लखनऊ में गरजे अखिलेश—"पूंजीवाद मीडिया का मालिक बन बैठा है," जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर BJP और प्रशासन को लिया आड़े हाथों, शंकराचार्य के अपमान पर भी तोड़ी चुप्पी
लखनऊ, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की सबसे मजबूत आवाज और समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर अब तक का सबसे तीखा वैचारिक हमला बोला है। मौका था 'छोटे लोहिया' कहे जाने वाले समाजवादी विचारक पंडित जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि का। लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद अखिलेश यादव ने न केवल समाजवादी विचारधारा के सामने खड़ी चुनौतियों का जिक्र किया, बल्कि मीडिया, पूंजीवाद और धार्मिक विवादों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि आज देश में पूंजीपतियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि यह समाजवादी आदर्शों के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। उनके अनुसार, जब पूंजीपति सत्ता और व्यवस्था पर हावी होते हैं, तो गरीबों और वंचितों की आवाज दब जाती है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पूंजीवाद ने मीडिया पर नियंत्रण जमा लिया है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे किसी का 'एजेंडा' चलाने के बजाय सच्चाई का साथ दें, क्योंकि लोकतंत्र के लिए यह खतरनाक संकेत है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम समाजवादियों के लिए यह चिंता का विषय है कि समाजवादी आंदोलन को कैसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर और नेताजी मुलायम सिंह यादव के आदर्शों को जीवित रखने की चुनौती का जिक्र किया। अखिलेश ने कहा कि जनेश्वर मिश्र को हम इसलिए याद करते हैं क्योंकि उन्होंने सड़क से लेकर संसद तक गरीबों की लड़ाई लड़ी और आंदोलन की मशाल हमें सौंपी। हम उस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं जो जनेश्वर मिश्र जी ने हम सभी को सौंपा था। उनका इशारा स्पष्ट था कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी अपने मूल 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और समाजवादी जड़ों को और मजबूत करेगी।
बातचीत का दायरा केवल विचारधारा तक सीमित नहीं रहा। अखिलेश यादव ने हाल ही में नोएडा में हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में भी सरकार को घेरा। जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या इंजीनियर शराब के नशे में था या पार्टी में गया था, तो अखिलेश ने मानवीय पहलू को सामने रखते हुए प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि वह किस पार्टी में गया था, बल्कि असल सवाल यह है कि दुर्घटना के बाद सरकार और उसके विभाग उसकी जान बचाने में क्यों नाकाम रहे। अखिलेश ने कहा कि सुनने में आ रहा है कि पानी बहुत ठंडा होने के कारण कोई भी उनकी जान बचाने के लिए आगे नहीं आया। अगर उनकी जान गई, तो यह सरकार की लापरवाही और आपदा प्रबंधन की विफलता है। उन्होंने इंजीनियर की छवि खराब करने वाले वायरल वीडियो पर भी नाराजगी जताई और कहा कि एक व्यक्ति की जान चली गई है, ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, न कि मृतक के चरित्र हनन पर जोर दिया जाए।
प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद पर भी अखिलेश यादव ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने इसे भाजपा का दोहरा चरित्र बताया। सपा प्रमुख ने कहा कि आज देश भर के सनातनी शंकराचार्य के साथ खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी धर्म के नाम पर ऐसे काम कर रही है, जिन्हें करने से खुद अधिकारी भी हिचकिचा रहे हैं। अखिलेश ने दावा किया कि नोटिस जारी करने वाले या शंकराचार्य को स्नान से रोकने वाले अधिकारी खुद इस पाप का हिस्सा नहीं बनना चाहते, वे केवल 'ऊपर' के दबाव में ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इतनी पवित्र जगह पर एक धर्मगुरु को पवित्र स्नान करने से रोका जा रहा है, तो इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अब तो भाजपा के अपने नेता और कार्यकर्ता भी दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि उनकी सरकार संतों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है।
इसके अलावा, संभल के एक मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के तबादले पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। अखिलेश ने शायराना अंदाज में कहा कि आप अधिकारी का तबादला कर सकते हैं, लेकिन "सच को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।" उन्होंने भरोसा जताया कि इस मामले को उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय देखेंगे और न्याय होगा। अपने संबोधन के अंत में अखिलेश ने फिर दोहराया कि किसानों, गरीबों और आम नागरिकों की जान और मान-सम्मान तभी सुरक्षित होगा, जब भाजपा को सत्ता से हटाया जाएगा। समाजवादी पार्टी अपने पीडीए नारे के साथ इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएगी।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
अखिलेश यादव का यह संबोधन एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरने की रणनीति दर्शाता है। जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि के बहाने उन्होंने जहां अपने कैडर में वैचारिक जोश भरने की कोशिश की, वहीं शंकराचार्य के मुद्दे पर सरकार को घेरकर उन्होंने भाजपा के कोर 'हिंदुत्व वोट बैंक' में सेंध लगाने और 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर चलने का संकेत दिया है।
The Trending People का विश्लेषण है कि अखिलेश यादव अब केवल जातिगत समीकरणों पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलताओं और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी मुखर हो रहे हैं। नोएडा के इंजीनियर की मौत को 'सरकारी लापरवाही' बताना और शंकराचार्य के अपमान को 'अन्याय' कहना, यह बताता है कि वे शहरी मध्यम वर्ग और धार्मिक समुदाय दोनों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। पूंजीवाद और मीडिया पर उनका हमला यह दर्शाता है कि वे 2027 की लड़ाई को 'अमीर बनाम गरीब' और 'सच बनाम झूठ' के नैरेटिव पर ले जाना चाहते हैं।
