NCERT सिलेबस में बड़ा बदलाव: 8वीं के छात्र अब पढ़ेंगे 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' का पाठ; जानें नई किताब में क्या बदला
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 के सामाजिक विज्ञान (Social Science) के सिलेबस में बड़ा फेरबदल किया है। अब स्कूली छात्र केवल किताबी न्याय व्यवस्था ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि अदालतों की दहलीज पर खड़ी उन असल चुनौतियों को भी समझेंगे, जो अक्सर बंद कमरों की चर्चा का विषय हुआ करती थीं।
नई पाठ्यपुस्तक में पहली बार 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' (Corruption in Judiciary) जैसे अति संवेदनशील विषय को एक अलग और स्पष्ट खंड के रूप में शामिल किया गया है।
पुरानी और नई किताब में क्या बदल गया?
अब तक छात्र केवल यह पढ़ते आए थे कि न्यायपालिका की भूमिका क्या है, अदालतें कैसे काम करती हैं और एक आम नागरिक वहां तक कैसे पहुंच सकता है।
- पुरानी किताबें: पुरानी किताबों में 'न्याय में देरी' का जिक्र तो था, लेकिन 'भ्रष्टाचार' शब्द से साफ तौर पर परहेज किया गया था।
- नई किताब: अब NCERT ने बेबाकी से यह स्वीकार किया है कि न्याय के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, जजों की कमी, पेचीदा कानूनी प्रक्रियाएं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव कैसे न्याय की राह में रोड़ा बनते हैं, इसे भी छात्रों के लिए विस्तार से समझाया गया है।
जवाबदेही और शिकायतों का लेखा-जोखा
इस नए अध्याय में केवल व्यवस्था की कमियों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि पुख्ता आंकड़ों के जरिए जमीनी हकीकत बयां की गई है।
- आंकड़े: नई किताब बताती है कि साल 2017 से 2021 के बीच सिस्टम को न्यायपालिका से जुड़ी 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
- संवैधानिक प्रक्रिया: छात्र अब यह भी पढ़ेंगे कि अगर किसी जज पर भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर आरोप लगते हैं, तो उन्हें पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है। 8वीं कक्षा के बच्चे अब 'महाभियोग' (Impeachment) जैसे कड़े प्रावधानों और आरोपी न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने के लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में भी गहराई से जान सकेंगे।
गरीबों के लिए न्याय की लड़ाई और कठिन
NCERT ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लेटलतीफी का सबसे बुरा असर समाज के गरीब और वंचित वर्ग पर पड़ता है। प्रसिद्ध कहावत 'न्याय में देरी, न्याय से वंचित होना' (Justice Delayed is Justice Denied) को अब मौजूदा हालातों से सीधे जोड़कर पेश किया गया है।
संपादकीय विश्लेषण
NCERT का यह कदम शिक्षा प्रणाली को यथार्थवादी (Realistic) बनाने की दिशा में एक शानदार पहल है। बच्चों को केवल आदर्शवादी बातें पढ़ाने के बजाय, उन्हें सिस्टम की खामियों और चुनौतियों से रूबरू कराना उन्हें अधिक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाएगा। 'भ्रष्टाचार' जैसे विषय को स्कूल स्तर पर पढ़ाना इस बात का संकेत है कि देश अब अपनी कमियों को छिपाने के बजाय उन पर खुलकर चर्चा करने और उन्हें सुधारने के लिए तैयार है। यह बदलाव छात्रों में देश की न्याय प्रणाली के प्रति एक आलोचनात्मक और रचनात्मक नजरिया विकसित करने में मदद करेगा।
