विकसित भारत’ के निर्माण में युवा होंगे अभिनेता, निर्माता और निर्देशक: नौसेना प्रमुख
भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने सोमवार को युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ की यात्रा में देश के युवा केवल भागीदार ही नहीं, बल्कि इसके अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और कई बार दर्शक भी होंगे। उन्होंने यह बात राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेट्स की एक सभा को संबोधित करते हुए कही।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत की आबादी का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा युवा वर्ग का है और यही युवा शक्ति 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बनेगी। उन्होंने युवाओं से आत्म-अनुशासन, टीम वर्क और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की।
मेहनत और लगन का महत्व
अपने संबोधन में एडमिरल त्रिपाठी ने कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास के महत्व को समझाने के लिए टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फेडरर की सफलता केवल प्रतिभा का नतीजा नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और असफलताओं से सीखने की क्षमता का परिणाम थी।
नौसेना प्रमुख ने युवाओं से कहा कि जीवन में लक्ष्य पाने के लिए निरंतर अभ्यास और धैर्य जरूरी है। केवल एक बार की सफलता या व्यक्तिगत उपलब्धि किसी संगठन या देश को आगे नहीं बढ़ा सकती।
साहस और बलिदान की प्रेरणा
साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की बात करते हुए उन्होंने 1971 के युद्ध में अद्वितीय वीरता दिखाने वाले अरुण खेत्रपाल के शौर्य और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने बेहद कम उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और यह उदाहरण आज भी युवाओं को निस्वार्थ सेवा और साहस की प्रेरणा देता है।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए चरित्र, साहस और सामूहिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
टीम भावना पर जोर
नौसेना प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल “व्यक्तिगत उत्कृष्टता” से न तो कोई संगठन विकसित हो सकता है और न ही कोई राष्ट्र। उन्होंने युवाओं से टीम भावना को अपनाने और सामूहिक प्रयासों पर भरोसा करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी ऊर्जा, कौशल और टीम भावना को एकता और स्पष्ट उद्देश्य के साथ जोड़ लें, तो यह शक्ति 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।
‘इसमें मेरा क्या फायदा है’ वाली सोच से बाहर निकलने की सलाह
एडमिरल त्रिपाठी ने युवाओं से व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठने की अपील की। उन्होंने कहा कि “इसमें मेरा क्या फायदा है?” जैसी मानसिकता को अपने शब्दकोश से बाहर करना होगा। राष्ट्र निर्माण में योगदान का भाव ही असली सफलता की पहचान है।
उन्होंने कहा कि आज के NCC कैडेट्स आने वाले वर्षों में देश के नेतृत्वकर्ता होंगे। उस समय उनकी उम्र लगभग 37 से 40 वर्ष के बीच होगी, जब वे अपने अनुभव और ऊर्जा के शिखर पर होंगे। ऐसे में देश को उनसे जिम्मेदारी, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की उम्मीद होगी।
नौसेना प्रमुख का यह संदेश साफ करता है कि ‘विकसित भारत’ केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प है। इसमें युवाओं की भूमिका केंद्रीय होगी और उन्हें ही इस परिवर्तन की कहानी का नायक बनना होगा।
TheTrendingPeople.com की राय में, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी का यह संबोधन युवाओं के लिए एक स्पष्ट दिशा और प्रेरणा देता है। यदि युवा आत्म-अनुशासन, टीम वर्क और राष्ट्रहित को अपने जीवन का आधार बना लें, तो 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल सपना नहीं रहेगा, बल्कि एक सशक्त वास्तविकता में बदलेगा।
