हवा में 'सुविधाओं' का मजाक—एयर इंडिया को कोर्ट की कड़ी फटकार, टूटी सीट और गंदे वॉशरूम के लिए देना होगा 1.5 लाख का हर्जाना
नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — भारतीय विमानन क्षेत्र में सेवा की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, लेकिन इस बार एक उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) ने देश की अग्रणी एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) को उसकी लापरवाही के लिए न केवल आड़े हाथों लिया है, बल्कि एक नजीर पेश करने वाला फैसला भी सुनाया है। दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान यात्रियों को 'घटिया सुविधाएं' देने और सेवा में गंभीर कमी के मामले में एयरलाइन पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एयर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता यात्री और उनकी बेटी को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के एवज में कुल 1.5 लाख रुपये का मुआवजा दे।
यह फैसला नई दिल्ली स्थित डिस्ट्रिक्ट कंज़्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन-VI की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्र की बेंच ने 14 जनवरी को सुनाया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट माना कि उड़ान के दौरान यात्रियों को जिन सुविधाओं का वादा किया गया था और जिसके लिए उनसे भारी-भरकम किराया वसूला गया था, वे सुविधाएं उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गईं। कोर्ट ने इसे 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) और 'अनुचित व्यापार व्यवहार' का स्पष्ट मामला बताया है।
क्या था 'हवा में नरक' का वह अनुभव?
मामला दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क एक्सटेंशन निवासी शैलेंद्र भटनागर की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने सितंबर 2023 में अपनी बेटी के साथ यात्रा के लिए 'मेक माय ट्रिप' के जरिए एयर इंडिया की दिल्ली-न्यूयॉर्क-दिल्ली (आने-जाने) की फ्लाइट के इकोनॉमी क्लास टिकट बुक किए थे। उम्मीद थी कि एक प्रीमियम एयरलाइन के साथ अंतरराष्ट्रीय सफर आरामदायक होगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। शिकायतकर्ता के अनुसार, विमान के अंदर का नजारा किसी बुरे सपने जैसा था। लंबी दूरी की इस उड़ान में उन्हें जिन सीटों पर बैठाया गया, वे टूटी हुई थीं और बैठने के लिए बेहद असुविधाजनक थीं।
परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं। लंबी इंटरनेशनल फ्लाइट में मनोरंजन के लिए लगा इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम (IF) काम नहीं कर रहा था, जिससे सफर काटना मुश्किल हो गया। इसके अलावा, विमान के वॉशरूम बेहद गंदे थे और उनसे बदबू आ रही थी, जिसने स्वच्छता के दावों की पोल खोल दी। यात्रियों का आरोप है कि परोसा गया खाना भी खराब गुणवत्ता का था और विमान के अंदर अजीब सी दुर्गंध फैली हुई थी। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि केबिन क्रू से बार-बार शिकायत करने और मदद मांगने के बावजूद उनकी ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या सहायता नहीं मिली।
कोर्ट का हंटर: "मुफ्त में नहीं, पैसे देकर आए थे यात्री"
आयोग ने एयर इंडिया की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, शारीरिक कष्ट और उत्पीड़न के लिए मुआवजा पाने का पूरा अधिकार है। बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यात्रियों से जिन सुविधाओं के लिए शुल्क लिया गया था, वे उन्हें प्रदान नहीं की गईं। एक एयरलाइन का दायित्व केवल यात्री को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना नहीं है, बल्कि उस सफर को सुरक्षित और आरामदायक बनाना भी है।
आदेश के मुताबिक, एयर इंडिया को शिकायतकर्ता शैलेंद्र भटनागर और उनकी बेटी को 50,000-50,000 रुपये (कुल 1 लाख रुपये) मुआवजे के तौर पर देने होंगे। इसके अलावा, आयोग ने एयरलाइन को मुकदमे के खर्च (Litigation Cost) के रूप में 50,000 रुपये अतिरिक्त चुकाने का भी आदेश दिया है। इस तरह कुल हर्जाना 1.5 लाख रुपये बनता है। हालांकि, आयोग ने टिकट की पूरी रकम रिफंड करने की मांग को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यात्रियों ने अपनी यात्रा पूरी कर ली थी और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाया गया था।
एयर इंडिया का बचाव और 'अपग्रेड' का पेंच
सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए अपना पक्ष रखा। एयरलाइन का दावा था कि उड़ान से पहले विमान की नियमित और गहन तकनीकी जांच की गई थी और उसे उड़ान के लिए पूरी तरह 'फिट' (Airworthy) पाया गया था। एयर इंडिया ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने सफर के दौरान बिजनेस क्लास में अपग्रेड (Upgrade) की मांग की थी, लेकिन उस क्लास में सीट उपलब्ध न होने के कारण उनकी मांग पूरी नहीं की जा सकी। एयरलाइन ने संकेत दिया कि शायद इसी नाराजगी में यह शिकायत दर्ज कराई गई। हालांकि, आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और यात्री की परेशानी को देखते हुए एयरलाइन की दलीलों को नाकाफी माना।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
उपभोक्ता अदालत का यह फैसला विमानन कंपनियों के लिए एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up Call) है। टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया से सुधार की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर (या कहें हवाई स्तर पर) यात्रियों के अनुभव में अभी भी कई खामियां नजर आती हैं। टूटी सीटें और गंदे वॉशरूम किसी भी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के लिए अस्वीकार्य हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह 1.5 लाख का जुर्माना एयर इंडिया जैसी बड़ी कंपनी के लिए रकम के लिहाज से छोटा हो सकता है, लेकिन इसका असर उसकी साख (Reputation) पर गहरा पड़ेगा। यात्रियों का समय और पैसा दोनों कीमती हैं। यह फैसला आम उपभोक्ता को यह विश्वास दिलाता है कि अगर सेवा में कमी है, तो कानून उनके साथ खड़ा है। एयरलाइंस को समझना होगा कि 'महाराजा' का अनुभव सिर्फ विज्ञापन में नहीं, बल्कि सीट के कुशन और खाने की प्लेट में भी दिखना चाहिए।
