महाराष्ट्र के 15 शहरों में अब चलेगा 'महिला राज'—मुंबई को मिलेगी छठी बार महिला मेयर, लॉटरी निकलते ही शिवसेना (UBT) ने नियमों पर छेड़ा 'महाभारत'
मुंबई, दिनांक: 22 जनवरी 2026 — महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में गुरुवार को एक बड़ा और निर्णायक मोड़ आया है। राज्य के शहरी विकास मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित 29 नगर निगमों के महापौर पदों के लिए आरक्षण की स्थिति साफ कर दी है। मुंबई में शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से निकाली गई लॉटरी ने यह तय कर दिया है कि राज्य के आधे से अधिक महानगरों की कमान अब मातृशक्ति के हाथों में होगी। लॉटरी प्रक्रिया के नतीजों के मुताबिक, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित राज्य के 15 नगर निगमों में महिला महापौर होंगी। हालांकि, इस घोषणा के साथ ही सियासी पारा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आरक्षण के रोटेशन और नियमों को लेकर विपक्ष, विशेषकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कड़ा एतराज जताते हुए सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया है।
लॉटरी प्रक्रिया के तहत राज्य के 29 नगर निगमों में सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। घोषित नतीजों के अनुसार, 16 महापौर पद आरक्षित श्रेणियों यानी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए तय किए गए हैं, जबकि 13 पद सामान्य वर्ग (Open Category) के लिए रखे गए हैं। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान के तहत 15 नगर निगमों में महिला महापौर चुनी जाएंगी। सबसे ज्यादा चर्चा मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को लेकर है, जो देश का सबसे अमीर नगर निगम है। मुंबई में यह छठा मौका होगा जब महापौर की कुर्सी पर कोई महिला विराजमान होगी। पुणे, नागपुर, नासिक और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे अन्य बड़े महानगरों में भी महापौर पद सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जिससे इन शहरों में महिला नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा।
इस आरक्षण प्रक्रिया पर विवाद तब गहरा गया जब शिवसेना (UBT) की वरिष्ठ नेता और मुंबई की पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने बीएमसी के आरक्षण रोस्टर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लॉटरी निकालने से ठीक पहले नियमों में गुपचुप तरीके से बदलाव किया है, जिसकी जानकारी किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दी गई। पेडनेकर का तर्क है कि पिछले दो कार्यकालों (Terms) में मुंबई के महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए था। रोटेशन के स्वाभाविक सिद्धांत के अनुसार, इस बार यह पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होना चाहिए था, लेकिन इसे फिर से सामान्य (महिला) कर दिया गया। शिवसेना का आरोप है कि यह बदलाव सत्ताधारी गठबंधन को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है ताकि वे अपनी पसंद का उम्मीदवार उतार सकें।
विवाद की आंच केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। परभणी नगर निगम में भी महिला महापौर के आरक्षण को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। वहां भी विपक्ष का कहना है कि रोटेशन के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया है। शिवसेना (UBT) ने साफ संकेत दिए हैं कि वे इस 'नियम विरुद्ध' प्रक्रिया को हल्के में नहीं लेंगे। पार्टी ने कहा है कि वह इस मुद्दे को लेकर राज्य चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाएगी और जरूरत पड़ी तो न्यायिक मंच (Court) का भी रुख करेगी। उनका मानना है कि आरक्षण का उद्देश्य सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देना है, लेकिन नियमों में फेरबदल कर इसे राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।
लॉटरी के अन्य रोचक पहलुओं पर नजर डालें तो ठाणे नगर निगम में महापौर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है, जो एक बड़ा राजनीतिक बदलाव ला सकता है। वहीं, कल्याण-डोंबिवली में अनुसूचित जनजाति वर्ग का महापौर होगा। चंद्रपुर नगर निगम ने तो एक अनोखा इतिहास रच दिया है। वहां लगातार पांचवीं बार महिला महापौर चुनी जाएगी, जो राज्य में एक रिकॉर्ड है। यह दर्शाता है कि चंद्रपुर की राजनीति में महिलाओं का वर्चस्व कितना मजबूत हो चुका है। लातूर और अमरावती जैसे शहरों में भी आरक्षण के नए समीकरणों ने कई दिग्गजों के सपनों पर पानी फेर दिया है, जबकि कई नए चेहरों के लिए लॉटरी खुल गई है।
आरक्षण तय होने के बाद अब अगली प्रक्रिया महापौर पद के चुनाव की होगी। राज्य चुनाव आयोग जल्द ही इसके लिए नामांकन दाखिल करने की तारीखों का ऐलान करेगा। इसके बाद प्रत्येक नगर निगम की विशेष साधारण सभा (General Body Meeting) बुलाई जाएगी, जहां नवनिर्वाचित पार्षद हाथ उठाकर या मतदान के जरिए अपने महापौर का चुनाव करेंगे। चूंकि यह चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं बल्कि पार्षदों के समर्थन पर होता है, इसलिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने पार्षदों को व्हिप (Whip) जारी करेंगे। व्हिप का उल्लंघन करने या पार्टी लाइन के खिलाफ वोट देने पर पार्षद की सदस्यता रद्द करने का प्रावधान है, इसलिए जोड़-तोड़ की राजनीति भी तेज होने की संभावना है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
महाराष्ट्र में 15 नगर निगमों में महिला महापौर का होना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक स्वागत योग्य और प्रगतिशील कदम है। स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की भागीदारी से विकास के मुद्दों को एक नया और संवेदनशील नजरिया मिलता है। चंद्रपुर का रिकॉर्ड और मुंबई में महिला नेतृत्व की निरंतरता यह बताती है कि राज्य की जनता महिला नेतृत्व को स्वीकार कर रही है।
The Trending People का विश्लेषण है कि आरक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) लोकतंत्र की आत्मा है। शिवसेना (UBT) द्वारा उठाए गए सवाल, विशेषकर रोटेशन के नियमों में बदलाव को लेकर, गंभीर हैं। यदि रोटेशन के स्थापित सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है, तो यह वंचित वर्गों के अधिकारों का हनन हो सकता है। सरकार और चुनाव आयोग को इन शंकाओं का समाधान करना चाहिए ताकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर कोई आंच न आए। बीएमसी जैसे प्रतिष्ठित निगम में विवाद होना शहर की छवि के लिए ठीक नहीं है। अब देखना होगा कि क्या यह विवाद कानूनी लड़ाई में बदलता है या राजनीतिक दल जनादेश के आधार पर अपना महापौर चुनते हैं।
