मजदूरों पर सर्जिकल स्ट्राइक"—राहुल गांधी ने नए रोजगार एक्ट को बताया 'काला कानून', बोले- भाजपा चाहती है 'एक राजा' वाला हिंदुस्तान
नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026— देश में रोजगार गारंटी कानून में हुए बदलाव को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। 'रचनात्मक कांग्रेस' द्वारा आयोजित 'मनरेगा बचाओ मोर्चा' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाया गया 'विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम' (VB-G RAM G Act) वास्तव में देश के मजदूरों पर एक सुनियोजित आक्रमण है। उन्होंने इसकी तुलना तीन कृषि कानूनों से करते हुए कहा कि भाजपा ने जो किसानों के साथ करने की कोशिश की थी, वही अब वह मजदूरों के साथ कर रही है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों का अधिकार था, जिसमें उन्हें काम मांगने का हक था और यह पंचायती राज के तहत संचालित होता था। लेकिन नए कानून के जरिए नरेंद्र मोदी सरकार इस अधिकार को खत्म कर रही है। राहुल ने दावा किया कि अब केंद्र सरकार तय करेगी कि किस राज्य को कितना पैसा मिलेगा और कहां काम होगा। उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा शासित राज्यों को ज्यादा फंड मिलेगा जबकि विपक्षी राज्यों के साथ भेदभाव होगा। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा एक ऐसा हिंदुस्तान चाहती है जिसमें लोकतंत्र और संविधान न हो, बल्कि एक राजा सारे फैसले करे और देश के गरीब पूरी तरह से अडाणी और अंबानी पर निर्भर हो जाएं।
उन्होंने जनता का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा वाले डरपोक लोग हैं और इन्हें रोकने के लिए सबको एकजुट होना होगा। राहुल ने जोर देकर कहा कि जिस तरह किसानों और हम सबने मिलकर दबाव डालकर कृषि कानूनों को रोका था, उसी तरह मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी साथ खड़ा होना होगा। उनका कहना था कि यह लड़ाई केवल एक कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि 'एक व्यक्ति-एक वोट' की परिकल्पना और संविधान को बचाने की है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
राहुल गांधी का यह आक्रामक रुख स्पष्ट करता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से संसद तक ले जाने के लिए तैयार है। मनरेगा ग्रामीण भारत की जीवनरेखा रही है और इसके ढांचे में कोई भी बदलाव राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
The Trending People का विश्लेषण है कि सरकार को नए अधिनियम को लेकर विपक्ष और राज्यों के संदेहों को दूर करना चाहिए। अगर फंड आवंटन में भेदभाव की आशंका सच साबित होती है, तो यह संघीय ढांचे के लिए खतरनाक होगा। वहीं, विपक्ष द्वारा इसे 'अडाणी-अंबानी' से जोड़ना एक पुराना राजनीतिक दांव है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस किसानों की तरह मजदूरों को भी लामबंद कर पाती है या यह विरोध केवल बयानों तक सीमित रह जाएगा।
