RBI का 'ट्रिपल धमाका'—लोन चुकाना हुआ सस्ता, अब हर हफ्ते बदलेगा आपका क्रेडिट स्कोर, 1 जनवरी से लागू हुए ये 3 बड़े नियम
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नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 19 जनवरी 2026 — भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए साल में आम आदमी की जेब और बैंकिंग आदतों से जुड़े तीन ऐसे बड़े नियमों में बदलाव किया है, जिसका सीधा असर आपकी वित्तीय सेहत (Financial Health) पर पड़ने वाला है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाना, ग्राहकों के हितों की रक्षा करना और धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना है। इन बदलावों के तहत अब क्रेडिट स्कोर, लोन की शर्तों और बैंक अकाउंट की निगरानी के तरीके पूरी तरह बदल गए हैं।
अगर आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो ये नियम आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।
1. क्रेडिट स्कोर: अब महीने में एक बार नहीं, 4 बार होगा अपडेट
सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (जैसे TransUnion CIBIL) के लिए किया गया है। अब तक आपका क्रेडिट स्कोर महीने में एक बार अपडेट होता था, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई है।
- नया नियम: आरबीआई के निर्देशानुसार, अब बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को महीने में चार बार (Fortnightly/Weekly basis) ग्राहकों का डेटा क्रेडिट ब्यूरो को भेजना होगा। इसका मतलब है कि आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) अब लगभग हर हफ्ते बदल सकता है।
फायदा और नुकसान:
- फायदा: अगर आपने कोई बकाया बिल चुकाया है, तो आपका स्कोर सुधरने के लिए आपको अगले महीने का इंतजार नहीं करना होगा। सुधार तुरंत दिखेगा।
- नुकसान: वहीं, अगर आप एक भी ईएमआई (EMI) या क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने से चूके, तो उसका नकारात्मक असर भी तुरंत आपके स्कोर पर दिखेगा। यह नियम ग्राहकों को अधिक अनुशासित बनाएगा।
क्या होता है सिबिल स्कोर? यह 300 से 900 के बीच का तीन अंकों का नंबर होता है जो आपकी साख (Creditworthiness) बताता है। 750 से ऊपर का स्कोर लोन लेने के लिए आदर्श माना जाता है।
2. फ्लोटिंग रेट लोन: प्रीपेमेंट की 'पेनल्टी' खत्म
लोन लेने वाले ग्राहकों, विशेषकर होम लोन और कार लोन वालों के लिए यह सबसे बड़ी राहत की खबर है। 1 जनवरी 2026 से फ्लोटिंग रेट (Floating Rate) वाले लोन्स पर एक बड़ा फैसला लागू हो गया है।
- नो फोरक्लोजर चार्ज: आरबीआई ने निर्देश दिया है कि फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन पर अब कोई प्रीपेमेंट (Prepayment) या फोरक्लोजर चार्ज (Foreclosure Charges) नहीं लगेगा।
- आजादी: पहले बैंक लोन जल्दी बंद करने पर 2% से 4% तक पेनल्टी वसूलते थे। अब ग्राहक बिना किसी डर के, जब चाहें अपने पास मौजूद सरप्लस पैसे से लोन चुका सकते हैं। इससे वे लाखों रुपये का ब्याज बचा सकेंगे।
- बैंक ट्रांसफर: यह नियम ग्राहकों को आसानी से अपना लोन दूसरे बैंक में ट्रांसफर (Balance Transfer) करने की भी आजादी देता है, जिससे बैंकों के बीच ब्याज दरें कम करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
3. डॉर्मेंट अकाउंट: 'सुस्त खातों' पर कड़ी निगरानी
तीसरा बड़ा बदलाव आपकी सुरक्षा से जुड़ा है। अक्सर लोग पुराने बैंक खाते खोलकर भूल जाते हैं, जो बाद में फ्रॉड का जरिया बन जाते हैं। आरबीआई ने ऐसे खातों पर नकेल कस दी है।
- इनएक्टिव vs डॉर्मेंट: अगर किसी बैंक अकाउंट में 12 महीने तक कोई लेनदेन (डेबिट/क्रेडिट) नहीं होता, तो उसे 'इनएक्टिव' माना जाएगा। यदि यह अवधि 2 साल तक खिंच जाती है, तो वह अकाउंट 'डॉर्मेंट' (Dormant) कैटेगरी में चला जाएगा।
- सख्ती: नए नियमों के तहत, बैंकों को ऐसे खातों की नियमित जांच करनी होगी। डॉर्मेंट अकाउंट को दोबारा सक्रिय करने के लिए ग्राहकों को नए सिरे से केवाईसी (KYC) अपडेट कराना होगा। बैंक अब चुपचाप अकाउंट फ्रीज नहीं कर सकेंगे; उन्हें ग्राहक को पहले सूचना (Notice) देनी होगी।
- मकसद: इसका मुख्य उद्देश्य 'मनी लॉन्ड्रिंग' (Money Laundering) और बेनामी लेनदेन पर रोक लगाना है। ठग अक्सर ऐसे ही बंद पड़े खातों का इस्तेमाल अवैध पैसे को इधर-उधर करने के लिए करते हैं।
आम आदमी के लिए क्या बदला?
इन नियमों का लब्बोलुआब यह है कि अब आपको अपनी बैंकिंग आदतों में चुस्ती लानी होगी।
- मॉनिटरिंग: अपने क्रेडिट स्कोर पर नियमित नजर रखें। एक छोटी सी चूक आपको भविष्य में लोन मिलने से रोक सकती है।
- बचत: अगर आपके पास फ्लोटिंग लोन है, तो बोनस या एक्स्ट्रा इनकम आते ही लोन का कुछ हिस्सा चुका दें। अब बैंक आपको इसके लिए दंडित नहीं कर सकता।
- एक्टिव रहें: अपने सभी बैंक खातों में साल में कम से कम एक बार छोटा-मोटा लेनदेन जरूर करें ताकि वे चालू रहें।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
आरबीआई के ये कदम उपभोक्ता सशक्तिकरण (Consumer Empowerment) की दिशा में मील का पत्थर हैं। प्रीपेमेंट चार्ज हटाना बैंकों की मनमानी पर करारी चोट है और ग्राहकों को वित्तीय आजादी देता है। क्रेडिट स्कोर का बार-बार अपडेट होना भले ही सख्ती लगे, लेकिन यह डिजिटल इकोनॉमी की रफ्तार से मेल खाता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'क्रेडिट अनुशासन' अब सफलता की कुंजी है। जो लोग समय पर भुगतान करेंगे, उनके लिए लोन सस्ता और आसान होगा। वहीं, डॉर्मेंट अकाउंट्स पर सख्ती साइबर अपराधों को रोकने में मदद करेगी। 2026 में बैंकिंग अब ज्यादा पारदर्शी, तेज और ग्राहक-केंद्रित होने जा रही है।
