एशिया की 'फैक्ट्री' बनने की दौड़ में भारत की रफ्तार धीमी—मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में छठे पायदान पर अटका, चीन और मलेशिया से अभी भी कोसों दूर
नई दिल्ली/हॉन्ग कॉन्ग, दिनांक: 20 जनवरी 2026 — भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था हो सकता है, लेकिन जब बात 'दुनिया की फैक्ट्री' बनने की आती है, तो अभी भी कई मील के पत्थर तय करने बाकी हैं। एशिया में विनिर्माण (Manufacturing) की होड़ में भारत को अपनी गति और तेज करनी होगी। हाल ही में जारी 'एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स' (AMI) 2026 की रिपोर्ट ने भारतीय नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के लिए एक रियलिटी चेक पेश किया है।
हॉन्ग कॉन्ग स्थित प्रतिष्ठित सलाहकार फर्म डेजन शिरा ऐंड एसोसिएट्स (Dezan Shira & Associates) द्वारा जारी इस सूचकांक के मुताबिक, भारत 11 प्रमुख एशियाई देशों के बीच छठे स्थान पर बना हुआ है। यह रैंकिंग बताती है कि मजबूत बुनियादी आर्थिक आधार और 'मेक इन इंडिया' जैसे अभियानों के बावजूद, भारत अभी कई मोर्चों पर अपने प्रमुख एशियाई प्रतिस्पर्धियों से पीछे है।
चीन का दबदबा कायम, मलेशिया ने किया बड़ा उलटफेर
लगातार तीसरे साल जारी की गई इस सूची में चीन ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी है और वह पहले स्थान पर काबिज है। लेकिन सबसे चौंकाने वाला उलटफेर दूसरे स्थान के लिए हुआ है।
- मलेशिया की छलांग: मलेशिया ने वियतनाम को पछाड़कर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है, जो उसकी बढ़ती औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है।
- वियतनाम फिसला: पिछले कुछ वर्षों से मैन्युफैक्चरिंग का 'पोस्टर बॉय' बना वियतनाम अब खिसककर तीसरे स्थान पर आ गया है।
टॉप-5 का गणित: विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सिंगापुर ने एक पायदान की छलांग लगाकर चौथा स्थान हासिल किया है और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ दिया है, जो अब पांचवें नंबर पर है। यह बदलाव एशियाई क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलती सप्लाई चेन डायनामिक्स का संकेत है।
भारत कहां खड़ा है? (6th Position Reality)
सूची में भारत के बाद इंडोनेशिया (7वें) और थाईलैंड (8वें) का नंबर आता है। जापान 9वें और फिलीपींस 10वें स्थान पर हैं, जबकि बांग्लादेश 11 देशों में आखिरी पायदान पर है।
अनोखी स्थिति: रिपोर्ट के अनुसार, भारत एक 'अनोखी स्थिति' (Unique Position) में है।
- सकारात्मक पक्ष: एक ओर विशाल घरेलू बाजार और नीतिगत सुधारों की तेज रफ्तार है।
- नकारात्मक पक्ष: दूसरी ओर बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक जटिलताओं जैसी पुरानी चुनौतियां अब भी पैर खींच रही हैं। हालांकि छठा स्थान मजबूत आर्थिक बुनियाद को दर्शाता है, लेकिन ये बाधाएं वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर दबाव बना रही हैं।
अच्छी खबर: वर्कफोर्स और इकोनॉमी में 'दम'
रिपोर्ट में भारत के लिए सब कुछ निराशाजनक नहीं है। कुछ मोर्चों पर भारत ने झंडे गाड़े हैं:
- अर्थव्यवस्था (Economy): कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था के पैमाने पर भारत तीसरे स्थान पर है और आर्थिक वृद्धि (Growth Rate) के मामले में उसे सबसे ज्यादा अंक मिले हैं। आर्थिक पैमाने (Scale) में भी भारत चीन के बाद दूसरे नंबर पर है।
- कार्यबल (Workforce): यह भारत की सबसे बड़ी ताकत (Superpower) है। श्रम बल के आकार, जनसांख्यिकी (Demographics), सस्ती श्रम लागत और शिक्षा जैसे मानकों पर भारत ने सभी 11 देशों को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया है।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: बुनियादी ढांचे में भारत चौथे और नवाचार (Innovation) में पांचवें पायदान पर है, जो सरकार के भारी कैपेक्स (Capex) खर्च का नतीजा है।
चिंता के विषय: टैक्स और लाल फीताशाही
रैंकिंग में गिरावट की मुख्य वजहें वे संरचनात्मक समस्याएं हैं जो निवेशकों को हतोत्साहित करती हैं।
- कर नीति (Tax Policy): इस मामले में भारत 9वें पायदान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कर दरों और प्रोत्साहनों (Incentives) के मामले में भारत अपने प्रतिस्पर्धियों—चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम और थाईलैंड—से पीछे है।
- व्यापार और लॉजिस्टिक्स: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के एकीकरण और लॉजिस्टिक्स (7वां स्थान) में भी भारत कमजोर रहा है। सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की लागत और समय अब भी ज्यादा है।
- राजनीतिक जोखिम: सबसे बड़ी चिंता 'राजनीतिक जोखिम' और 'भ्रष्टाचार की धारणा' को बताया गया है, जहां भारत को कम अंक मिले हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां निवेश से पहले संस्थागत स्थिरता पर बहुत बारीकी से नजर रखती हैं।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 भारत के लिए एक 'अलार्म बेल' है। सिर्फ सस्ता लेबर होना अब काफी नहीं है; निवेशकों को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'टैक्स स्टेबिलिटी' चाहिए। मलेशिया का ऊपर आना यह बताता है कि छोटे देश भी सही नीतियों से बाजी मार सकते हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि भारत को अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 8-9% तक लाना होगा और टैक्स कानूनों को सरल बनाना होगा। पीएलआई (PLI) स्कीम अच्छी है, लेकिन इसे और सेक्टरों में फैलाने की जरूरत है। अगर हम अपने 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) का फायदा उठाना चाहते हैं, तो हमें दुनिया के लिए केवल एक 'बाजार' नहीं, बल्कि एक कुशल 'कारखाना' बनना होगा।
