दिल्ली-NCR फिर बना 'गैस चैंबर'—लागू हुआ GRAP-4 का सबसे सख्त पहरा, आपकी कार सड़क पर निकलेगी या नहीं? यहां चेक करें पूरी लिस्ट
नई दिल्ली/नोएडा/गुरुग्राम, दिनांक: 19 जनवरी 2026 — देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाके (NCR) एक बार फिर जहरीली हवा के गुबार में कैद हो गए हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बिना समय गंवाए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा और सबसे सख्त चरण, यानी GRAP-4 लागू कर दिया है। यह कदम एक 'स्वास्थ्य आपातकाल' (Health Emergency) जैसा है, जिसका सीधा असर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाली लाखों गाड़ियों पर पड़ा है।
प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अगर आप कार मालिक हैं और दिल्ली-एनसीआर में ड्राइव करने की सोच रहे हैं, तो सड़क पर निकलने से पहले अपनी आरसी (RC) जरूर चेक कर लें, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपकी गाड़ी जब्त करवा सकती है और आपकी जेब पर भारी जुर्माना डाल सकती है।
किन गाड़ियों पर लगा 'रेड सिग्नल'? (Banned Vehicles)
GRAP-4 के तहत सबसे बड़ी गाज पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले निजी वाहनों पर गिरी है। नियम स्पष्ट हैं और इनमें कोई रियायत नहीं दी गई है।
- BS-3 पेट्रोल कारें: अगर आपके पास भारत स्टेज-3 (BS-III) मानक वाली पेट्रोल कार है, तो उसे दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं है। ये गाड़ियां आमतौर पर 2010 से पहले की होती हैं।
- BS-4 डीजल कारें: डीजल वाहनों पर सख्ती और ज्यादा है। BS-IV (भारत स्टेज-4) मानक वाली डीजल कारों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- ट्रकों की एंट्री बंद: आवश्यक वस्तुओं (सब्जी, दूध, दवा) को ढोने वाले और सीएनजी/इलेक्ट्रिक ट्रकों को छोड़कर, दिल्ली में अन्य भारी वाहनों (Trucks) के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
नियम सब पर लागू: यह प्रतिबंध केवल दिल्ली नंबर की गाड़ियों के लिए नहीं है। चाहे आपकी गाड़ी हरियाणा, उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य में रजिस्टर्ड हो, अगर वह इन मानकों (BS-3 पेट्रोल/BS-4 डीजल) में आती है, तो दिल्ली-एनसीआर में उसकी 'नो-एंट्री' है।
किन वाहनों को मिली है 'ग्रीन लाइट'? (Allowed Vehicles)
सख्ती के बीच कुछ श्रेणियों को राहत दी गई है ताकि जनजीवन पूरी तरह ठप न हो।
- BS-VI वाहन: दिल्ली में BS-VI मानक वाली पेट्रोल और डीजल कारों को चलाने की अनुमति है, क्योंकि ये सबसे कम प्रदूषण करती हैं।
- BS-IV पेट्रोल: BS-IV पेट्रोल कारों को भी अभी छूट के दायरे में रखा गया है (प्रतिबंध केवल डीजल पर है)।
- क्लीन फ्यूल: इलेक्ट्रिक (EV) और सीएनजी (CNG) से चलने वाली गाड़ियों पर कोई पाबंदी नहीं है।
PUC सर्टिफिकेट अनिवार्य: हालांकि, छूट वाली गाड़ी चलाते समय भी आपके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC Certificate) होना अनिवार्य है। बिना पीयूसी के वाहन चलाने पर 10,000 रुपये तक का चालान कट सकता है।
पेट्रोल पंपों को निर्देश: "ईंधन न दें"
नियमों को सख्ती से लागू कराने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। दिल्ली के पेट्रोल पंपों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंधित वाहनों (BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल) को ईंधन न दें। हालांकि, इसकी व्यावहारिक निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन यह प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है।
कब लागू होता है GRAP-4?
GRAP-4 को तब सक्रिय किया जाता है जब AQI 450 के पार चला जाता है और हवा की गुणवत्ता 'गंभीर प्लस' (Severe Plus) श्रेणी में बनी रहती है। इस स्थिति में सामान्य उपाय नाकाफी माने जाते हैं।
मकसद: इसका उद्देश्य वाहनों, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन को तुरंत कम करना होता है। इसके तहत स्कूलों को बंद करने और सरकारी/निजी दफ्तरों में 50% क्षमता के साथ काम करने (Work From Home) जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
नियम तोड़ने पर तुरंत 'एक्शन'
प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैनात एजेंसियों—ट्रैफिक पुलिस और ट्रांसपोर्ट विभाग—को मौके पर ही कार्रवाई का अधिकार दिया गया है।
- जब्ती: GRAP नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों, खासतौर पर निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रक या अवैध रूप से दिल्ली में प्रवेश करने वाली प्रतिबंधित कारों को तुरंत जब्त (Impound) किया जा सकता है।
- जुर्माना: इसके अलावा, 20,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
हमारी राय
दिल्ली का प्रदूषण अब एक वार्षिक त्रासदी बन चुका है। GRAP-4 लागू करना प्रशासन की मजबूरी है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। प्रतिबंधों से आम जनता, विशेषकर वे लोग जो पुरानी कारों पर निर्भर हैं, उन्हें भारी असुविधा होती है।
The Trending People का विश्लेषण है कि सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट (मेट्रो और बस) की फ्रीक्वेंसी और कनेक्टिविटी बढ़ानी चाहिए ताकि लोग अपनी कारें छोड़कर इनका इस्तेमाल करें। केवल प्रतिबंध लगाने से हवा साफ नहीं होगी; जब तक पड़ोसी राज्यों में पराली जलना बंद नहीं होगा और धूल प्रबंधन पर काम नहीं होगा, दिल्ली हर साल ऐसे ही घुटती रहेगी। नागरिकों से अपील है कि वे इस 'आपातकाल' में सहयोग करें और कार-पूलिंग या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प चुनें।
