नई दिल्ली: होली का त्योहार रंगों और खुशियों से भरा होता है, लेकिन इससे पहले होलिका दहन का विशेष महत्व है। 2025 में होलिका दहन 13 मार्च को किया जाएगा, और इसका शुभ मुहूर्त रात 11:27 बजे से 12:00 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में होलिका दहन करना वर्जित माना जाता है, इसलिए शुभ मुहूर्त के दौरान ही यह अनुष्ठान संपन्न किया जाता है।
होलिका दहन से जुड़ी परंपराएं और नियम सदियों से चलते आ रहे हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है। इन्हीं मान्यताओं में से एक यह भी है कि होलिका दहन के तुरंत बाद घर नहीं जाना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह नियम नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
क्या होलिका दहन के तुरंत बाद घर जाना अशुभ होता है?
ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि होलिका दहन के तुरंत बाद घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए, बल्कि कुछ समय तक बाहर ही रहना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियों और बुरी ऊर्जा से बचाव होता है।
धर्मशास्त्रों में यह माना जाता है कि होलिका दहन के दौरान वातावरण में शक्तिशाली ऊर्जा का संचार होता है। इस समय सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की शक्तियां सक्रिय रहती हैं। यदि व्यक्ति तुरंत घर लौट आता है, तो नकारात्मक ऊर्जा उसके साथ घर में प्रवेश कर सकती है, जिससे परिवार के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक या आर्थिक हानि हो सकती है।
होलिका दहन के बाद घर न जाने के पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय कारण
1. नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान आसपास की नकारात्मक शक्तियां जाग्रत हो जाती हैं। अगर व्यक्ति तुरंत घर चला जाता है, तो ये शक्तियां उसके साथ घर के अंदर प्रवेश कर सकती हैं, जिससे घर के माहौल पर बुरा असर पड़ सकता है।
2. बुरी शक्तियों का प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, होलिका दहन के स्थान के पास बुरी शक्तियां भ्रमण करती हैं। यदि व्यक्ति तुरंत घर चला जाता है, तो ये शक्तियां उसके साथ घर में प्रवेश कर सकती हैं और परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
3. वातावरण को शुद्ध करने की आवश्यकता
होलिका दहन के बाद वातावरण में भारी ऊर्जा होती है। इसे संतुलित करने के लिए व्यक्ति को कुछ समय बाहर रहना चाहिए और धार्मिक स्थलों जैसे मंदिर में पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
4. शुभ कार्यों में संलग्न रहना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के बाद घर लौटने से पहले किसी शुभ कार्य में संलग्न होना चाहिए, जैसे कि किसी मंदिर में दर्शन करना, भजन-कीर्तन करना या फिर किसी वृद्धजन या जरूरतमंद को दान देना। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
5. परिवार के सदस्यों की सुरक्षा
अगर कोई व्यक्ति होलिका दहन के बाद तुरंत घर जाता है, तो घर के अन्य सदस्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। खासतौर पर बच्चे और बुजुर्ग जल्दी नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए, पूरे परिवार को इस नियम का पालन करना चाहिए।
होलिका दहन के बाद क्या करें?
1. मंदिर जाएं:
होलिका दहन के बाद भगवान विष्णु या हनुमान जी के मंदिर में जाकर दर्शन करें और प्रार्थना करें।
2. किसी धार्मिक स्थान पर कुछ समय बिताएं:
मंदिर, गुरुद्वारा या किसी अन्य धार्मिक स्थल पर कुछ समय बिताने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
3. होलिका की राख का तिलक करें:
होलिका दहन की राख को मंगलकारी माना जाता है। इसे तिलक करने से बुरी शक्तियों से रक्षा होती है।
4. जरूरतमंदों को दान दें:
होलिका दहन के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना शुभ माना जाता है।
5. घर में प्रवेश से पहले जल छिड़कें:
घर लौटने से पहले गंगाजल या पवित्र जल से अपने घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करें। इससे नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं।
क्या कहती है ज्योतिष और धार्मिक शास्त्र?
- स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है कि होलिका दहन के समय वातावरण में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा सक्रिय रहती है, जिसका असर सीधे मानव जीवन पर पड़ सकता है।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, होलिका दहन के बाद अगर व्यक्ति तुरंत घर जाता है, तो वह घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।
- ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार, होलिका दहन के बाद कुछ समय खुले स्थान में बिताना लाभकारी होता है। इससे वातावरण की शुद्धि होती है और व्यक्ति की आभा (Aura) भी सकारात्मक बनी रहती है।
निष्कर्ष
होलिका दहन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसे सही तरीके से करना बहुत जरूरी होता है। होलिका दहन के तुरंत बाद घर में प्रवेश करने की मनाही इसलिए होती है क्योंकि उस समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है। यदि हम धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं का पालन करें और शुभ कार्यों में संलग्न रहें, तो यह हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लेकर आएगा।
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