गाजा में ‘पीली रेखा’ बनी मौत की सीमा, इजरायली फायरिंग में 77 फिलिस्तीनियों की मौत

गाजा पट्टी में इजरायली सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। अस्पष्ट सीजफायर लाइन पार करने के आरोप में इजरायली सैनिकों ने कम से कम 77 फिलिस्तीनियों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह सीमा कई इलाकों में स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं है, जिसके चलते आम नागरिक अनजाने में उसे पार कर बैठते हैं और जान गंवा देते हैं।
यह तथाकथित “पीली रेखा” उस इलाके को दर्शाती है, जहां से अक्टूबर में सीजफायर समझौते के तहत Israel Defense Forces ने पीछे हटने का दावा किया था। लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि इस रेखा के आसपास रह रहे फिलिस्तीनी आज भी भय और अनिश्चितता के माहौल में जीवन बिता रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सीजफायर लागू होने के बाद भी इजरायली सेना की गोलीबारी लगातार जारी है। यह “पीली रेखा” कई जगहों पर न तो नक्शों में साफ दिखाई देती है और न ही जमीन पर इसके स्पष्ट संकेत मौजूद हैं। इसके बावजूद सेना द्वारा इसे पार करने को गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ इलाकों में यह रेखा सीजफायर समझौते के तहत लगभग आधा किलोमीटर अंदर तक खींच दी गई है, जिससे इजरायल नियंत्रित क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।
आंकड़ों में सच्चाई
Gaza Health Ministry के मुताबिक, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक कुल 447 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें से कम से कम 77 लोग पीली रेखा के पास इजरायली फायरिंग का शिकार बने, जबकि 77 लोगों की मौत लाइन पार करने के कारण हुई।
Associated Press की जांच में सामने आया है कि मृतकों में किशोर और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीमा के नाम पर डर और भ्रम
इजरायली सेना ने सीमा को चिन्हित करने के लिए कुछ जगहों पर पीले बैरल और कंक्रीट बैरियर लगाए हैं, लेकिन गाजा के कई हिस्सों में यह रेखा अब भी बिना किसी निशान के है।
गाजा सिटी के निवासी अहमद अबू जहांल का कहना है कि लोग पीले बैरल से दूर रहने की पूरी कोशिश करते हैं। उनके अनुसार, ये निशान उनके घर से महज 100 मीटर दूर हैं, जबकि इजरायली सेना के नक्शों में दूरी 500 मीटर बताई जाती है। इस अंतर ने स्थानीय लोगों में डर और भ्रम दोनों को बढ़ा दिया है।
इजरायली सेना का पक्ष
इजरायली सेना ने स्वीकार किया है कि मंगलवार तक पीली रेखा के आसपास 57 लोगों को मार गिराया गया। सेना का दावा है कि इनमें से अधिकांश उग्रवादी थे। सेना का कहना है कि उसके सैनिक पहले चेतावनी देते हैं और फिर चेतावनी गोली चलाते हैं, लेकिन कई मामलों में नागरिक भी मारे गए हैं
इजरायल ने यह भी कहा है कि उसने अपनी सेना को एक 7 किलोमीटर गहरे बफर जोन में पीछे हटा लिया है। इस बफर जोन में गाजा की अधिकांश उपजाऊ जमीन, ऊंचे इलाके और सभी सीमा क्रॉसिंग शामिल हैं।
जमीन पर हालात: अस्पतालों की हकीकत
अल-अहली अस्पताल के निदेशक फदेल नईम के अनुसार, लगभग रोजाना हर उम्र के लोग गोली लगने की हालत में इमरजेंसी पहुंचते हैं। कई मरीजों को मृत अवस्था में लाया जाता है।
उन्होंने बताया कि भारी तबाही और मलबे के कारण सीजफायर लाइन को पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है। नईम ने खुद का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार खान यूनिस में वे भी लगभग सीमा पार कर चुके थे, जब स्थानीय लोगों ने चिल्लाकर उन्हें वापस बुलाया।
इसका असर क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अस्पष्ट सीमाएं और लगातार फायरिंग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के उल्लंघन की ओर इशारा करती हैं। इससे गाजा में पहले से जारी मानवीय संकट और गहरा सकता है।
करीब 20 लाख फिलिस्तीनी अब तटीय और मध्य गाजा में सिमटकर रहने को मजबूर हैं। सीमित जगह, संसाधनों की कमी और लगातार हिंसा ने आम नागरिकों की जिंदगी को बेहद मुश्किल बना दिया है।
आगे क्या
अगर सीजफायर लाइन को स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं किया गया और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव और स्वतंत्र जांच ही इस संकट को कम करने की दिशा में पहला कदम हो सकते हैं।
TheTrendingPeople.com की राय में
गाजा में “पीली रेखा” अब केवल एक सैन्य सीमा नहीं रही, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए मौत की रेखा बनती जा रही है। सीजफायर का मकसद हिंसा को रोकना और लोगों को राहत देना होता है, लेकिन अस्पष्ट सीमाएं और लगातार फायरिंग इस उद्देश्य को कमजोर कर रही हैं। अगर नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की जान यूं ही जाती रही, तो यह सीजफायर सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह जमीन पर हालात की निष्पक्ष जांच कराए और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए ठोस कदम उठाए।
