किए थे। अब बालेन शाह का मैदान में उतरना यह संकेत देता है कि नेपाल का आगामी चुनाव पारंपरिक मुद्दों से हटकर 'बदलाव' और 'युवा नेतृत्व' पर केंद्रित होने वाला है। अगर बालेन शाह झापा-5 में केपी ओली को कड़ी टक्कर देने में सफल हो जाते हैं, तो यह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। फिलहाल, काठमांडू से लेकर झापा तक सियासी पारा सातवें आसमान पर है और सभी की नजरें 5 मार्च की तारीख पर टिकी हैं।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
बालेन शाह का इस्तीफा और संसदीय चुनाव लड़ने का फैसला नेपाल की राजनीति में एक 'पैराडाइम शिफ्ट' है। एक निर्दलीय मेयर से राष्ट्रीय नेता बनने का उनका सफर अरविन्द केजरीवाल की शैली की याद दिलाता है। केपी ओली को उनके गढ़ में चुनौती देना एक साहसिक कदम है जो या तो बालेन को 'जायंट किलर' बना देगा या उनके राजनीतिक करियर पर विराम लगा देगा।
The Trending People का विश्लेषण है कि भारत को नेपाल के इन बदलते समीकरणों पर पैनी नजर रखनी होगी। बालेन शाह की 'प्रो-चाइना' छवि और युवाओं में उनकी लोकप्रियता भविष्य में काठमांडू की विदेश नीति को प्रभावित कर सकती है। नेपाल की जनता, जो पुराने चेहरों से ऊब चुकी है, बालेन में एक उम्मीद देख रही है। लेकिन प्रशासन चलाना और रैप गाना दो अलग चीजें हैं। यह चुनाव तय करेगा कि क्या नेपाल का युवा वास्तव में सत्ता परिवर्तन के लिए तैयार है या यह केवल सोशल मीडिया का शोर है।
